Braking Jewar News : “जेवर के खेरली भाव गांव में पागल कुत्ते का आतंक! घरों में कैद हुए लोग, पांच को बनाया शिकार, एक की हालत गंभीर, प्रशासन से मांगी मदद”, गांव में छाया डर, गलियां सूनी और बच्चे घरों में कैद, सफदरजंग अस्पताल तक पहुंचा मामला

दनकौर, रफ़्तार टुडे। जेवर तहसील क्षेत्र के खेरली भाव गांव में एक पागल कुत्ते ने पिछले तीन दिनों से ऐसा आतंक मचा रखा है कि पूरा गांव दहशत में है। शुक्रवार को कुत्ते ने लगातार चार लोगों पर हमला कर घायल कर दिया, जबकि बुधवार को भी यह एक ग्रामीण को बुरी तरह से काट चुका था। अब तक कुल पांच लोग घायल हो चुके हैं, जिनमें से एक व्यक्ति की हालत अत्यंत गंभीर बताई जा रही है। ग्रामीणों ने यमुना प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर इस पागल कुत्ते को पकड़ने की मांग की है।
गांव में छाया डर, गलियां सूनी और बच्चे घरों में कैद
खेरली भाव गांव में शुक्रवार की सुबह भयावह माहौल था। आमतौर पर चहल-पहल वाली गलियां अब सूनी हैं।
लोग खेतों, दुकानों और बाजारों तक जाने से डर रहे हैं। बच्चों को स्कूल भेजना भी रोक दिया गया है, जबकि महिलाएं घरों के दरवाजे बंद कर रही हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, यह कुत्ता पिछले तीन दिनों से गांव में घूम रहा है और किसी भी व्यक्ति को देखकर अचानक हमला कर देता है। कई लोगों ने बताया कि वह पागलपन की हालत में दौड़ता हुआ आता है और बिना उकसावे के काट लेता है।
पांच लोग बने शिकार — सफदरजंग अस्पताल तक पहुंचा मामला
इस पागल कुत्ते का पहला शिकार बने सरफुद्दीन (45 वर्ष), जो बुधवार सुबह अपने खेत की ओर जा रहे थे।
रास्ते में अचानक कुत्ते ने उन पर झपट्टा मारकर कई जगह काट लिया।
परिजन उन्हें इलाज के लिए ग्रेटर नोएडा के एक निजी अस्पताल ले गए, जहाँ से हालत गंभीर होने पर दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया।
डॉक्टरों के अनुसार, सरफुद्दीन को गहरे घाव हैं और उनका इलाज जारी है।
शुक्रवार को यह कुत्ता दोबारा सक्रिय हुआ और चार अन्य लोगों को घायल कर दिया —
1)सतेंद्र यादव, जो सब्जी लेने निकले थे।
2)नंद किशोर, जिनकी टांग और हाथ पर तीन जगह काटा गया।
3)नायरा (5 वर्ष),
4)रहनुमा (6 वर्ष) — दोनों बच्चियां स्कूल से घर लौट रही थीं, तभी कुत्ते ने हमला कर दिया।
सभी को इलाज के लिए दनकौर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ से उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।
150 से अधिक लोग रोज लगवा रहे रेबीज इंजेक्शन, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
इस घटना के बाद पूरे इलाके में रेबीज (Rabies) को लेकर डर फैल गया है।
डाढ़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. नारायण किशोर ने बताया कि “पिछले कुछ दिनों में दनकौर और आसपास के क्षेत्रों से रोजाना 150 से अधिक लोग रेबीज का टीका लगवाने आ रहे हैं। कई लोग हल्के खरोंच को लेकर भी इंजेक्शन लगवा रहे हैं।”
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सतर्क किया है कि यदि किसी को भी कुत्ते या किसी पशु ने खरोंच या काट लिया हो तो तुरंत साबुन और पानी से घाव धोकर एंटी रेबीज इंजेक्शन (ARV) लगवाएं।
ग्रामीणों ने जताई नाराजगी — ‘प्राधिकरण सोया हुआ है’
गांव के कई लोगों ने यमुना प्राधिकरण पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
गांव के प्रधान ने कहा “हमने कई बार प्राधिकरण को पत्र लिखा कि गांव में आवारा कुत्ते बढ़ते जा रहे हैं, पर कोई सुनवाई नहीं हुई। अब जब कुत्ता पागल होकर लोगों को काट रहा है, तब भी कोई टीम पकड़ने नहीं आई।”
ग्रामीणों का कहना है कि गांव और उसके आसपास आवारा कुत्तों की संख्या 40-50 तक पहुंच चुकी है, जो लोगों के लिए रोजाना खतरा बन रहे हैं।
लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि प्राधिकरण ने तत्काल कार्रवाई नहीं की, तो वे सामूहिक प्रदर्शन करेंगे।
माओं की चिंता बढ़ी — बच्चे स्कूल जाने से डर रहे
कुत्ते के आतंक के चलते स्कूल जाने वाले बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
गांव की महिला सुनीता देवी ने बताया “हम बच्चों को बाहर नहीं निकलने दे रहे। वो डर से रोते हैं। स्कूल की वैन भी अब गांव के अंदर नहीं आ रही।”
दूसरी ओर, कई परिवारों ने अब अपने बच्चों को रिश्तेदारों के यहां भेजने का फैसला किया है, जब तक प्रशासन इस कुत्ते को पकड़ नहीं लेता।
ग्रामीणों ने खुद बनाई ‘सुरक्षा टीम’ — लाठी-डंडों से पहरा
गांव में अब रात के समय लाठी-डंडे लेकर लोग पहरा देने लगे हैं। कुछ युवाओं ने मिलकर टीम बनाई है जो कुत्ते को देखते ही लोगों को सतर्क कर दे।
हालांकि, ग्रामीणों ने कहा कि यह स्थायी समाधान नहीं है, जब तक प्रशासन की पशु-पकड़ने वाली टीम नहीं आती।
प्रशासन हरकत में — टीम भेजने की तैयारी शुरू
सूत्रों के मुताबिक, दनकौर पुलिस और यमुना प्राधिकरण को इस घटना की जानकारी दे दी गई है। प्राधिकरण के अधिकारी ने बताया कि “एनिमल कंट्रोल टीम को निर्देश दे दिए गए हैं कि वे गांव जाकर कुत्तों को पकड़ें और स्थिति पर नियंत्रण करें।”
उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचाव के लिए नियमित स्ट्रे डॉग सर्वे और वैक्सीनेशन अभियान चलाया जाएगा।
डॉक्टरों की सलाह — रेबीज को हल्के में न लें
डॉ. नारायण किशोर ने लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि रेबीज एक जानलेवा बीमारी है, जो एक बार शरीर में सक्रिय हो जाए तो उपचार कठिन होता है।
उन्होंने कहा “यदि किसी को कुत्ता काटे तो देरी न करें, तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। पुराने घरेलू उपाय या झाड़-फूंक के भरोसे न रहें।”
गांव में भय का साया — राहत की उम्मीद प्रशासन से
खेरली भाव गांव के लोग अब प्रशासनिक मदद का इंतजार कर रहे हैं।
हर कोई यही चाहता है कि जल्द से जल्द यह कुत्ता पकड़ा जाए और गांव में सामान्य स्थिति लौटे। बच्चों की हंसी, बुजुर्गों की चौपाल और खेतों की रौनक — सब अब इसी उम्मीद पर टिकी है कि यह डरावना दौर जल्द खत्म हो।



