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GIMS Hospital News : “अब छोटे शहरों के बच्चों को नहीं जाना पड़ेगा बड़े महानगरों की ओर!”, GIMS बना बच्चों की हड्डियों के एडवांस इलाज का नया सेंटर, हर साल 1000 से ज्यादा मासूमों को मिलेगा नया जीवन, CSR पहल और आधुनिक तकनीक ने बदली तस्वीर

क्लबफुट, टेढ़े पैर, जटिल फ्रैक्चर और हड्डियों की गंभीर बीमारियों का अब ग्रेटर नोएडा में होगा हाईटेक इलाज, आधुनिक मशीनों और एडवांस सर्जरी से बदलेगी हजारों बच्चों की जिंदगी

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक खुशखबरी सामने आई है। अब बच्चों की हड्डियों से जुड़ी गंभीर बीमारियों और जटिल सर्जरी के लिए लोगों को दिल्ली, मुंबई या दूसरे बड़े महानगरों के अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ग्रेटर नोएडा स्थित गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (GIMS) अब एडवांस पीडियाट्रिक ऑर्थोपीडिक सर्जरी करने में पूरी तरह सक्षम हो गया है।
इस नई सुविधा के शुरू होने से हर साल 1000 से अधिक बच्चों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। क्लबफुट, अंगों में विकृति, जन्मजात हड्डियों की समस्याएं, जटिल फ्रैक्चर और अन्य गंभीर ऑर्थोपेडिक बीमारियों से जूझ रहे बच्चों को अब समय पर, सुरक्षित और आधुनिक इलाज मिल सकेगा।

CSR पहल और आधुनिक तकनीक ने बदली तस्वीर
यह महत्वपूर्ण उपलब्धि हेल्थियम मेडटेक के सहयोग और प्लान इंटरनेशनल (इंडिया चैप्टर) द्वारा लागू की गई CSR (कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) पहल के तहत हासिल हुई है। इस पहल के अंतर्गत GIMS को कई अत्याधुनिक मेडिकल उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, जिनकी मदद से बच्चों की हड्डियों की जटिल सर्जरी अब अधिक सटीकता और सुरक्षा के साथ की जा सकेगी।
संस्थान में स्थापित किए गए प्रमुख उपकरणों में शामिल हैं—
Midas Rex MR8 हाई स्पीड इलेक्ट्रिक ड्रिल सिस्टम
बच्चों के कूल्हे की प्लेटिंग सेट
छोटी हड्डियों के लिए विशेष ड्रिल और आरी सिस्टम
पीडियाट्रिक बोन सर्जरी इंस्ट्रूमेंट सेट
एडवांस C-Arm मशीन
इन अत्याधुनिक तकनीकों के जरिए अब बच्चों की उम्र और शारीरिक जरूरतों के अनुसार बेहतर सर्जिकल समाधान उपलब्ध कराए जाएंगे।

अब इन बीमारियों का होगा हाईटेक इलाज
GIMS में अब जिन बीमारियों और समस्याओं का इलाज संभव हो सकेगा, उनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं— क्लबफुट (Clubfoot), डेवलपमेंटल डिस्प्लेसमेंट ऑफ हिप (DDH), जन्मजात अंग विकृति, जटिल फ्रैक्चर, हड्डियों का टेढ़ापन बच्चों की ऑर्थोपेडिक सर्जरी से जुड़ी अन्य गंभीर समस्याएं
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की हड्डियों की समस्याओं का समय पर इलाज बेहद जरूरी होता है। इलाज में देरी होने पर बच्चों को आजीवन विकलांगता, चलने-फिरने में परेशानी और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

उत्तर प्रदेश में बड़ी जरूरत थी ऐसे सेंटर की
भारत में बच्चों की हड्डियों से जुड़ी बीमारियों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार देश में लगभग 1 से 2 प्रतिशत बच्चे क्लबफुट जैसी समस्याओं के साथ जन्म लेते हैं। इसके अलावा कई बच्चे दुर्घटनाओं, संक्रमण और समय पर इलाज न मिलने के कारण स्थायी शारीरिक विकृति का शिकार हो जाते हैं।
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में विशेषज्ञ इलाज की सीमित उपलब्धता के कारण कई परिवारों को बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह बेहद कठिन साबित होता था। ऐसे में GIMS की यह पहल हजारों परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है।

“अब बच्चों को घर के पास मिलेगा इलाज” : डॉ. जी.एन. सिंह
इस अवसर पर मुख्य अतिथि और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सलाहकार डॉ. जी.एन. सिंह ने कहा कि यह पहल सरकार की उस सोच को दर्शाती है, जिसके तहत हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना प्राथमिकता है।
उन्होंने कहा “हर बच्चे को उसकी सामाजिक और आर्थिक पृष्ठभूमि से ऊपर उठकर समय पर और बेहतर इलाज मिलना चाहिए। सार्वजनिक और निजी संस्थाओं की साझेदारी से स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाया जा सकता है।”

GIMS बना पश्चिमी यूपी का उभरता हेल्थ हब
GIMS के डायरेक्टर जनरल डॉ. (ब्रिगेडियर) राकेश कुमार गुप्ता ने कहा कि आधुनिक उपकरणों की मदद से अब संस्थान पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक के जटिल मामलों को अधिक सटीकता और सुरक्षा के साथ संभाल सकेगा।
उन्होंने बताया— “अब मरीजों को दूसरे शहरों में रेफर करने की आवश्यकता काफी कम होगी। बच्चों को समय पर इलाज मिलेगा और परिवारों पर आर्थिक बोझ भी कम होगा।”

हेल्थियम मेडटेक और प्लान इंटरनेशनल ने जताई प्रतिबद्धता
हेल्थियम मेडटेक के CEO एवं MD अनीश बाफना ने कहा कि संस्था का उद्देश्य केवल तकनीक उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि जरूरतमंद बच्चों तक समय पर इलाज पहुंचाना भी है। वहीं प्लान इंटरनेशनल (इंडिया चैप्टर) के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मोहम्मद आसिफ ने कहा कि इस साझेदारी के जरिए कमजोर और जरूरतमंद समुदायों तक विशेष स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच मजबूत की जा रही है।
उन्होंने कहा—“हर साल 1000 से अधिक बच्चों को इस पहल का सीधा लाभ मिलेगा और उन्हें बिना आर्थिक व भौगोलिक बाधाओं के जीवन बदलने वाला इलाज मिल सकेगा।”

लॉन्च कार्यक्रम में दिखाई गई इम्पैक्ट फिल्म
इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में औपचारिक उद्घाटन के साथ एक विशेष ‘इम्पैक्ट फिल्म’ भी दिखाई गई, जिसमें बच्चों के इलाज और इस परियोजना के सामाजिक प्रभाव को दर्शाया गया। कार्यक्रम में लाभार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए और ऑर्थोपेडिक्स विभाग को उपकरणों का औपचारिक हस्तांतरण भी किया गया।

GIMS: पश्चिमी यूपी की उम्मीद बनता सरकारी अस्पताल
साल 2016 में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्थापित GIMS आज पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे प्रमुख सरकारी मेडिकल संस्थानों में शामिल हो चुका है।
500 से अधिक बेड वाले इस मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल में—एडवांस ऑपरेशन थिएटर, ट्रॉमा सेंटर, ICU, कार्डियोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, ऑर्थोपेडिक्स, क्रिटिकल केयर जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
अब पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी की यह नई सुविधा GIMS को बच्चों की हड्डियों के इलाज का बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

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