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Greater Noida Authority News : बारिश आई, आफत लाई!, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण बना 'जल प्राधिकरण', लिफ्ट बंद, कामकाज ठप, फरियादी बेहाल!, प्राधिकरण का "सिस्टम" हुआ पानी में डूबा!, लिफ्ट बंद, अफसरों से संपर्क भी बंद!

ग्रेटर नोएडा अंडरपास का जिम्मेदार कौन? UPSIDA, GNIDA या “कोई नहीं”?, सोशल मीडिया पर वायरल हुए 'पानी में डूबा प्राधिकरण' और ग्रेटर नोएडा के वीडियो


ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
सोमवार सुबह की बारिश ने ग्रेटर नोएडा की सुंदर सड़कों और सुनियोजित सिस्टम की पोल खोल दी। बारिश ने जहां आमजन को भीगने पर मजबूर कर दिया, वहीं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय को पानी-पानी कर दिया। हालात इतने बदतर हो गए कि प्राधिकरण भवन के बेसमेंट में पानी भर गया और लिफ्टों को बंद करना पड़ा। नतीजतन, दफ्तर आने वाले फरियादी और कर्मचारी घंटों तक सीढ़ियों में ऊपर-नीचे होते रहे।


प्राधिकरण का “सिस्टम” हुआ पानी में डूबा!

बारिश के महज दो से ढाई घंटे के भीतर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का आधिकारिक तंत्र ध्वस्त होता नजर आया। लिफ्ट बंद हो गई, बेसमेंट में बदबू फैल गई और अधिकारी नदारद। पंखा और पानी टैंकर ही समाधान बनकर सामने आए।

फरियादी हैरान-परेशान होकर सोशल मीडिया पर वीडियो शेयर कर पूछते नजर आए:

अगर प्राधिकरण अपने ही ऑफिस में जलभराव नहीं रोक पा रहा, तो शहर का क्या हाल होगा?


लिफ्ट बंद, अफसरों से संपर्क भी बंद!

  • बेसमेंट में पानी भरने से लिफ्ट ने काम करना बंद कर दिया।
  • लिफ्ट के पैनल्स खराब हो गए और फुल बदबू फैली।
  • किसी आपातकालीन व्यवस्था का कोई अता-पता नहीं था।
  • फरियादियों को तीन-तीन मंजिल सीढ़ियां चढ़नी पड़ीं।
  • कई बुजुर्गों और महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ा।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए ‘पानी में डूबा प्राधिकरण’ के वीडियो

बारिश के कुछ घंटों बाद ही ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के जलमग्न ऑफिस की तस्वीरें और वीडियो X (ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर वायरल हो गईं। इनमें देखा जा सकता है:

  • कैसे टैंकर से पानी बाहर निकाला जा रहा है
  • लिफ्ट के पास रखे पंखे से सुखाया जा रहा है पानी
  • कर्मचारी फावड़े और मग्गे लेकर पानी निकालते दिख रहे हैं

स्वास्थ्य संकट भी बना चिंता का विषय

बेसमेंट में पानी के लंबे समय तक ठहराव ने एक संभावित महामारी की आशंका को जन्म दे दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार:

जमे हुए गंदे पानी से डेंगू, मलेरिया और सांस की बीमारियां तेजी से फैल सकती हैं।

फरियादियों ने बताया कि बदबू और सीलन से सिरदर्द, खांसी और उलटी जैसी समस्याएं भी सामने आने लगी हैं।

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अंडरपास का जिम्मेदार कौन? UPSIDA, GNIDA या “कोई नहीं”?

लोगों का सवाल साफ है:

जब मानसून हर साल आता है, तो इसके इंतज़ाम क्यों नहीं होते?
क्या ये इंजीनियरिंग की गलती है या सिस्टम की लापरवाही?

लोगों ने L&T, GNIDA और UPSIDA को एक साथ जिम्मेदार ठहराया है, क्योंकि:

  • अंडरपास से लेकर ऑफिस बेसमेंट तक जलभराव है
  • सभी जगहों पर जल निकासी के इंतज़ाम फेल हो गए
  • बगैर इमरजेंसी मैनेजमेंट के इतना बड़ा सिस्टम कैसे चल रहा?

क्या बोले कर्मचारी?

प्राधिकरण कार्यालय के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया:

हर साल यही हाल होता है, शिकायतें होती हैं लेकिन कार्रवाई नहीं। जब तक VVIP न आएं, कोई नहीं सुनता।


सवालों के घेरे में प्राधिकरण की कार्यशैली

अब जब खुद प्राधिकरण का ऑफिस ही जलभराव से बेहाल हो गया है, तो शहरवासियों का भरोसा डगमगाना लाज़मी है। कोई भी अधिकारी सामने आकर स्पष्टीकरण देने को तैयार नहीं दिखा।


समाधान के नाम पर ‘जुगाड़’!

  • बेसमेंट से पानी टैंकर में भरकर बाहर फेंका जा रहा है
  • पंखा लगाकर लिफ्ट सुखाई जा रही है
  • कर्मचारी फर्श पर झाड़ू लेकर पानी समेटते दिखे

लेकिन स्थायी समाधान अभी भी दूर की कौड़ी बना हुआ है।


निष्कर्ष: अगर प्राधिकरण खुद नहीं बचा सकता अपना घर, तो शहर कैसे?

इस बारिश ने एक बार फिर याद दिला दिया कि विकास का चेहरा तब तक अधूरा है, जब तक बुनियादी व्यवस्था ज़मीन पर सही नहीं उतरती।
अब देखना है कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण इस शर्मिंदगी से कोई सबक लेता है या अगली बारिश में फिर यही दृश्य दोहराया जाएगा?


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