Breaking Kisan News : 22 दिसंबर को ग्रेटर नोएडा में गूंजेगी किसानों की हुंकार!, राकेश टिकैत की अगुवाई में जीरो पॉइंट पर विशाल महापंचायत, 10 से अधिक जिलों के हजारों किसान होंगे शामिल, जेवर से आगरा तक सर्विस रोड निर्माण की मांग, लोकल किसानों को मिले फ्री एंट्री

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। एक बार फिर किसानों की आवाज़ दिल्ली-एनसीआर की सरहदों से उठने वाली है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने अपने पुराने तेवरों के साथ किसान अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा देने का बिगुल बजा दिया है। राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने रविवार को ग्रेटर नोएडा स्थित कैंप कार्यालय में प्रेसवार्ता कर घोषणा की कि 22 दिसंबर को परीचौक (जीरो पॉइंट) पर एक विशाल किसान महापंचायत आयोजित की जाएगी।
यह पंचायत केवल एक सभा नहीं बल्कि एक रणनीतिक आंदोलन की शुरुआत होगी, जिसमें 10 से अधिक जिलों – नोएडा, बुलंदशहर, अलीगढ़, आगरा, मथुरा, हाथरस, इटावा, फिरोजाबाद, हापुड़ और गाजियाबाद के किसान बड़ी संख्या में शामिल होंगे। पंचायत का मकसद है — किसानों की अधिग्रहित जमीन, अधूरे मुआवज़े, और विकास परियोजनाओं में उनके अधिकारों को लेकर सरकार तक एक मजबूत संदेश पहुंचाना।
किसानों को अब भी नहीं मिला उनका हक, बोले टिकैत — “विकास की सड़क किसानों की लाश पर नहीं बननी चाहिए”
चौधरी राकेश टिकैत ने प्रेसवार्ता में कहा कि सरकार ने विकास के नाम पर किसानों की जमीनें तो अधिग्रहित कर लीं, लेकिन मुआवज़े का न्यायपूर्ण वितरण अब तक नहीं हुआ।
उन्होंने कहा “यमुना एक्सप्रेसवे आगरा तक बन चुका है, लेकिन किसानों को उनका 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवज़ा और 10 प्रतिशत किसान कोटे के प्लॉट अब तक नहीं मिले। यह केवल अन्याय नहीं, बल्कि किसानों के साथ धोखा है।”
टिकैत ने आरोप लगाया कि यमुना विकास प्राधिकरण (YIDA) और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण (GNIDA) के बीच किसानों के मुद्दे केवल फाइलों तक सीमित हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत में इन मुद्दों पर एक ठोस प्रस्ताव पारित किया जाएगा, जिसे शासन प्रशासन को सौंपा जाएगा।
जेवर से आगरा तक सर्विस रोड निर्माण की मांग – लोकल किसानों को मिले फ्री एंट्री
महापंचायत में किसान यह भी मांग करेंगे कि जेवर से आगरा तक सर्विस रोड का निर्माण तत्काल कराया जाए, ताकि स्थानीय लोगों की आवाजाही सुगम हो।
राकेश टिकैत ने कहा “एक्सप्रेसवे तो बना दिया, लेकिन ग्रामीणों के लिए कोई सुविधा नहीं। टोल प्लाज़ा पर लोकल लोगों से पैसे वसूलना अन्याय है। गांव के लोग अगर अपनी ज़मीन पर जाना चाहें तो भी टोल देना पड़ता है — यह स्थिति अस्वीकार्य है।”

उन्होंने सुझाव दिया कि लोकल निवासियों को आधार कार्ड दिखाकर टोल से फ्री एंट्री दी जाए। इसके अलावा उन्होंने कहा कि सेक्टरों की तर्ज पर गांवों का विकास, सड़क, बिजली, सीवरेज और पार्क जैसी सुविधाएं दी जानी चाहिए।
रोज़गार और पुनर्वास पर उठेगी आवाज़ – “जिनकी जमीन ली गई, उनके बच्चों को नौकरी दो”
किसान नेता ने कहा कि जब सरकार उद्योगों के लिए किसानों की ज़मीन अधिग्रहित करती है, तो उसे पुनर्वास और रोज़गार की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए।
“गांवों के नौजवान सड़कों पर हैं, क्योंकि जिन उद्योगों के लिए जमीन दी गई, वहां बाहरी लोगों को नौकरी मिल रही है। यह दोहरी नीति है। जिनकी जमीन ली गई, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर रोज़गार मिलना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि पंचायत में युवाओं के रोजगार, शिक्षा और प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी, ताकि आने वाली पीढ़ियां खेती छोड़ने के बाद भी आत्मनिर्भर बन सकें।
महापंचायत में तय होगी आंदोलन की रूपरेखा – किसानों के धैर्य की अब सीमा पार
टिकैत ने कहा कि किसान लंबे समय से धैर्य रखे हुए हैं, लेकिन अब समय आ गया है कि सड़कों पर उतरकर हक मांगा जाए।
“हम शांतिपूर्ण ढंग से अपना अधिकार मांगेंगे, लेकिन अगर सरकार ने अनदेखी की, तो यह आंदोलन व्यापक होगा। यह महापंचायत सिर्फ गौतमबुद्ध नगर की नहीं, पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आवाज़ है।”
उन्होंने कहा कि महापंचायत में आगे की रणनीति तय की जाएगी, जिसमें दिल्ली तक रैली या धरना प्रदर्शन जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।
सोशल मीडिया पर किसानों का आह्वान – “22 दिसंबर को ग्रेटर नोएडा चलो!”
जैसे ही राकेश टिकैत ने महापंचायत की तारीख और स्थान की घोषणा की, वैसे ही सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म्स पर #किसानमहापंचायत #RakeshTikait #GreaterNoida #FarmersUnity जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।
भाकियू कार्यकर्ताओं ने ट्विटर (अब X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर करते हुए किसानों से अपील की है कि “अपने अधिकार की लड़ाई में पीछे मत हटो, 22 दिसंबर को जीरो पॉइंट पर इतिहास रचा जाएगा।”
किसानों का जनसैलाब जुटाने की तैयारी – गांव-गांव में जा रहे कार्यकर्ता
महापंचायत को सफल बनाने के लिए भाकियू की टीम गांव-गांव जाकर बैठकें कर रही है।
किसानों में उत्साह का माहौल है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह पंचायत केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं बल्कि किसानों की नई दिशा तय करने वाली निर्णायक सभा होगी।
इस मौके पर किसान नेता रॉबिन नागर, अशोक भाटी, मनोज मावी, लाला यादव, ललित चौहान, अरब सिंह, सुंदर बालियान, कुमारी मीरा, राजवीर लवानिया समेत सैकड़ों किसान मौजूद रहे।
अंतिम चेतावनी – “अगर हक नहीं मिला, तो खेत से लेकर संसद तक करेंगे संघर्ष”
पंचायत से पहले ही किसानों ने प्रशासन को साफ संदेश दिया है कि अगर मांगे पूरी नहीं हुईं, तो यह आंदोलन सिर्फ ग्रेटर नोएडा तक सीमित नहीं रहेगा।“हम शांति से रहना चाहते हैं, लेकिन चुप नहीं रह सकते। अगर हक नहीं मिला, तो किसान खेत से लेकर संसद तक आवाज उठाएगा।”



