Noida News : मानवता की मिसाल राष्ट्रीय समाज सेविका अंकिता राजपूत ने फिर बढ़ाया मदद का हाथ, हर दिन बचा रहीं अनगिनत जीवन, थैलेसीमिया मुक्त भारत का संकल्प, रक्तदान: एक संस्कार, एक जन आंदोलन

नोएडा, रफ़्तार टूडे। मानवता की सेवा को ही अपना जीवन समर्पित करने वाली राष्ट्रीय समाज सेविका अंकिता राजपूत एक बार फिर सुर्खियों में हैं। रक्तदान जैसे महादान को लोगों तक पहुँचाने और जरूरतमंद मरीजों की मदद करने का उनका निरंतर प्रयास समाज के लिए प्रेरणा बन चुका है। देश के विभिन्न राज्यों में ब्लड डोनर उपलब्ध कराकर मरीजों की जान बचाने का कार्य उन्होंने अपने कंधों पर उठाया हुआ है।
हर दिन सैकड़ों मरीजों की मदद, 24/7 सेवा में समर्पित
अंकिता राजपूत न सिर्फ नोएडा बल्कि देशभर में अपनी सेवा से लोगों को राहत पहुँचा रही हैं। प्रतिदिन दर्जनों रक्तदान से जुड़े मामलों में वह तुरंत ब्लड डोनर उपलब्ध करवाकर इमरजेंसी में फंसे मरीजों की जान बचाने का कार्य करती हैं।
उनकी टीम के साथ उनका अथक प्रयास 24 घंटे, 7 दिन लगातार जारी रहता है। कई बार रात 2 बजे भी वह मरीजों के लिए डोनर ढूंढते हुए दिख जाती हैं।
उनका मानना है—
“नर सेवा ही नारायण सेवा है।”
थैलेसीमिया मुक्त भारत का संकल्प
अंकिता राजपूत का लक्ष्य सिर्फ रक्तदान तक सीमित नहीं है। वह थैलेसीमिया मुक्त भारत अभियान को भी आगे बढ़ा रही हैं। इसके लिए वह लगातार समाज में जागरूकता फैलाती हैं और लोगों को नियमित रक्तदान करने के लिए प्रेरित करती रहती हैं।
उनका कहना है कि—
“एक यूनिट रक्त किसी की जिंदगी का आधार बन सकता है, इसलिए हर स्वस्थ व्यक्ति को रक्तदान जरूर करना चाहिए।”
समाज में छोड़ रहीं अमिट छाप
अंकिता न सिर्फ व्यक्तिगत स्तर पर सेवा दे रही हैं, बल्कि कई सामाजिक संस्थाओं, संगठनों और स्वयंसेवी समूहों में पदों पर कार्यरत हैं।
फिर भी वह अपने आप को सिर्फ एक साधारण सामाजिक कार्यकर्ता ही मानती हैं।
उनका कहना है—“सेवा करने के लिए पद जरूरी नहीं, दिल में भावना होनी चाहिए।”
उनकी इसी सोच ने उन्हें युवाओं, महिलाओं और समाजसेवियों के बीच एक प्रेरणास्रोत बना दिया है।
मानवता के रक्षक देवदूतों के प्रति आभार
अंकिता राजपूत ने सभी रक्तदाताओं और अपने सहयोगियों का विशेष धन्यवाद किया है, जिनकी मदद से वह लगातार जरूरतमंद मरीजों तक सेवा पहुँचा पाती हैं।
उन्होंने विशेष रूप से इन जीवन रक्षक देवदूतों का उल्लेख किया—
डॉ. कुमार राकेश रंजन, चंदन, विशाल, हर्ष, पवन
ये सभी समाजसेवी ब्लड कैंसर, थैलेसीमिया, किडनी डायलिसिस, बोन मैरो ट्रांसप्लांट और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए रक्त और प्लेटलेट्स दान कर मानवता की मिसाल पेश कर रहे हैं।
रक्तदान: एक संस्कार, एक जन आंदोलन
अंकिता का कहना है कि वे रक्तदान को एक जन आंदोलन बनते देखना चाहती हैं।
उनका संदेश—
“जब तक हर व्यक्ति रक्तदान को अपनी जिम्मेदारी नहीं मानता, तब तक कई जिंदगियां संकट में पड़ती रहेंगी।”
उनका लक्ष्य आने वाले वर्षों में एक ऐसी समाज व्यवस्था तैयार करना है, जहां एक भी मरीज रक्त की कमी से न मरे।



