Barahi Mella Surajpur News : “जब सोशल मीडिया मिलेगा संस्कारों से, और परंपरा करेगी ट्रेंड!”, सूरजपुर का ऐतिहासिक बाराही मेला-2026 बनेगा आस्था, मनोरंजन और आधुनिकता का सबसे बड़ा संगम, “दंगल की धरती”—कुश्ती में दिखेगा दमखम और इनामों की बारिश, कविता, संस्कृति और हंसी का संगम

ग्रेटर नोएडा (सूरजपुर), रफ़्तार टूडे। सूरजपुर की ऐतिहासिक पहचान बन चुका बाराही मेला-2026 इस वर्ष एक नए और अनोखे अंदाज़ में लोगों के सामने आने जा रहा है। 1 अप्रैल से 13 अप्रैल 2026 तक आयोजित होने वाला यह मेला इस बार सिर्फ एक पारंपरिक आयोजन नहीं रहेगा, बल्कि यह आधुनिकता और संस्कृति के संगम का जीवंत उदाहरण बनेगा। “सोशल मीडिया और संस्कार” जैसी अनूठी थीम के साथ आयोजित यह मेला युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक हर वर्ग को आकर्षित करने के लिए तैयार है।
इस बार मेले में एक ओर जहां गांव की मिट्टी की खुशबू, चौपाल की संस्कृति और धार्मिक आस्था की झलक देखने को मिलेगी, वहीं दूसरी ओर डिजिटल युग की सोच और आधुनिक मनोरंजन के नए आयाम भी नजर आएंगे। यही कारण है कि इस बार का बाराही मेला चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
ध्वजारोहण से होगी शुरुआत, भजन संध्या में डूबेगा सूरजपुर
मेला समिति के अध्यक्ष चौ० धर्मपाल भाटी के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 को शाम 4:30 बजे ध्वजारोहण के साथ मेले का शुभारंभ किया जाएगा। इसके बाद भव्य भजन संध्या का आयोजन होगा, जिसमें क्षेत्र के श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो जाएंगे। महामंत्री ओमवीर बैंसला ने बताया कि मेला प्रतिदिन शाम 5 बजे से रात 2 बजे तक चलेगा। यानी एक बार मेला शुरू हुआ तो देर रात तक रंग, रोशनी और उत्साह का माहौल बना रहेगा।
“मनोरंजन का मेगा मेला”—हर दिन कुछ नया, हर पल कुछ खास
बाराही मेला-2026 को इस बार “मनोरंजन का महाकुंभ” कहना गलत नहीं होगा। यहां हर दिन कुछ नया और अनोखा देखने को मिलेगा। मीडिया प्रभारी मूलचंद शर्मा ने बताया कि इस बार पहली बार “जलपरी शो” को शामिल किया गया है, जो खासकर बच्चों और युवाओं के लिए बेहद आकर्षक रहेगा।
इसके अलावा मेले में मारूति सर्कस, रंग-बिरंगे झूले, जादूगर शो, काला जादू, मौत का कुआं और भूत बंगला जैसे रोमांचकारी आकर्षण लोगों को रोमांच से भर देंगे।
मीना बाजार में खरीदारी का आनंद और खान-पान की दुकानों पर स्वादिष्ट व्यंजन मेले की रौनक को और बढ़ाएंगे।

“दंगल की धरती”—कुश्ती में दिखेगा दमखम और इनामों की बारिश
इस मेले की खास पहचान उसका विशाल कुश्ती दंगल भी है। कोषाध्यक्ष लक्ष्मण सिंघल ने जानकारी दी कि इस बार ₹101 से लेकर ₹1,51,000 तक के इनामों के साथ भव्य कुश्ती दंगल का आयोजन किया जाएगा।
दिल्ली के मोहन बाबा ट्रस्ट के सहयोग से होने वाला यह दंगल प्रदेश और आसपास के पहलवानों को अपनी ताकत दिखाने का बड़ा मंच देगा। दंगल देखने के लिए हर साल हजारों की भीड़ उमड़ती है और इस बार भी यही उम्मीद की जा रही है।
कविता, संस्कृति और हंसी का संगम
मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी भरमार रहेगी। खासतौर पर विराट कवि सम्मेलन इस बार लोगों के आकर्षण का केंद्र रहेगा, जिसमें प्रसिद्ध कवि संतोष आनंद और मुकेश शर्मा जैसे नाम शामिल होंगे।
2 अप्रैल को “शेखचिल्ली और रुखसाना की महफिल” का आयोजन किया जाएगा, जो हास्य और मनोरंजन से भरपूर होगा। हर दिन रात 8:00 से 8:15 बजे तक क्षेत्रीय परंपराओं का सम्मान किया जाएगा, जिससे नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
आस्था का केंद्र—सरोवर और चौपाल की परंपरा
बाराही मेला सिर्फ मनोरंजन का केंद्र नहीं, बल्कि यह आस्था और परंपरा का भी प्रतीक है। मेले में स्थित प्राचीन सरोवर में स्नान को लेकर मान्यता है कि इससे चर्म रोगों में लाभ मिलता है।
इसके साथ ही पारंपरिक चौपाल में ग्रामीण जीवन की झलक देखने को मिलेगी, जहां बड़ी खाट, हुक्का, बैलगाड़ी और अन्य देसी संस्कृति की वस्तुएं लोगों को पुराने समय की याद दिलाएंगी।
प्रमुख तिथियां और प्रशासनिक सहभागिता
30 मार्च 2026: भूमि पूजन एवं हवन
1 अप्रैल 2026: उद्घाटन एवं भजन संध्या
2 अप्रैल 2026: जिलाधिकारी मेधा रूपम द्वारा शुभारंभ
प्रशासनिक स्तर पर भी इस मेले को लेकर पूरी तैयारी की जा रही है, ताकि सुरक्षा, साफ-सफाई और व्यवस्था में कोई कमी न रहे।
आयोजन समिति की मेहनत लाई रंग
इस पूरे आयोजन के पीछे शिव मंदिर सेवा समिति की मेहनत और समर्पण है। समिति के सभी पदाधिकारी और सदस्य इस मेले को सफल बनाने के लिए दिन-रात जुटे हुए हैं।
सिर्फ मेला नहीं, एक अनुभव है
सूरजपुर का बाराही मेला-2026 सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव है जो परंपरा, आस्था, मनोरंजन और आधुनिकता को एक साथ समेटे हुए है।
यह मेला न केवल स्थानीय लोगों के लिए बल्कि आसपास के जिलों के लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। यहां हर व्यक्ति के लिए कुछ न कुछ खास है—चाहे वह भक्ति हो, रोमांच हो, खरीदारी हो या फिर सांस्कृतिक जुड़ाव।



