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Greater Noida MSME News : "MSME को चाहिए पंख, न कि पेंच!", IEA ने रखीं 7 अहम मांगें, यूपी के 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था लक्ष्य में बताया MSME का अहम योगदान, MSME ही बनेगा 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी का इंजन IEA का दावा

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।।
उत्तर प्रदेश को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विज़न को गति देने के लिए, MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) क्षेत्र को केंद्र में रखकर नीति परिवर्तन की मांगें तेज़ हो गई हैं। इंडस्ट्रियल एंटरप्रेन्योर्स एसोसिएशन (IEA) ने एक अहम प्रेस वार्ता कर सरकार के सामने 7 सूत्रीय मांग पत्र रखा और इसे प्रदेश की औद्योगिक रीढ़ को मज़बूत करने की दिशा में निर्णायक क़दम बताया।


MSME को चाहिए समाधान, नहीं तो विकास कैसे होगा?

प्रेस वार्ता में IEA अध्यक्ष संजीव शर्मा ने कहा:

“MSME को आज सिर्फ विभागों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं – योजनाएं हैं लेकिन ज़मीन पर उनका असर नहीं है। अगर उद्योगी केवल फाइलों के पीछे दौड़ते रहेंगे, तो व्यापार कब बढ़ेगा?”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में सबसे बड़ी ज़रूरत पारदर्शिता, संचालन में सुगमता और उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने की है।


IEA की 7 प्रमुख मांगें जो बदल सकती हैं MSME का भविष्य:


1️⃣ ई-बिडिंग की प्रक्रिया समाप्त की जाए

IEA ने कहा कि वर्तमान ई-नीलामी प्रणाली छोटे उद्योगपतियों के लिए अव्यवहारिक है। इससे वे ज़मीन नहीं ले पा रहे हैं, और स्थानीय MSME सेक्टर को बड़ा नुकसान हो रहा है।
👉 पूर्ववर्ती आवेदन आधारित प्रक्रिया को बहाल करने की मांग की गई।


2️⃣ औद्योगिक भूखंडों को फ्रीहोल्ड किया जाए

अब तक दिए गए प्लॉट्स लीज़होल्ड हैं, जिससे हर छोटी प्रक्रिया के लिए विभागों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
👉 IEA का सुझाव: यदि प्लॉट फ्रीहोल्ड हो जाएं, तो निवेशक आत्मनिर्भर बन सकेंगे और लंबी अवधि के प्लानिंग कर सकेंगे।


3️⃣ 5 साल से किराए पर चल रहे उद्योगों को भूखंड में प्राथमिकता

ऐसे MSMEs जो वर्षों से किराए पर चल रहे हैं, वे सरकार को टैक्स भी दे रहे हैं और स्थानीय लोगों को रोज़गार भी।
👉 उन्हें स्थायी जमीन आवंटन में प्राथमिकता मिले – यह मांग MSME के स्थायित्व के लिए बेहद अहम मानी गई।


4️⃣ उद्योगों को बस-रेल से जोड़ा जाए

परिवहन सुविधा की कमी से मज़दूरों का समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।
👉 औद्योगिक क्षेत्रों को नजदीकी रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से जोड़ने की मांग रखी गई, जिससे ऑटो चालकों की मनमानी पर भी रोक लगे।


5️⃣ वन टाइम रजिस्ट्रेशन स्कीम लागू की जाए

MSME सेक्टर के कई छोटे व्यवसाय आज भी पंजीकरण नहीं करा पाए हैं।
👉 IEA ने बिना पेनल्टी के एक बार का मौका देने की अपील की, जिससे सभी उद्योग मुख्यधारा में आ सकें।


6️⃣ सिंगल विंडो सिस्टम को बनाया जाए प्रभावी

फिलहाल सिंगल विंडो पोर्टल में भी बार-बार दस्तावेज़ अपलोड करने की परेशानी है।
👉 IEA ने सुझाव दिया कि पोर्टल एक बार डाक्यूमेंट्स लेकर सभी विभागों को फॉरवर्ड करे। साथ ही, सर्टिफिकेशन प्रक्रिया को “डीम्ड अप्रूवल” बनाया जाए।


7️⃣ मज़दूरों के लिए पर्याप्त संख्या में आवास उपलब्ध हों

औद्योगिक नगरी होने के बावजूद, मज़दूर वर्ग के लिए सस्ते और सुरक्षित आवास नहीं हैं, जिससे वे बार-बार छुट्टी लेकर अपने गांव जाते हैं।
👉 IEA ने जिले में श्रमिकों की संख्या के अनुपात में आवास योजना शुरू करने की ज़ोरदार मांग की।


🏭 MSME ही बनेगा 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी का इंजन: IEA का दावा

IEA ने कहा कि UP के आर्थिक भविष्य में सबसे बड़ा योगदान MSME सेक्टर का होगा। यह क्षेत्र निवेश, नवाचार, रोज़गार और निर्यात – हर स्तर पर राज्य को आगे ले जा सकता है।
लेकिन बिना नीतिगत सुधार के यह सम्भव नहीं।


🧑‍💼 सरकार से अपील: “मांगों पर गंभीरता से हो विचार”

IEA के प्रतिनिधियों ने इस अवसर पर सरकार और नीति-निर्माताओं से अपील की कि—

“यदि यूपी को वैश्विक निवेश का केंद्र बनाना है तो MSME को रेग्युलेट करने की बजाय सशक्त करने की जरूरत है। हमारी सात मांगें उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।”


📊 IEA की प्रेस वार्ता के बाद क्या बन सकते हैं अगले कदम?

संभावित कदमप्रभाव
मुख्यमंत्री तक ज्ञापन भेजनानीति स्तर पर विचार
उद्योग मंत्रालय से संवादमांगों पर विभागीय समीक्षा
क्षेत्रीय MSME मीटिंग बुलानाव्यापक समर्थन और संवाद
IEA का धरना/आन्दोलनयदि मांगें अनसुनी रहीं

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📢 रफ़्तार टुडे आपसे अपील करता है:
यदि आप भी MSME सेक्टर से जुड़े हैं और इन मांगों से सहमत हैं, तो अपनी बात सोशल मीडिया या स्थानीय प्रशासन तक पहुँचाएं। MSME की आवाज़ जितनी बुलंद होगी, परिवर्तन उतना ही जल्दी आएगा।


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