Yamuna Authority News : यमुना एक्सप्रेसवे के मेडिकल डिवाइसेज़ पार्क में “हाई-टेक हेल्थ क्रांति” की दस्तक — केंद्र सरकार के सचिव अमित अग्रवाल ने किया औचक निरीक्षण, दिसंबर 2026 तक सभी कॉमन फैसिलिटी तैयार करने का निर्देश, “मेडिकल डिवाइसेज़ का नोएडा अब बनेगा ‘मेक इन इंडिया’ का हेल्थ हब”

यमुना प्राधिकरण, रफ़्तार टुडे। भारत सरकार के फार्मास्युटिकल्स विभाग के सचिव श्री अमित अग्रवाल (IAS) एवं संयुक्त सचिव श्री अमन शर्मा ने आज यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) के सेक्टर-28 स्थित मेडिकल डिवाइसेज़ पार्क (Medical Devices Park) का निरीक्षण किया।
इस निरीक्षण ने न केवल इस प्रोजेक्ट को नई गति दी है बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि उत्तर प्रदेश अब भारत के हेल्थकेयर मैन्युफैक्चरिंग मानचित्र पर एक नई पहचान बनाने जा रहा है।
मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री राकेश कुमार सिंह ने इस अवसर पर पार्क के निर्माण कार्यों की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की और बताया कि अब तक 350 एकड़ क्षेत्रफल में से 101 भूखंडों का आवंटन किया जा चुका है।
यह पार्क भारत सरकार की सहायता से विकसित हो रहा है और आने वाले वर्षों में यह देश की सबसे उन्नत मेडिकल टेक्नोलॉजी हब बनने जा रहा है।
“टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और एजुकेशन का मेल ही भविष्य का समाधान”
विशेष कार्याधिकारी श्री शैलेंद्र भाटिया ने मेडिकल डिवाइसेज़ पार्क की प्रगति और उसकी कॉमन साइंटिफिक फैसिलिटीज़ (CSF) से संबंधित प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने बताया कि पार्क के अंतर्गत विकसित की जा रही इन सुविधाओं का निर्माण दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है, जबकि गामा रेडिएशन सेंटर का निर्माण मई 2027 तक संपन्न होगा।
इस प्रस्तुति के बाद सचिव श्री अमित अग्रवाल ने अत्यंत उत्साह के साथ प्राधिकरण की कार्यप्रणाली की सराहना की और कहा “भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमें ऐसे मेडिकल डिवाइस हब की ज़रूरत है जो तकनीक, नवाचार और शिक्षा का संगम बन सके। इस पार्क को IIT कानपुर जैसी संस्थाओं के सहयोग से जोड़ने से यहां की सोच और नवाचार की गुणवत्ता कई गुना बढ़ेगी।”
उन्होंने आगे कहा कि पार्क में मेडिकल एजुकेशन, टेक्निकल एजुकेशन और टेस्टिंग जैसी अकादमिक शाखाओं को भी जोड़ना चाहिए ताकि एक सम्पूर्ण ‘ईकोसिस्टम ऑफ़ हेल्थ टेक्नोलॉजी’ विकसित हो सके।
“गुणवत्ता और ग्लोबल मानकों पर होगा सख्त फोकस”
सचिव श्री अमित अग्रवाल ने निरीक्षण के दौरान कंसल्टेंट्स को निर्देश दिए कि सभी निर्माण कार्य अंतरराष्ट्रीय मानकों (International Norms) के अनुरूप हों। उन्होंने कहा कि गामा रेडिएशन सेंटर जैसे विशेष तकनीकी प्रोजेक्ट्स में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए, क्योंकि ये देश के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।“हमारी कोशिश यह होनी चाहिए कि जब यह पार्क पूर्ण रूप से क्रियाशील हो, तो भारत न केवल मेडिकल डिवाइस निर्माण में आत्मनिर्भर बने, बल्कि एशिया का सबसे बड़ा निर्यातक भी बने।” — श्री अमित अग्रवाल, सचिव, फार्मास्युटिकल्स विभाग
निर्माण कार्यों की तेज़ रफ़्तार — दिसंबर 2026 का लक्ष्य तय
मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री राकेश कुमार सिंह ने बताया कि पार्क में कॉमन फैसिलिटीज़ जैसे क्वालिटी टेस्टिंग लैब, बायो-कंपैटिबिलिटी सेंटर, सर्टिफिकेशन लैब्स, प्रोटोटाइपिंग ज़ोन, और मेडिकल इनोवेशन हब का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य है कि इस पूरे पार्क को न सिर्फ मेडिकल डिवाइसेज़ के उत्पादन का केंद्र बनाया जाए, बल्कि रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) का भी ग्लोबल सेंटर तैयार किया जाए।
इस पार्क में पहले से ही कई बड़ी कंपनियों ने निवेश की रुचि दिखाई है, जिससे हजारों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने की संभावना है।
“सस्टेनेबल डेवलपमेंट और हरित तकनीक होगी प्राथमिकता”
निरीक्षण के दौरान कॉमन साइंटिफिक फैसिलिटी (CSF) बिल्डिंग के निर्माण स्थलों का भी दौरा किया गया। श्री अग्रवाल ने निर्माण में पर्यावरणीय मानकों के पालन पर विशेष जोर देते हुए कहा कि “हमें ऐसा मॉडल विकसित करना है जो पर्यावरण और उद्योग दोनों के बीच संतुलन बनाए रखे। यह मेडिकल डिवाइसेज़ पार्क भारत के ग्रीन टेक्नोलॉजी मिशन का भी एक प्रतीक बनेगा।” साथ ही उन्होंने पौधारोपण, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम को प्राथमिकता देने के निर्देश भी दिए।
समीक्षा बैठक में शामिल रहे अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधि
इस अवसर पर हुई समीक्षा बैठक में श्री प्रवीण मित्तल (एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर, मेडिकल डिवाइस प्रमोशन काउंसिल),
श्री राजेन्द्र भाटी (जीएम परियोजना),
श्रीमती स्मिता सिंह (एजीएम)
सहित कई उद्योग प्रतिनिधि और प्राधिकरण अधिकारी उपस्थित रहे। कई नामी मेडिकल डिवाइस कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी इस बैठक में भाग लिया और सुझाव दिए कि मेडिकल उपकरणों की ग्लोबल एक्सपोर्ट क्षमता बढ़ाने के लिए एक्सपोर्ट टेस्टिंग सर्टिफिकेशन सेंटर भी स्थापित किया जाए।
“मेडिकल डिवाइसेज़ पार्क बनेगा उत्तर भारत का इनोवेशन सेंटर”
यमुना प्राधिकरण का यह प्रोजेक्ट न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे उत्तर भारत के लिए औद्योगिक प्रगति का प्रतीक बनने जा रहा है। यहां स्थापित होने वाले यूनिट्स में सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट्स, डायग्नोस्टिक किट्स, इम्प्लांटेबल डिवाइसेज़, डिजिटल हेल्थ सॉल्यूशंस और बायोटेक इक्विपमेंट्स का उत्पादन किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पार्क “मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड” की अवधारणा को साकार करेगा और स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
“एक कदम आत्मनिर्भर भारत की दिशा में”
यमुना एक्सप्रेसवे पर तेजी से विकसित होता यह मेडिकल डिवाइसेज़ पार्क भारत की औद्योगिक और वैज्ञानिक क्षमता का जीवंत उदाहरण है।
यह न केवल रोजगार और निवेश के नए अवसर खोलेगा बल्कि भारत को हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में वैश्विक मंच पर स्थापित करेगा।



