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NPCL Breaking News : इलाहाबाद हाईकोर्ट में में इस सोसाइटी का बड़ा मामला, प्रीपेड बिजली मीटर से अवैध वसूली पर अदालत ने जताई कड़ी नाराज़गी, कहा – “उपभोक्ताओं से अन्याय नहीं सहा जाएगा!”, सोसायटियों में प्रीपेड मीटर विवाद बना आम समस्या, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और NPCL की भूमिका पर भी उठे सवाल

ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टुडे। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की प्रसिद्ध सोसायटी Supertech Ecovillage-1 एक बार फिर सुर्खियों में है, और इस बार वजह है बिजली बिलों में कथित “अवैध वसूली” का मामला। इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) ने इस गंभीर मुद्दे पर कड़ा संज्ञान लेते हुए सोसायटी में प्रीपेड बिजली मीटर से अतिरिक्त चार्ज वसूले जाने पर नाराज़गी जताई है। अदालत ने सभी संबंधित पक्षों – उत्तर प्रदेश सरकार, YG एस्टेट, ग्रैविटी, सुपरटेक, NPCL, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और विद्युत नियामक आयोग – से एक सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

अवैध वसूली अपराध की श्रेणी में आएगी” – हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान माननीय न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि यदि किसी भी सोसायटी या एजेंसी द्वारा उपभोक्ताओं से अतिरिक्त या अनुचित शुल्क वसूला जाता है, तो यह सीधे तौर पर उपभोक्ता अधिकारों का हनन है। अदालत ने यह भी कहा कि अगर किसी उपभोक्ता ने इस तरह के अवैध शुल्क का भुगतान करने से इनकार किया, तो उसकी बिजली काटना अपराध की श्रेणी में आएगा।

इस टिप्पणी के साथ ही अदालत ने संकेत दे दिया कि अब ग्रेटर नोएडा की सोसायटियों में बिजली से जुड़ी मनमानी पर सख्त नकेल कसने वाली है।

ग्रैविटी कंपनी की दलील और कोर्ट का तीखा जवाब

सुनवाई के दौरान ग्रैविटी कंपनी की ओर से पेश अधिवक्ता ने कहा कि कंपनी की सेवा अब Ecovillage-1 में समाप्त हो चुकी है, इसलिए वर्तमान विवाद से उनका कोई संबंध नहीं है। हालांकि, न्यायालय ने इस पर तीखा रुख अपनाते हुए कहा “अपने कार्यकाल का उत्तर तो आपको ही देना पड़ेगा।”

इस टिप्पणी के बाद कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि किसी अवधि में अवैध वसूली हुई है, तो उस समय जिम्मेदार संस्था या कंपनी अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकती।

रिट पिटीशन में क्या हैं मुख्य बिंदु

यह रिट पिटीशन गंगा सागर तिवारी +9 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश सरकार एवं 7 अन्य के नाम से दायर की गई है।
निवासियों का कहना है कि Supertech Ecovillage-1 में स्थापित प्रीपेड मीटरों के माध्यम से बिजली की दरें NPCL की स्वीकृत दरों से अधिक वसूली जा रही थीं।
साथ ही, मीटर रीडिंग में गड़बड़ी, सर्विस चार्ज और मेंटेनेंस फीस जैसे अतिरिक्त शुल्क भी जोड़े जा रहे थे।

निवासियों का आरोप है कि उन्होंने इस संबंध में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण, NPCL और बिजली नियामक आयोग से शिकायत की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। अंततः उन्हें न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा।

सोसायटियों में प्रीपेड मीटर विवाद बना आम समस्या

यह मामला सिर्फ Supertech Ecovillage-1 तक सीमित नहीं है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट (Noida Extension) की कई सोसायटियों में भी प्रीपेड मीटरों की विसंगतियों को लेकर विवाद जारी है। कई निवासी समूहों का आरोप है कि बिलिंग में पारदर्शिता नहीं है और रिचार्ज राशि बहुत तेजी से खत्म होती है। लोगों ने यह भी कहा कि जब वे अपने उपयोग की जांच मांगते हैं, तो कंपनियां डेटा साझा नहीं करतीं।

यह मामला अब मिसाल बन सकता है और अदालत का यह आदेश आने वाले समय में सभी डेवलपर्स और मेंटेनेंस कंपनियों के लिए चेतावनी साबित हो सकता है।

अगली सुनवाई की तारीख तय, जवाब न देने वालों पर सख्ती संभव

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस मामले में अगली सुनवाई की तिथि 14 अक्टूबर 2025 तय की है।
सभी संबंधित पक्षों को निर्देश दिया गया है कि वे अदालत के समक्ष अपने-अपने पक्ष में स्पष्ट, प्रमाणित और विस्तृत जवाब दाखिल करें।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन कंपनियों ने निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं दिया, तो अदालत सीधी कार्रवाई के आदेश भी जारी कर सकती है।

निवासियों में उम्मीद की नई किरण

Ecovillage-1 के निवासियों के बीच अब राहत और उम्मीद दोनों की भावना है। उनका कहना है कि लंबे समय से चली आ रही इस मनमानी पर अब जाकर अदालत ने जनता की आवाज़ सुनी है।

निवासी संगठन के एक सदस्य ने कहा “हमें उम्मीद है कि यह फैसला सिर्फ हमारी सोसायटी ही नहीं, बल्कि पूरे ग्रेटर नोएडा वेस्ट के हजारों परिवारों के लिए राहत लेकर आएगा।”

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और NPCL की भूमिका पर भी उठे सवाल

न्यायालय ने इस दौरान ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और NPCL (Noida Power Company Limited) से भी यह पूछा कि उन्होंने इस मामले में अब तक क्या कदम उठाए हैं।
कई वर्षों से ये एजेंसियां सोसायटी डेवलपर्स और बिजली प्रदाताओं के बीच जिम्मेदारी तय नहीं कर पा रही हैं, जिसके कारण आम उपभोक्ता को बार-बार नुकसान उठाना पड़ता है।

उपभोक्ताओं के लिए ऐतिहासिक सुनवाई

यह मामला आने वाले दिनों में पूरे उत्तर प्रदेश की हाउसिंग सोसायटियों के लिए नजीर (precedent) बन सकता है।
यदि न्यायालय ने इस मुद्दे पर स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए, तो आने वाले समय में कोई भी कंपनी उपभोक्ताओं से अनुचित शुल्क नहीं वसूल पाएगी।

रफ़्तार टुडे की न्यूज़
Raftar Today
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