RWA Election Alpha News : अल्फा-2 RWA चुनाव बना अखाड़ा, अध्यक्ष और महासचिव आमने-सामने, आरोप-प्रत्यारोप से गरमाया माहौल, ग्रेटर नोएडा में क्यों बढ़ते हैं RWA विवाद?, आरडब्ल्यूए चुनाव पर खिंची तलवार

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
ग्रेटर नोएडा के सेक्टरों में आरडब्ल्यूए (Resident Welfare Association) का चुनाव अक्सर “मूंछ की लड़ाई” बन जाता है। हर बार चुनाव नजदीक आते ही गुटबाजी, आरोप-प्रत्यारोप और टकराव की राजनीति तेज़ हो जाती है। इस बार मामला अल्फा-2 सेक्टर का है, जहां RWA अध्यक्ष और महासचिव आमने-सामने आ गए हैं। दोनों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं और स्थिति विवाद की ओर बढ़ गई है।
अध्यक्ष vs महासचिव – आरडब्ल्यूए चुनाव पर खिंची तलवार
अल्फा-2 सेक्टर के RWA अध्यक्ष संजय कसाना और महासचिव एन.पी. सिंह के बीच तनातनी खुलकर सामने आ गई है। अध्यक्ष का आरोप है कि महासचिव चुनाव कराने से बच रहे हैं। जबकि महासचिव का कहना है कि अध्यक्ष मनमानी करते हुए बिना चर्चा के फैसले ले रहे हैं।
इस टकराव ने सेक्टरवासियों के बीच भी असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।
यह है पूरा विवाद
अध्यक्ष संजय कसाना ने चुनाव कराने के उद्देश्य से 7 सितंबर को आम सभा की बैठक बुलाने का निर्णय लिया। उन्होंने इसकी सूचना सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की। लेकिन अगले ही दिन महासचिव एन.पी. सिंह ने एक मैसेज जारी कर दिया कि यह बैठक उनकी सहमति के बिना बुलाई गई है।
एन.पी. सिंह ने साफ कहा कि अध्यक्ष ने उनसे कोई वार्ता नहीं की और यह कदम एकतरफा निर्णय है। उन्होंने यहां तक लिखा कि 7 सितंबर को वह शहर में ही मौजूद नहीं होंगे, इसलिए बैठक की तिथि बदलनी होगी।
अध्यक्ष का पक्ष : “महासचिव चुनाव नहीं कराना चाहते”
अध्यक्ष संजय कसाना का कहना है कि मौजूदा कार्यकाल 2026 में समाप्त होगा। लेकिन उन्होंने पहले ही घोषणा कर दी थी कि जैसे ही RWA से जुड़ा केस न्यायालय में समाप्त होगा, वे चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ाएंगे।
उनके मुताबिक केस को समाप्त हुए दो माह हो चुके हैं।
अब चुनाव कराने का समय आ गया है और इसी उद्देश्य से उन्होंने आम सभा की बैठक बुलाई। उनका आरोप है कि महासचिव चुनाव कराने से कतरा रहे हैं और लगातार प्रक्रिया को टालने की कोशिश कर रहे हैं।
महासचिव का पलटवार : “अध्यक्ष कर रहे हैं मनमानी”
महासचिव एन.पी. सिंह ने अध्यक्ष के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया। उनका कहना है कि अध्यक्ष ने मनमानी तरीके से फैसला लिया और संगठन की मर्यादा को ठेस पहुंचाई। उन्होंने कहा कि किसी भी आम सभा की बैठक से पहले अध्यक्ष को महासचिव से चर्चा करनी चाहिए थी।
लेकिन अध्यक्ष ने ऐसा नहीं किया और सीधे सोशल मीडिया पर संदेश डाल दिया। सिंह का कहना है कि वे चुनाव कराने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन प्रक्रिया नियम और परामर्श से होनी चाहिए।
समिति के सदस्य बना रहे हैं सेतु
अध्यक्ष और महासचिव के बीच टकराव ने सेक्टर की राजनीति को गर्मा दिया है। स्थिति को संभालने और विवाद को शांत करने के लिए अब समिति के अन्य सदस्य बीच-बचाव में जुट गए हैं। दोनों पक्षों को समझाने की कोशिश की जा रही है। मकसद यह है कि चुनाव की प्रक्रिया में किसी तरह की रुकावट न आए और सेक्टर में सामंजस्य बना रहे।
निवासियों में बढ़ी बेचैनी
सेक्टरवासियों का कहना है कि RWA चुनाव हर बार विवादों में घिर जाता है। एक तरफ लोग चाहते हैं कि साफ-सुथरे और पारदर्शी तरीके से चुनाव हो,
वहीं दूसरी ओर पदाधिकारियों की गुटबाजी आम निवासियों को निराश करती है। कई निवासियों ने कहा कि RWA का मकसद सेक्टर की सुविधाओं और समस्याओं का समाधान होना चाहिए, लेकिन अक्सर यह राजनीतिक टकराव का मैदान बन जाता है।
चुनाव बनेगा निर्णायक
7 सितंबर को प्रस्तावित बैठक अब अधर में लटक गई है, अध्यक्ष चाहते हैं कि इस तिथि पर चुनावी चर्चा हो।
महासचिव ने घोषणा कर दी है कि वे उस दिन उपलब्ध नहीं हैं और जल्द ही नई तिथि घोषित करेंगे। अब देखना यह है कि किसकी बात मानी जाती है और क्या समिति सदस्य बीच का रास्ता निकाल पाते हैं।
आगे क्या?
अध्यक्ष और महासचिव के बीच यह विवाद सेक्टर अल्फा-2 की राजनीति को और दिलचस्प बना रहा है। क्या 7 सितंबर को बैठक होगी या टल जाएगी? क्या समिति सदस्य दोनों नेताओं को एक मंच पर ला पाएंगे? या फिर यह विवाद और गहराएगा और सेक्टरवासी असमंजस में रहेंगे? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिलेंगे।
ग्रेटर नोएडा में क्यों बढ़ते हैं RWA विवाद?
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रेटर नोएडा जैसे विकसित होते शहर में RWA की भूमिका बेहद अहम है। सेक्टरों की देखरेख, सुरक्षा, सफाई और विकास कार्यों की निगरानी RWA पर निर्भर करती है। लेकिन जब पदाधिकारियों में गुटबाजी बढ़ती है तो असली मुद्दे पीछे छूट जाते हैं।
यही कारण है कि हर चुनाव से पहले और बाद में विवादों की स्थिति बन जाती है।



