अथॉरिटीटॉप न्यूजताजातरीननोएडा

Noida Authority News : नोएडा प्राधिकरण की विज्ञापन व्यवस्था पर फिर उठे सवाल, कॉन्ट्रैक्ट खत्म, ई-साइकिल सेवा बंद... फिर भी कैसे चल रहे हैं विज्ञापन?, सोशल मीडिया पर अधिकारियों से मांगा जवाब, ब्लिंकिट एंबुलेंस के विज्ञापन पर भी उठे सवाल, 'ग्रीन बेल्ट तक बेच दी' जैसी टिप्पणियां, प्राधिकरण से पारदर्शिता की मांग, GM RP सिंह ने कोई जवाब नहीं दिया

इस मामले में जो रफ़्तार टूडे के संवाददाता ने GM RP सिंह का बयान जानना चाहा तो उन्होंने व्हाट्सएप पर कोई जवाब नहीं दिया ऐसी उदासीनता देखकर अब तो मीडिया वाले भी कहने लगे हैं जो मीडिया वालों के जवाब नहीं देता वो कैसे आम पब्लिक की कैसे सुनता होगा एक तरफ यूपी के सीएम ये कहते है कि आम पब्लिक की सुनो और नोएडा प्राधिकरण के GM खुद मीडिया वालों की भी नहीं सुनता है।

नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा प्राधिकरण की विज्ञापन व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। शहर में बंद हो चुकी ई-साइकिल परियोजना से जुड़े विज्ञापन अब भी सार्वजनिक स्थानों पर लगे होने से स्थानीय लोगों ने प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। सेक्टर-77 स्थित ई-साइकिल स्टैंड पर लगे विज्ञापनों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिनमें नागरिकों ने नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों को टैग करते हुए जवाब मांगा है कि जब संबंधित कंपनी का अनुबंध समाप्त हो चुका है और परियोजना भी बंद हो गई है, तो आखिर इन विज्ञापनों को हटाया क्यों नहीं गया?

ई-साइकिल योजना बंद, लेकिन विज्ञापन अब भी बरकरार

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस कंपनी को ई-साइकिल संचालन का ठेका दिया गया था, उसका अनुबंध काफी पहले समाप्त किया जा चुका है। चर्चा यह भी है कि कंपनी को ब्लैकलिस्ट किए जाने की कार्रवाई भी हुई थी। इसके बावजूद सेक्टर-77 सहित कई स्थानों पर उसी परियोजना से जुड़े विज्ञापन अब भी लगे हुए हैं, जबकि ई-साइकिल सेवा पूरी तरह बंद पड़ी है। इससे लोगों में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इन विज्ञापन स्थलों का संचालन किसके अधिकार में है और इनसे होने वाले राजस्व का हिसाब कौन देगा।

सोशल मीडिया पर अधिकारियों से मांगा जवाब

मामले को लेकर कई नागरिकों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक आर.पी. सिंह, महाप्रबंधक एस.पी. सिंह और अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACEO) वंदना त्रिपाठी को टैग करते हुए जवाब मांगा है। लोगों का कहना है कि यदि अनुबंध समाप्त हो चुका है तो विज्ञापन हटाए जाने चाहिए थे। यदि नहीं हटाए गए तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है और क्या प्राधिकरण को इसकी जानकारी है?

ब्लिंकिट एंबुलेंस के विज्ञापन पर भी उठे सवाल

स्थानीय निवासी अमित गुप्ता ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ई-साइकिल स्टैंड पर ब्लिंकिट एंबुलेंस का विज्ञापन लगाया गया है। उनका सवाल है कि यदि यह विज्ञापन स्थल सरकारी योजना के तहत विकसित किया गया था, तो उस पर निजी कंपनी का विज्ञापन किस प्रक्रिया के तहत लगाया गया? क्या इसके लिए प्राधिकरण से अनुमति ली गई है या यह किसी पुराने अनुबंध का हिस्सा है? यह मुद्दा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि हाल ही में जिले में एंबुलेंस सेवाओं की उपलब्धता को लेकर भी सवाल उठे थे। ऐसे में बंद पड़ी परियोजना पर निजी एंबुलेंस सेवा का विज्ञापन लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर रहा है।

‘ग्रीन बेल्ट तक बेच दी’ जैसी टिप्पणियां

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि शहर में विज्ञापन व्यवस्था पूरी तरह बेलगाम हो चुकी है। कुछ यूजर्स ने आरोप लगाया कि “अब तो हर ग्रीन बेल्ट तक विज्ञापनों के लिए इस्तेमाल की जा रही है।” हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार उठ रहे सवालों ने प्राधिकरण की विज्ञापन नीति और निगरानी व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है।

प्राधिकरण से पारदर्शिता की मांग

नागरिकों का कहना है कि यदि किसी एजेंसी का अनुबंध समाप्त हो चुका है तो उससे जुड़े सभी विज्ञापन और संरचनाएं भी समय पर हटाई जानी चाहिए। इससे न केवल शहर की सौंदर्य व्यवस्था प्रभावित होती है, बल्कि आम लोगों में भ्रम भी पैदा होता है। लोगों ने मांग की है कि नोएडा प्राधिकरण इस पूरे मामले की जांच कर स्पष्ट करे कि संबंधित विज्ञापन किस आधार पर अब भी प्रदर्शित किए जा रहे हैं और यदि इसमें कोई अनियमितता है तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं एजेंसियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। फिलहाल इस मामले में नोएडा प्राधिकरण की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लोगों की निगाहें अब प्राधिकरण के जवाब और संभावित कार्रवाई पर टिकी हैं।

इस मामले में जो रफ़्तार टूडे के संवाददाता ने GM RP सिंह का बयान जानना चाहा तो उन्होंने व्हाट्सएप पर कोई जवाब नहीं दिया ऐसी उदासीनता देखकर अब तो मीडिया वाले भी कहने लगे हैं जो मीडिया वालों के जवाब नहीं देता वो कैसे आम पब्लिक की कैसे सुनता होगा एक तरफ यूपी के सीएम ये कहते है कि आम पब्लिक की सुनो और नोएडा प्राधिकरण के GM खुद मीडिया वालों की भी नहीं सुनता है।

Raftar Today
Raftar Today

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button