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DPS Knowledge 5 School News : “भविष्य की शिक्षा का खाका तैयार हुआ DPS नॉलेज पार्क–V में”, STEM जिला–स्तरीय विचार–विमर्श में 40 शिक्षकों ने साझा किए नवाचार, सहयोग और रचनात्मकता के अनुभव, नवाचार और सतत विकास पर जोर

ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टुडे।
आज के दौर में जब पूरी दुनिया Artificial Intelligence, Robotics, Sustainability और Innovation की ओर तेज़ी से बढ़ रही है, तो शिक्षा जगत भी अब परंपरागत तरीकों से बाहर निकलकर नई दिशा की तलाश में है। इसी सोच को वास्तविकता में बदलने का शानदार प्रयास किया दिल्ली पब्लिक स्कूल, नॉलेज पार्क–V ने, जब यहाँ STEM (Science, Technology, Engineering, Mathematics) जिला–स्तरीय विचार–विमर्श का आयोजन किया गया।

यह आयोजन महज़ एक शिक्षक कार्यशाला नहीं था, बल्कि भविष्य की शिक्षा का रोडमैप तय करने वाला ऐसा मंथन था जिसने साबित कर दिया कि शिक्षा केवल किताबों और क्लासरूम तक सीमित नहीं, बल्कि नवाचार, अनुभव और सहयोग का नाम है।

STEM का महत्व – क्यों है ज़रूरी?

आज के छात्र सिर्फ़ परीक्षाएँ पास करने के लिए नहीं पढ़ते, बल्कि वे एक ऐसे भविष्य के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं जहाँ सृजनात्मकता, टेक्नोलॉजी की समझ, वैज्ञानिक सोच और समस्या समाधान ही असली योग्यता होगी।

STEM शिक्षा इसी विचारधारा पर आधारित है। इसका उद्देश्य है छात्रों में क्रिटिकल थिंकिंग को बढ़ावा देना। उन्हें प्रयोगात्मक शिक्षा से जोड़ना।

सतत विकास (Sustainable Development) के लिए जिम्मेदार नागरिक तैयार करना।

और सबसे महत्वपूर्ण, 21वीं सदी की चुनौतियों से निपटने के लिए Future-Ready Skills देना।

जिले भर के 40 शिक्षक बने सहभागी

इस जिला–स्तरीय आयोजन में CBSE से संबद्ध 17 विद्यालयों के लगभग 40 शिक्षकों ने भाग लिया।
प्रत्येक शिक्षक ने अपने Best Case Papers यानी बेहतरीन शिक्षण अनुभवों और नवाचारों पर आधारित शोध–पत्र प्रस्तुत किए।

खास बात यह रही कि प्रस्तुति के बाद केवल तालियों तक ही बात सीमित नहीं रही, बल्कि हर बार गहन प्रश्न–उत्तर और चर्चा का सिलसिला चला। इससे यह आयोजन सह–अधिगम और सामूहिक ज्ञान निर्माण का जीवंत मंच बन गया।

चार बड़े विषयों पर रहा फोकस

विचार–विमर्श को व्यवस्थित बनाने के लिए इसे चार उप–विषयों में बाँटा गया –

सहयोगी STEM वातावरण – जहाँ शिक्षक–छात्र मिलकर सीखने का माहौल बनाते हैं। प्रेरित शिक्षकों के माध्यम से अनुभवात्मक अधिगम – यानी शिक्षक स्वयं रोल–मॉडल बनकर सीखने की प्रक्रिया को रोमांचक बनाते हैं।

STEM शिक्षा एवं सतत विकास की प्रक्रियाएँ – शिक्षा के साथ–साथ पर्यावरण और सामाजिक जिम्मेदारी पर ध्यान।

उन्नत STEM दक्षताएँ और 21वीं सदी के कौशल – ताकि विद्यार्थी भविष्य की वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पीछे न रहें।

मूल्यांकन समिति और श्रेष्ठ पत्रों का चयन

प्रत्येक पेपर की समीक्षा एक विशेष समिति ने की जिसमें वरिष्ठ प्रधानाचार्य और बाहरी STEM शिक्षक शामिल थे।
सभी प्रस्तुतियों में से दो सर्वश्रेष्ठ पत्रों का चयन किया गया जिन्हें आगे CBSE के Centre of Excellence को भेजा जाएगा। यह शिक्षकों के लिए न केवल सम्मान की बात है बल्कि उनके काम को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने का अवसर भी है।

विशिष्ट अतिथियों ने बढ़ाया कार्यक्रम का स्तर

कार्यक्रम की शोभा तब और बढ़ गई जब इसमें शिक्षा और नवाचार जगत की दिग्गज हस्तियाँ शामिल हुईं।

सुश्री आकांक्षा अरोड़ा – पूर्व शिक्षिका, Innovation Lead (Microsoft) और निदेशक – Educator Network (Urban School)

डॉ. रुचि गर्ग – प्रोफेसर, सूचना प्रौद्योगिकी, BIMTECH, ग्रेटर नोएडा

सुश्री रेनू शर्मा – प्राचार्या, इंदिरापुरम पब्लिक स्कूल एवं सहायक निदेशक – इंदिरापुरम ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशन्स

इन विशेषज्ञों ने शिक्षकों को यह समझाया कि STEM महज़ शिक्षा का हिस्सा नहीं बल्कि एक आंदोलन है, जो विद्यार्थियों को Responsible Innovators बनाने की दिशा में काम करता है।

नवाचार और सतत विकास पर जोर

चर्चा के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि STEM केवल टेक्नोलॉजी सीखने तक सीमित नहीं, बल्कि इसे पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा–बचत और सतत विकास के साथ जोड़ना होगा।
कई शिक्षकों ने उदाहरण दिए कि कैसे छोटे–छोटे प्रोजेक्ट्स बच्चों को न सिर्फ़ इनोवेटिव बल्कि जिम्मेदार नागरिक भी बना सकते हैं।

प्रधानाचार्या श्रीमती मंजू वर्मा का संदेश

इस अवसर पर विद्यालय की प्रधानाचार्या श्रीमती मंजू वर्मा ने कहा –
“हमें गर्व है कि हमारे विद्यालय ने STEM जिला–स्तरीय विचार–विमर्श की मेज़बानी की। यह मंच शिक्षकों को नई–नई शिक्षण पद्धतियों का आदान–प्रदान करने और शिक्षा में सहयोग, नवाचार तथा रचनात्मकता को बढ़ावा देने का बेहतरीन अवसर है। मेरा विश्वास है कि ऐसे प्रयास विद्यार्थियों को भविष्य–उन्मुख, सशक्त और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सम्पन्न बनाएंगे।”

शिक्षा का नया युग

यह आयोजन केवल एक दिन की कार्यशाला नहीं बल्कि शिक्षा जगत के लिए नई सोच और दिशा का प्रतीक रहा।
DPS नॉलेज पार्क–V ने यह साबित कर दिया कि सही मंच मिलने पर शिक्षक नवाचार और प्रेरणा के वाहक बन सकते हैं।

अब सवाल यह है कि कब ऐसे विचार–विमर्श देश के हर जिले और हर विद्यालय तक पहुँचेंगे, क्योंकि भविष्य की शिक्षा का खाका STEM से ही तैयार होगा।

रफ़्तार टुडे की न्यूज़
Raftar Today
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