Greater Noida News : ग्रेटर नोएडा से शुरू हुई कृषि और जीनोमिक्स की नई इबारत, भारत का पहला निजी इंटीग्रेटेड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर कैटल एंड प्लांट जीनोमिक्स बना किसानों और विज्ञान का संगम, लीड्स एग्री जेनेटिक्स और लीड्स कनेक्ट की भूमिका, भारत की एग्री-बायोटेक यात्रा में ऐतिहासिक पड़ाव

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और शैक्षणिक हब ग्रेटर नोएडा ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली है। यहां स्थापित हुआ है भारत का पहला निजी इंटीग्रेटेड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर कैटल एंड प्लांट जीनोमिक्स, जिसे लीड्स एग्री जेनेटिक्स ने लॉन्च किया है। यह न केवल देश में कृषि और पशुपालन अनुसंधान की दिशा बदलने वाला कदम है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की एग्रीकल्चरल बायोटेक्नोलॉजी और लाइवस्टॉक जीनोमिक्स कैपेबिलिटीज को नई उड़ान देने वाला है।
भव्य शुभारंभ और विज़नरी नेतृत्व
नए सेंटर का उद्घाटन बीएल एग्रो ग्रुप के चेयरमैन श्री घनश्याम खंडेलवाल ने किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जीनोमिक्स के ज़रिए कृषि उत्पादकता में बढ़ोतरी होगी और समाज का समग्र कल्याण संभव होगा।
लीड्स कनेक्ट सर्विसेज के ग्रुप चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर नवनीत रविकर ने इसे भारतीय कृषि के लिए ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा –
“आज किसान जलवायु परिवर्तन, सीमित संसाधनों और बढ़ती मांग जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इस सेंटर के माध्यम से हम भारत को एग्री-बायोटेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।”
कृषि और जीनोमिक्स का संगम – किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण
इस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओई) में एक फुल-स्टैक जीनोमिक्स सर्विस सेंटर स्थापित किया गया है, जो खासतौर पर एग्री-जीनोमिक्स और एग्रीकल्चरल बायोटेक्नोलॉजी के लिए डिज़ाइन किया गया है। यहां विश्वस्तरीय तकनीक की मदद से फसलों की पैदावार बढ़ाने, मवेशियों की नस्ल सुधारने और खाद्य सुरक्षा को मज़बूत करने पर काम होगा।
लीड्स एग्री जेनेटिक्स पहले भी अपनी इनोवेशन क्षमता का परिचय दे चुकी है। यह कंपनी ब्राज़ील से गिर नस्ल के भ्रूण का आयात करने वाली पहली भारतीय निजी कंपनी रही है। इसका मकसद किसानों को उन्नत नस्लों और बेहतर प्रोडक्टिविटी के साथ सशक्त बनाना है।
क्यों खास है यह सेंटर ऑफ एक्सीलेंस?
ग्रेटर नोएडा के इकोटेक-2 क्षेत्र में स्थापित यह सेंटर पूरी तरह फुल-स्टैक जीनोमिक्स सर्विस सेंटर से लैस है। यह खासतौर पर एग्री-जीनोमिक्स और एग्रीकल्चरल बायोटेक्नोलॉजी के लिए डिज़ाइन किया गया है। यहां ऐसे रिसर्च होंगे जो –
फसलों की पैदावार बढ़ाने,
मवेशियों की नस्ल सुधारने,
खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और
जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का समाधान निकालने
में सीधे योगदान देंगे।

भव्य उद्घाटन और नेतृत्व की सोच
इस अत्याधुनिक लैब का शुभारंभ बीएल एग्रो समूह के चेयरमैन श्री घनश्याम खंडेलवाल ने किया। उन्होंने कहा कि जीनोमिक्स किसानों की आय और देश की कृषि उत्पादकता दोनों को नई दिशा देगा।
उद्घाटन के मौके पर लीड्स कनेक्ट सर्विसेज के चेयरमैन एवं एमडी नवनीत रविकर ने कहा:
“भारतीय कृषि इस समय एक अहम मोड़ पर है। किसानों पर ज्यादा उत्पादन और टिकाऊ खेती का दबाव है। हमारा यह सेंटर आत्मनिर्भरता की ओर एक ऐतिहासिक कदम है, जो शोधकर्ताओं और किसानों को तेजी से इनोवेशन करने में मदद करेगा।”
विज्ञान और नवाचार का संगम : डॉ. आशीष दुबे का नेतृत्व
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का संचालन डॉ. आशीष दुबे करेंगे, जो इस क्षेत्र में दो दशकों से अधिक का अनुभव रखते हैं और रेडक्लिफ लैब्स के सह-संस्थापक भी रहे हैं। वे अब कैटल और फसलों में जेनेटिक डायवर्सिटी रिसर्च और जीनोमिक सिलेक्शन को मज़बूत करेंगे।
डॉ. दुबे ने कहा –
“जीनोमिक्स ने दुनिया भर में विज्ञान का चेहरा बदल दिया है। हमारा लक्ष्य एंड-टू-एंड जीनोमिक्स समाधान देना है ताकि कृषि उत्पादन, सस्टेनेबिलिटी और फूड सिक्योरिटी पर सीधा प्रभाव डाला जा सके।”
अनुभवी वैज्ञानिकों की टीम
इस सेंटर का संचालन करेंगे डॉ. आशीष दुबे, जिन्हें जीनोमिक्स और डायग्नोस्टिक्स रिसर्च में दो दशक का अनुभव है। वे पहले रेडक्लिफ लैब्स के सह-संस्थापक रह चुके हैं। अब वे फसलों और मवेशियों की जेनेटिक डायवर्सिटी रिसर्च और जीनोमिक सिलेक्शन को आगे बढ़ाने पर काम करेंगे।
डॉ. दुबे ने कहा “जीनोमिक्स ने पिछले दशक में विज्ञान का चेहरा बदल दिया है। अब समय है कि भारत इसके जरिए कृषि और पशुपालन को नई ऊंचाइयों पर ले जाए। हमारी लैब एंड-टू-एंड समाधान देगी जो सीधे किसानों को लाभ पहुंचाएगी।”
हाई-टेक उपकरण और विश्वस्तरीय रिसर्च
लैब को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि यहां विश्वस्तरीय टेक्नोलॉजी और उपकरण रिसर्च को नई गति दें। इनमें शामिल हैं:
Illumina iScan – हाई-थ्रूपुट SNP जीनोटाइपिंग के लिए
NovaSeq – डीप रीसीक्वेंसिंग के लिए
PacBio और Oxford Nanopore – लोंग-रीड असेंबली और स्ट्रक्चरल वैरिएशन एनालिसिस के लिए
10X Chromium – लिंक्ड-रीड और सिंगल-सेल एसेज के लिए
इन तकनीकों से सिंगल न्यूक्लियोटाइड चेंज से लेकर जटिल जेनेटिक रीअरेंजमेंट तक की खोज संभव होगी।
दुनिया से मिली प्रेरणा, अब भारत की बारी
जीनोमिक्स ने दुनिया भर में कृषि को नई दिशा दी है। बीटी कॉटन जैसी फसलें और जेनेटिकली मॉडिफाइड क्रॉप्स इसका बड़ा उदाहरण हैं। अब भारत में भी यह तकनीक किसानों तक पहुंचेगी, जिससे उनकी आय और उत्पादन क्षमता दोनों में बढ़ोतरी होगी।
किसानों के लिए सीधा लाभ
इस सेंटर से भारतीय किसानों को –
बेहतर नस्ल के मवेशी,
जलवायु के अनुकूल फसलें,
उच्च उपज,
और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन
मिल सकेगा। इससे न केवल कृषि टिकाऊ बनेगी बल्कि खाद्य सुरक्षा भी मज़बूत होगी।
वैश्विक सफलता की कहानियों से प्रेरणा
जीनोमिक्स ने बीते दो दशकों में दुनिया भर में कृषि और मानव स्वास्थ्य को बदलकर रख दिया है। चाहे बीटी कॉटन की सफलता हो या नए जीएम क्रॉप्स का विकास, इनोवेशन ने किसानों और समाज दोनों को सशक्त किया है। अब भारत में यह तकनीक सीधे किसानों तक पहुंच सकेगी।
लीड्स एग्री जेनेटिक्स : कृषि का भविष्य गढ़ने की ओर
लीड्स एग्री-जेनेटिक्स, बीएल एग्रो समूह की यूनिट है जो कटिंग-एज जेनेटिक रिसर्च का इस्तेमाल करके कृषि में क्रांति लाने का काम कर रही है। डीएनए सीक्वेंसिंग, प्रेसाइज ब्रीडिंग और डेटा-ड्रिवन इनोवेशन से यह कंपनी भारत के किसानों को जलवायु परिवर्तन से जूझने, बेहतर उपज लेने और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन करने में मदद करेगी।
भारत की एग्री-बायोटेक यात्रा में ऐतिहासिक पड़ाव
ग्रेटर नोएडा में स्थापित यह सेंटर सिर्फ एक लैब नहीं बल्कि भारत की कृषि और जीनोमिक्स क्रांति का केंद्र है। आने वाले समय में यहां से निकलने वाले शोध और इनोवेशन न सिर्फ किसानों की ज़िंदगी बदलेंगे बल्कि भारत को वैश्विक एग्रीकल्चरल पावरहाउस बनाने की दिशा में भी निर्णायक भूमिका निभाएंगे।
लीड्स एग्री जेनेटिक्स और लीड्स कनेक्ट की भूमिका
लीड्स एग्री-जेनेटिक्स, बीएल एग्रो समूह की यूनिट है, जो कटिंग-एज जेनेटिक रिसर्च से कृषि और पशुपालन में क्रांति लाने के लिए काम कर रही है। वहीं लीड्स कनेक्ट सर्विसेज पहले से ही किसानों के लिए एग्री-टेक और डेटा ड्रिवन रिस्क मैनेजमेंट समाधान उपलब्ध करा रही है।
इस कंपनी ने –
फसल निगरानी,
नुकसान आकलन,
बुवाई और कटाई का समय निर्धारण,
और यील्ड मॉडलिंग
जैसी सेवाएं देकर किसानों को मजबूत बनाया है। खासकर इसका एग्री-क्रेडिट स्कोर किसानों को बैंकिंग और फाइनेंशियल सेक्टर से जोड़ने का बड़ा जरिया बना है।



