Yatharth Hospital News : जाँच में झोल या बिल में गोलमाल?, ग्रेटर नोएडा के यथार्थ अस्पताल में 23,000 रुपये की 'भ्रांति', मरीज परेशान, प्रबंधन चुप, दो दिन भर्ती, 1.5 लाख का बिल... पर रिपोर्ट गायब!, डीएम से शिकायत की तैयारी में पीड़ित

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।।
एक तरफ निजी अस्पतालों पर जनता भरोसा जताती है, तो दूसरी ओर कुछ संस्थानों की लापरवाही उस भरोसे को तोड़ देती है। ग्रेटर नोएडा के सेक्टर ओमेगा-1 स्थित यथार्थ सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल पर ऐसा ही एक गंभीर आरोप सामने आया है। एक मरीज से जांच के नाम पर ₹23,000 वसूलने के बाद अब अस्पताल यह कह रहा है कि वह जांच हुई ही नहीं! इतना ही नहीं, मरीज द्वारा कई बार रिपोर्ट मांगने और शिकायत दर्ज कराने के बावजूद अब तक उसे रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है।
यह मामला अब सिर्फ चिकित्सा लापरवाही नहीं बल्कि उपभोक्ता शोषण और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ गया है। पीड़ित परिवार अब जिलाधिकारी (DM) से इस मामले की शिकायत करने की तैयारी कर रहा है।
दो दिन भर्ती, 1.5 लाख का बिल… पर रिपोर्ट गायब!
पीड़ित विपिन कुमार, जो ग्रेटर नोएडा के शिव शक्ति अपार्टमेंट, सेक्टर म्यू-2 में रहते हैं, ने अपनी आँखों में परेशानी होने पर यथार्थ अस्पताल में परामर्श लिया। डॉक्टरों ने उन्हें 28 जून को भर्ती कर लिया। दो दिन बाद यानी 1 जुलाई को उन्हें छुट्टी दे दी गई और लगभग ₹1,50,000 का बिल थमा दिया गया।
मरीज के अनुसार, बिल में एक विशेष जांच ₹23,000 की दिखाई गई थी। जब डिस्चार्ज के बाद उन्होंने जांच रिपोर्ट मांगी, तो अस्पताल प्रबंधन ने चौंकाने वाला जवाब दिया —
“यह जांच तो हुई ही नहीं, बिल गलती से जुड़ गया है।”
RWA अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठी भी कूदे सामने
बिल की विसंगति को लेकर जब विपिन कुमार को संदेह हुआ, तो उन्होंने सेक्टर म्यू-2 के आरडब्ल्यूए अध्यक्ष श्री धर्मेंद्र राठी से संपर्क किया। राठी ने मरीज के साथ अस्पताल पहुंचकर साफ शब्दों में रिपोर्ट और स्पष्टीकरण मांगा।
उनका कहना था:
“जब जांच हुई है तो रिपोर्ट क्यों नहीं दी जा रही? और अगर नहीं हुई तो ₹23,000 किस बात का लिया गया?”
प्रबंधन ने मौखिक रूप से अपनी गलती मान ली और पैसे रिफंड करने की बात कही, लेकिन लिखित रूप से कुछ भी देने से मना कर दिया। यही नहीं, रिफंड की तारीख तय करने से भी बचते रहे।
कई बार संपर्क के बावजूद प्रबंधन मौन
रफ़्तार टुडे संवाददाता ने जब इस मामले में अस्पताल प्रशासन का पक्ष जानने की कोशिश की, तो बिलिंग विभाग ने फोन नहीं उठाया और ईमेल का भी जवाब नहीं दिया। पीड़ित और आरडब्ल्यूए प्रतिनिधि दोनों ने बताया कि तीन बार अस्पताल में जाकर शिकायत दर्ज की गई, लेकिन हर बार बात को टाल दिया गया।
डीएम से शिकायत की तैयारी में पीड़ित
विपिन कुमार का कहना है:
“मैंने अस्पताल पर भरोसा किया, इलाज करवाया और बिल भी समय पर चुका दिया। लेकिन अब यह व्यवहार चौंकाने वाला है। रिपोर्ट के नाम पर मुझे गुमराह किया जा रहा है। अगर मुझे पैसा वापस नहीं मिला, तो मैं जिलाधिकारी को लिखित शिकायत दूंगा और उपभोक्ता आयोग का रुख करूंगा।”
🏥 सवालों के घेरे में यथार्थ अस्पताल
इस पूरे घटनाक्रम ने यथार्थ अस्पताल की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर तब, जब इस अस्पताल को सुपरस्पेशलिटी और “अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाओं” के लिए जाना जाता है।
यह पहला मामला नहीं है जब किसी निजी अस्पताल पर बिलिंग में हेरफेर या रिपोर्ट में लापरवाही के आरोप लगे हैं।
📌 प्रशासन की भूमिका अब महत्वपूर्ण
यदि यह मामला डीएम तक पहुंचता है तो प्रशासन की यह जिम्मेदारी होगी कि वह:
- अस्पताल की बिलिंग प्रक्रिया की जांच करे
- मरीज को उचित मुआवजा दिलवाए
- अस्पताल पर नियमानुसार कार्रवाई करे
- भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों, इसके लिए गाइडलाइन तैयार करे
❗ यदि आप भी अस्पतालों में इलाज करवा रहे हैं, तो ध्यान रखें:
- प्रत्येक जांच की रिपोर्ट खुद लें, उसे पढ़ें और डॉक्टर से पुष्टि करें।
- बिल में लिखी हर जांच को क्रॉस चेक करें — क्या वह वास्तव में की गई थी?
- अगर शक हो तो तुरंत RWA या प्रशासनिक निकाय की मदद लें।
- कभी भी अस्पताल छोड़ने से पहले डिस्चार्ज समरी, बिलिंग डिटेल्स और रिपोर्ट्स की प्रतिलिपि लें।
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