Greater Noida Authority News : ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक सेक्टरों की बदलेगी तस्वीर! मॉडल इंडस्ट्रियल हब के रूप में होगा विकास, सूरजपुर से परी चौक तक का इंडस्ट्रियल बेल्ट बनेगा आधुनिक कॉरिडोर, सड़कों से लेकर स्मार्ट लाइटिंग तक मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं, सीईओ एनजी रवि कुमार ने (IBA) के पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में यह जानकारी साझा की

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा को देश के सबसे आधुनिक और सुव्यवस्थित औद्योगिक शहरों में शामिल करने की दिशा में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। शहर के औद्योगिक सेक्टरों को अब चरणबद्ध तरीके से “मॉडल इंडस्ट्रियल सेक्टर” के रूप में विकसित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत औद्योगिक क्षेत्रों में सड़क, सीवर, ड्रेनेज, स्ट्रीट लाइट, हरित पट्टी, सौंदर्यीकरण और आधारभूत ढांचे को आधुनिक स्वरूप दिया जाएगा, ताकि निवेशकों और उद्योगों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन (IBA) के पदाधिकारियों के साथ हुई बैठक में यह जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण का लक्ष्य केवल औद्योगिक भूखंड आवंटित करना नहीं, बल्कि उद्योगों के लिए ऐसा माहौल तैयार करना है जहां निवेशक लंबे समय तक बेहतर सुविधाओं के साथ कारोबार कर सकें।
सूरजपुर से परी चौक तक का इंडस्ट्रियल बेल्ट बनेगा आधुनिक कॉरिडोर
प्राधिकरण की योजना के तहत सूरजपुर गोलचक्कर से घंघौला चौक और वहां से परी चौक तक के पूरे औद्योगिक मार्ग को आधुनिक और आकर्षक स्वरूप दिया जाएगा। इस कॉरिडोर में सड़क चौड़ीकरण, हरित विकास, स्मार्ट स्ट्रीट लाइट, आधुनिक ट्रैफिक व्यवस्था और बेहतर ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके अलावा पूरे मार्ग पर ग्रीन बेल्ट तैयार की जाएगी और सौंदर्यीकरण के लिए आधुनिक डिजाइन के फव्वारे, लैंडस्केपिंग और आकर्षक प्रकाश व्यवस्था भी की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि यह पूरा क्षेत्र भविष्य में ग्रेटर नोएडा की “इंडस्ट्रियल पहचान” के रूप में विकसित होगा।
औद्योगिक सेक्टरों में होंगी हाईटेक सुविधाएं
सीईओ एनजी रवि कुमार ने बताया कि सेक्टर इकोटेक-3 सहित कई औद्योगिक क्षेत्रों में सड़क, ड्रेनेज, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट और हाईमास्ट लाइट जैसी सुविधाओं को तेजी से बेहतर किया जा रहा है। कई सेक्टरों में पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर को हटाकर नई तकनीक आधारित सुविधाएं विकसित की जाएंगी। उन्होंने कहा कि— “औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने के लिए जरूरी है कि वहां उद्योगों के अनुकूल आधारभूत ढांचा तैयार हो। हमारा प्रयास है कि ग्रेटर नोएडा का हर इंडस्ट्रियल सेक्टर आधुनिक, सुरक्षित और व्यवस्थित नजर आए।”
पानी और सीवरेज की समस्याओं पर भी होगा समाधान
बैठक में उद्यमियों ने औद्योगिक क्षेत्रों में पानी सप्लाई, सीवरेज और सड़क मरम्मत से जुड़ी कई समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं। इस पर सीईओ ने भरोसा दिलाया कि सभी समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराया जाएगा। प्राधिकरण ने यह भी जानकारी दी कि कई औद्योगिक क्षेत्रों में नई पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरू हो चुका है, जिससे पानी की समस्या काफी हद तक दूर हो जाएगी। वहीं जलभराव रोकने के लिए ड्रेनेज नेटवर्क को भी मजबूत किया जाएगा।
उद्योगपतियों ने की आधुनिक विकास की सराहना
इंडस्ट्रियल बिजनेस एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि यदि औद्योगिक क्षेत्रों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जाता है, तो इससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत होगा। उन्होंने प्राधिकरण से सड़क, सुरक्षा, पार्किंग और बिजली व्यवस्था को भी और बेहतर बनाने की मांग की।
उद्योगपतियों का कहना था कि ग्रेटर नोएडा पहले ही देश-विदेश की बड़ी कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुका है। यदि यहां विश्वस्तरीय इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित होता है, तो आने वाले समय में यह क्षेत्र उत्तर भारत का सबसे बड़ा औद्योगिक हब बन सकता है।
निवेश और रोजगार को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक सेक्टरों के आधुनिकीकरण से न केवल निवेश बढ़ेगा, बल्कि हजारों युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे। बेहतर कनेक्टिविटी और स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर से कंपनियों के संचालन में आसानी होगी और नए उद्योग लगाने के लिए निवेशक भी आकर्षित होंगे। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, पूर्वांचल और यमुना एक्सप्रेसवे जैसी बड़ी परियोजनाओं के कारण पहले ही ग्रेटर नोएडा का औद्योगिक महत्व तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में प्राधिकरण की यह पहल क्षेत्र को आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बना सकती है।
“मॉडल इंडस्ट्रियल सेक्टर” बनेगा नई पहचान
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण अब केवल विकास प्राधिकरण की भूमिका तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि शहर को एक “भविष्य के औद्योगिक शहर” के रूप में स्थापित करने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। मॉडल इंडस्ट्रियल सेक्टर की अवधारणा इसी सोच का हिस्सा मानी जा रही है।



