Breaking News : दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का ‘मास्टर प्लान’ समझने ग्रेटर नोएडा पहुंचे 6 युवा IAS!, स्मार्ट टाउनशिप, लॉजिस्टिक्स हब और रोजगार मॉडल ने किया प्रभावित, अफसरों ने जमीनी हकीकत को करीब से परखा, सीईओ एनजी रवि कुमार ने बताया—जमीन अधिग्रहण का उद्देश्य सिर्फ विकास नहीं, रोजगार भी

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। देश में तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक और शहरी विकास मॉडलों के बीच ग्रेटर नोएडा एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का केंद्र बन गया है। भारत सरकार में बतौर सहायक सचिव नियुक्त छह युवा आईएएस अधिकारियों का दल मंगलवार को ग्रेटर नोएडा पहुंचा, जहां उन्होंने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण, इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप ग्रेटर नोएडा लिमिटेड (IITGNL), मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब (MMLH) और मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब (MMTH) जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का विस्तृत अध्ययन किया। इस दौरान अधिकारियों ने न केवल प्रेजेंटेशन के माध्यम से योजनाओं को समझा बल्कि मौके पर जाकर इन परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति का भी निरीक्षण किया। यह दौरा केवल एक औपचारिक अध्ययन यात्रा नहीं था, बल्कि देश के भविष्य के प्रशासनिक नेतृत्व को यह समझाने का प्रयास भी था कि किस प्रकार योजनाबद्ध विकास, उद्योगों को बढ़ावा और रोजगार सृजन के माध्यम से किसी क्षेत्र को आर्थिक शक्ति केंद्र में बदला जा सकता है।
देश के भविष्य के प्रशासकों ने जाना ग्रेटर नोएडा मॉडल का राज
भारत सरकार में सहायक सचिव के रूप में कार्यरत आईएएस अधिकारी आयूषी प्रधान, बेंजो पी. जोस, फडतरे अनितेश अशोक, प्रिया रानी, सलोनी छाबड़ा और जुफिशन हक ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण कार्यालय पहुंचे। यहां उनका स्वागत प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) एनजी रवि कुमार, एसीईओ श्रीलक्ष्मी वीएस और प्रेरणा सिंह ने किया। बैठक के दौरान अधिकारियों को ग्रेटर नोएडा के विकास मॉडल, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया, औद्योगिक निवेश आकर्षित करने की रणनीति और रोजगार सृजन की योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
सीईओ एनजी रवि कुमार ने बताया—जमीन अधिग्रहण का उद्देश्य सिर्फ विकास नहीं, रोजगार भी
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी औद्योगिक विकास प्राधिकरण का अंतिम उद्देश्य केवल भूमि विकसित करना नहीं होता, बल्कि उस भूमि पर उद्योग स्थापित कर स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना होता है। उन्होंने कहा कि किसानों से अधिग्रहित भूमि को उद्योगों के लिए उपलब्ध कराने के पीछे सबसे बड़ी सोच यह होती है कि क्षेत्र में निवेश आए, उद्योग स्थापित हों और युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे शहरों की ओर पलायन न करना पड़े। सीईओ ने युवा आईएएस अधिकारियों को अपने प्रशासनिक जीवन में रोजगार सृजन को प्राथमिकता देने की सीख भी दी और कहा कि किसी भी जिले या क्षेत्र की सफलता का सबसे बड़ा पैमाना वहां पैदा होने वाले रोजगार अवसर होते हैं।
स्मार्ट इंडस्ट्रियल टाउनशिप बनी आकर्षण का केंद्र
अध्ययन दौरे के दौरान सबसे अधिक चर्चा इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप ग्रेटर नोएडा लिमिटेड (IITGNL) को लेकर रही। एसीईओ प्रेरणा सिंह ने अधिकारियों को बताया कि यह परियोजना दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) के तहत विकसित की जा रही है और इसे देश की सबसे आधुनिक औद्योगिक टाउनशिपों में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि अब तक इस टाउनशिप में 30 से अधिक बड़ी कंपनियों को भूमि आवंटित की जा चुकी है। इनमें कई प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां शामिल हैं।
24 घंटे बिजली-पानी और ऑटोमेटिक वेस्ट कलेक्शन सिस्टम ने बढ़ाया आकर्षण
एसीईओ श्रीलक्ष्मी वीएस ने अधिकारियों को टाउनशिप की आधुनिक सुविधाओं की जानकारी देते हुए बताया कि यहां विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि टाउनशिप में—24 घंटे बिजली आपूर्ति की व्यवस्था, निर्बाध पेयजल आपूर्ति, अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली,, स्मार्ट निगरानी तंत्र, और ऑटोमेटिक वेस्ट कलेक्शन सिस्टम जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं।
इन सुविधाओं का उद्देश्य केवल उद्योगों को आकर्षित करना नहीं, बल्कि कर्मचारियों और निवेशकों के लिए बेहतर जीवन गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी है।
मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब और लॉजिस्टिक हब ने खींचा ध्यान
बैठक में अधिकारियों को मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब (MMTH) और मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक हब (MMLH) परियोजनाओं के बारे में भी विस्तृत जानकारी दी गई।
बताया गया कि एमएमटीएच के अंतर्गत—
रेलवे नेटवर्क, मेट्रो कनेक्टिविटी, बस टर्मिनल, और अन्य सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं को एकीकृत किया जाएगा। इससे यात्रियों और उद्योगों दोनों को बड़ी सुविधा मिलेगी।
प्रेजेंटेशन के बाद किया जमीनी निरीक्षण
सिर्फ कागजी जानकारी तक सीमित न रहते हुए आईएएस अधिकारियों ने परियोजनाओं का मौके पर जाकर निरीक्षण भी किया। उन्होंने स्मार्ट टाउनशिप की सड़कों, बुनियादी ढांचे, औद्योगिक इकाइयों और विकसित की जा रही सुविधाओं को करीब से देखा।
अधिकारियों ने परियोजनाओं की प्रगति, निवेश की स्थिति और रोजगार सृजन के आंकड़ों को समझते हुए विभिन्न तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं पर सवाल भी पूछे।
ग्रेटर नोएडा बन रहा राष्ट्रीय विकास का प्रयोगशाला मॉडल
विशेषज्ञों का मानना है कि जिस प्रकार ग्रेटर नोएडा में उद्योग, परिवहन, आवास, लॉजिस्टिक्स और स्मार्ट सिटी की अवधारणाओं को एक साथ विकसित किया जा रहा है, वह भविष्य के भारत के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकता है।
यही कारण है कि देश के युवा प्रशासनिक अधिकारियों को यहां लाकर इन परियोजनाओं का अध्ययन कराया जा रहा है, ताकि वे भविष्य में अपने-अपने क्षेत्रों में इसी प्रकार के विकास मॉडल को लागू कर सकें।



