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Dog Breaking News : ग्रेटर नोएडा वेस्ट में आवारा कुत्ते का खौफनाक हमला, 13 वर्षीय बच्चे का पैर बुरी तरह घायल, प्लास्टर चढ़ाना पड़ा, मोहल्ले में दहशत का माहौल, हालत बिगड़ी, पैर में लगा प्लास्टर

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में आवारा कुत्तों का आतंक एक बार फिर सामने आया है। शुक्रवार को हुई एक भयावह घटना में 13 वर्षीय बच्चे पर एक कुत्ते ने अचानक हमला कर दिया। हमले में बच्चे के पैर में गहरे घाव हो गए और हड्डी तक चोट पहुंच गई, जिसके बाद पैर में प्लास्टर बांधना पड़ा। यह घटना न केवल परिवार बल्कि पूरे इलाके के लोगों के लिए दहशत का सबब बन गई है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की यह घटना चेतावनी की घंटी है। अगर अभी भी प्रशासन और स्थानीय निकायों ने ध्यान नहीं दिया तो ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं। बच्चों की सुरक्षा और लोगों की जान बचाने के लिए आवारा कुत्तों पर काबू पाना अब बेहद जरूरी हो गया है।

कैसे हुआ हमला?

शाहबेरी स्थित श्याम अपार्टमेंट में रहने वाले प्रदीप शेखावत का बेटा शुक्रवार को पास की दुकान पर सामान लेने गया था। इसी दौरान एक आवारा कुत्ता अचानक उस पर टूट पड़ा। कुत्ते ने सीधे बच्चे के पैर को मुंह में दबोच लिया और उसे बुरी तरह नोचने लगा।

बच्चे ने खुद को छुड़ाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हो पाया। उसकी चीखें सुनकर आसपास के लोग दौड़े और डंडे से कुत्ते को पीटकर भगाया, तब जाकर बच्चे की जान बची।

हालत बिगड़ी, पैर में लगा प्लास्टर

हमले में बच्चे के पैर में कई जगह गहरे जख्म हो गए। डॉक्टरों के मुताबिक,

कुत्ते के काटने से हड्डी तक चोट पहुंची है।

तुरंत प्लास्टर बांधना पड़ा और एंटी-रेबीज इंजेक्शन भी लगाया गया।

फिलहाल बच्चा घर पर है लेकिन वह बेहद सहमा हुआ है और बार-बार उस डरावनी घटना को याद कर सिहर उठता है।

मोहल्ले में खौफ का माहौल

इस घटना के बाद से श्याम अपार्टमेंट और आसपास के क्षेत्र के लोग दहशत में हैं। बच्चों के अभिभावक अपने बच्चों को अकेले बाहर भेजने से डर रहे हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है और कई बार इनसे झुंड में हमला होने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।
लोगों ने प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग की है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।

लोगों की नाराजगी और मांग

निवासियों का कहना है कि प्राधिकरण और नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी केवल औपचारिकताएं निभा रहे हैं लेकिन जमीनी स्तर पर कुत्तों को पकड़ने का अभियान कमजोर है।

कुछ महीनों पहले भी ऐसे कई मामले सामने आए थे, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं निकल पाया। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वे सामूहिक प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

बच्चे की मानसिक स्थिति

हमले का असर बच्चे की मानसिक स्थिति पर भी गहरा पड़ा है। घटना के बाद से वह बहुत डरा हुआ है।

परिवार के सदस्यों का कहना है कि वह बार-बार कह रहा है कि “अब मैं अकेले बाहर नहीं जाऊंगा।” मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, इस तरह के हमले बच्चों में लंबे समय तक भय और ट्रॉमा पैदा कर सकते हैं।

विशेषज्ञों की सलाह

डॉक्टरों का कहना है कि कुत्ते के काटने की स्थिति में किसी भी मरीज को तुरंत

1. घाव को अच्छी तरह धोना चाहिए।

2. तुरंत पास के अस्पताल में ले जाकर एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाना चाहिए।

3. अगर चोट गहरी हो तो ऑर्थोपेडिक इलाज भी ज़रूरी है।

प्रशासन के लिए सवाल

यह घटना एक बार फिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। स्ट्रे डॉग मेनजमेंट को लेकर बनी नीतियां कागज़ों तक सीमित न रहकर जमीनी हकीकत में कब उतरेंगी?

क्यों अब तक शहर में आवारा कुत्तों को पकड़ने और उन्हें शेल्टर में शिफ्ट करने की स्थायी व्यवस्था नहीं हो पाई?

जब तक इस समस्या पर सख्त और ठोस एक्शन नहीं लिया जाएगा, तब तक निर्दोष बच्चों और बुजुर्गों की जान पर खतरा मंडराता रहेगा।

रफ़्तार टुडे की न्यूज़
Raftar Today
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