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Sharda Health Care News : “घर की दाल-रोटी से लेकर संतुलित प्लेट तक”, शारदा केयर, हेल्थ सिटी और शारदा अस्पताल में मनाया जा रहा नेशनल न्यूट्रिशन वीक, डॉक्टरों की सलाह, “जंक फूड से बचें, घर के खाने को अपनाएं”

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
ज्ञान नगरी, ग्रेटर नोएडा स्थित शारदा केयर, हेल्थ सिटी और शारदा अस्पताल इन दिनों राष्ट्रीय पोषण सप्ताह (National Nutrition Week) मना रहा है। हर साल 1 से 7 सितंबर के बीच पूरे देश में यह सप्ताह मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को संतुलित आहार (Balanced Diet), सही खानपान की आदतें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना है।

इस बार का थीम है – “बेहतर जीवन के लिए सही खाएं” (Eat Right for Better Life)। शारदा अस्पताल इस अवसर पर मरीजों, छात्रों और आम जनता के लिए अलग-अलग प्रतियोगिताओं, नुक्कड़ नाटकों और जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन कर रहा है।

राष्ट्रीय पोषण सप्ताह केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि एक आंदोलन है, जिसका लक्ष्य है – हर नागरिक तक पोषण का संदेश पहुँचाना।
शारदा अस्पताल और हेल्थ सिटी का यह प्रयास सराहनीय है, जो आने वाली पीढ़ी को एक स्वस्थ भविष्य देने की दिशा में मजबूत कदम है।

प्रतियोगिताओं से जागरूकता: पोस्टर, नुक्कड़ नाटक और जुबान का फैसला

कार्यक्रम में सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र रही पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता, जिसमें बच्चों और युवाओं ने पोषण के महत्व पर अपनी रचनात्मकता दिखाई। वहीं, नुक्कड़ नाटक के माध्यम से छात्रों ने जंक फूड के नुकसान और संतुलित भोजन के फायदे को सरल भाषा और नाटकीय अंदाज़ में दर्शाया।

“जुबान का फैसला” प्रतियोगिता भी आयोजित की गई, जहां प्रतिभागियों को जंक फूड और हेल्दी फूड के बीच चुनाव करना था। इस खेल-खेल में दी गई सीख ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि स्वाद के चक्कर में वे कहीं सेहत तो नहीं खो रहे।

डॉक्टरों की सलाह: “जंक फूड से बचें, घर के खाने को अपनाएं”

इस मौके पर मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. राममूर्ति शर्मा ने स्पष्ट कहा –
“आजकल बच्चे या तो कुपोषण के शिकार हो रहे हैं या फिर मोटापे से जूझ रहे हैं। दोनों का कारण एक ही है – जंक फूड और बाहर का खाना। हमारे घर का पारंपरिक खाना – दाल, चावल, सब्जी, रोटी – ही असली पोषण का खज़ाना है। अगर मौसमी फल और सलाद को भी रोज़ाना आहार का हिस्सा बनाया जाए तो हमें किसी अतिरिक्त सप्लीमेंट की ज़रूरत नहीं पड़ेगी।”

उन्होंने आगे कहा कि “स्वाद के बजाय स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए।” उनके अनुसार, बच्चों को बचपन से ही संतुलित आहार की आदत डालना बेहद जरूरी है।

बच्चों से लेकर बुज़ुर्ग तक सबके लिए पोषण ज़रूरी

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राजीव कुमार थापर ने संतुलित आहार के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा –
“एक स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मस्तिष्क के लिए सही पोषण आवश्यक है। यह केवल बच्चों के लिए ही नहीं बल्कि हर उम्र के लोगों के लिए उतना ही जरूरी है – चाहे वह शिशु अवस्था हो, किशोरावस्था, गर्भावस्था या वृद्धावस्था। सही आहार लेने से न केवल डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और मोटापा जैसी बीमारियों से बचाव होता है, बल्कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का भी खतरा कम हो सकता है।”

डॉ. थापर ने कहा कि राष्ट्रीय पोषण सप्ताह का मुख्य उद्देश्य लोगों को यही समझाना है कि भोजन सिर्फ पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि शरीर और मन को स्वस्थ रखने की चाबी है।

महिला डॉक्टरों की भागीदारी और जागरूकता

इस आयोजन में डॉ. श्वेता जायसवाल, डॉ. वर्षा शर्मा और डॉ. शिवानी राठी समेत कई अन्य विशेषज्ञों ने भी लोगों को पोषण संबंधी जानकारी दी। उन्होंने महिलाओं और किशोरियों में खून की कमी (Anemia), बच्चों में कुपोषण और युवाओं में मोटापे जैसी समस्याओं पर विशेष ध्यान दिलाया। इन डॉक्टरों ने यह भी बताया कि महिलाएं अगर संतुलित आहार लेंगी तो परिवार और आने वाली पीढ़ी भी स्वस्थ होगी।

संतुलित थाली कैसी हो?

डॉक्टरों ने पोषण का सरल मंत्र भी दिया –

प्लेट का आधा हिस्सा सब्जियों और फलों से भरें।

1/4 हिस्सा प्रोटीन जैसे दाल, अंडा, मछली या पनीर से।

1/4 हिस्सा अनाज जैसे चावल या रोटी से।

साथ में एक गिलास दूध या दही ज़रूर शामिल करें।

इस तरह की “संतुलित थाली” ही असली पोषण की पहचान है।

जागरूकता का बड़ा संदेश

शारदा अस्पताल ने यह साबित किया कि केवल इलाज ही नहीं बल्कि बीमारियों की रोकथाम भी अस्पतालों की जिम्मेदारी है। इस तरह के आयोजनों से न केवल छात्रों और मरीजों को बल्कि आम नागरिकों को भी सही खानपान और जीवनशैली की अहमियत समझ में आती है।

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Raftar Today
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