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Sharda University News : एक और ज़िंदगी बची, उम्मीद ज़िंदा हुई!, वेस्ट अफ्रीका से आई एक युवा महिला, जो कभी धूम्रपान तक नहीं करती थीं, को एडवांस लंग कैंसर ने घेरा, लेकिन शारदा केयर, हेल्थसिटी में हुआ चमत्कारी इलाज


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ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
कभी-कभी ज़िंदगी आपको ऐसी चुनौती देती है, जिसकी आपने कल्पना तक नहीं की होती। ऐसी ही एक असंभव सी लगने वाली लड़ाई लड़ी वेस्ट अफ्रीका के देश बुर्किना फासो की 38 वर्षीय हामा सिसे ने – जो न धूम्रपान करती थीं, न ही कोई विशेष बीमारी की शिकार थीं, फिर भी उन्हें हुआ एडवांस स्टेज लंग कैंसर

लेकिन, जब जीवन की डोर कमजोर लगने लगी थी, तब उन्होंने एक नई उम्मीद पाई भारत के शारदा केयर – हेल्थसिटी, ग्रेटर नोएडा में, जहां उनके लिए एक व्यक्तिगत और सटीक इलाज की योजना बनाई गई – जिसका नतीजा यह हुआ कि आज वे लगभग स्वस्थ हैं, मुस्कुराते हुए ज़िंदगी की ओर वापस लौट रही हैं।


न धुआं, न लक्षण – फिर भी कैंसर ने घेरा

हामा सिसे का केस खास इसलिए भी है क्योंकि उन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया, कोई पारिवारिक इतिहास भी नहीं था, और फिर भी उन्हें एडेनोकार्सिनोमा नामक लंग कैंसर हो गया। डॉक्टरों का कहना है कि यह अब नॉन-स्मोकर्स में भी बहुत तेजी से उभर रहा है – खासतौर पर महिलाओं और युवाओं में

उनकी हालत इतनी बिगड़ गई थी कि उन्हें सांस लेने में बेहद कठिनाई हो रही थी, चलना-फिरना मुश्किल हो गया था, और सामान्य जीवन लगभग ठहर गया था। अपने देश में उन्हें कोई स्पष्ट जांच या इलाज नहीं मिल पाया।


शारदा केयर – हेल्थसिटी: जहां उम्मीद मिली दिशा

भारत पहुंचने के बाद शारदा केयर में उन्हें तुरंत PET स्कैन और अन्य आधुनिक जांचों से गुजारा गया, जहां फेफड़े के ऊपरी बाएं हिस्से में फैले ट्यूमर की पहचान हुई। बायोप्सी से पुष्टि हुई कि यह एडेनोकार्सिनोमा है – एक तेजी से फैलने वाला लंग कैंसर।

इस केस की जटिलता इसलिए भी बढ़ गई क्योंकि ट्यूमर दिल और मुख्य नसों के पास था, जिससे इलाज में भी जोखिम अधिक था। लेकिन शारदा की मल्टीडिसिप्लिनरी टीम ने डर को हिम्मत से बदला।


कीमोथेरेपी + रेडिएशन: संयुक्त हमला कैंसर पर

इलाज के लिए विशेषज्ञों ने एक पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान तैयार किया, जिसमें Gemcitabine और Carboplatin नामक कीमोथेरेपी दवाएं दी गईं। इसके साथ ही रेडिएशन थेरैपी भी शुरू की गई ताकि असर गहरा और तेज़ हो।

डॉ. अनिल ठकवानी, डायरेक्टर – क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी, ने बताया:

“यह केस सामान्य नहीं था – एक युवा, नॉन-स्मोकर महिला और इतनी आक्रामक स्थिति! लेकिन हमारे अनुभव और टीम की सामूहिक योजना ने इसे संभाल लिया। मरीज ने हिम्मत से इलाज को सहा और तीन महीने के भीतर स्कैन में दिखा कि ट्यूमर लगभग गायब हो गया है।”


अगला कदम: इम्यूनोथेरेपी और जीन-बेस्ड इलाज

अब मरीज की हालत स्थिर है और आगे का इलाज इम्यूनोथेरेपी, टारगेटेड थेरेपी और जीन टेस्टिंग पर आधारित होगा। यानी अब इलाज उस जेनेटिक प्रोफाइल के हिसाब से होगा जो कैंसर की जड़ों तक पहुंच सके।

यह न केवल आधुनिक चिकित्सा की ताकत है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह व्यक्तिगत (प्रिसिशन) इलाज अब कैंसर की जटिलताओं से निपट सकता है।


एक वैश्विक मरीज, भारतीय अस्पताल की विजय

ऋषभ गुप्ता, वाइस प्रेसिडेंट – शारदा केयर, ने कहा:

“यह केस हमारे लिए सिर्फ एक इलाज नहीं था, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मरीजों को यह दिखाने का भी अवसर था कि भारत में इलाज कितना प्रभावशाली और संवेदनशील हो सकता है। हमने हर कदम पर मरीज को व्यक्तिगत समर्थन दिया – भाषा, कल्चर, भावनात्मक स्थिति – हर स्तर पर।”


मरीज की ज़ुबानी – ‘जैसे मुझे दूसरी जिंदगी मिल गई’

इलाज पूरा होने के बाद भावुक होते हुए हामा सिसे ने कहा:

“जब मैं भारत आई तो डरी हुई थी… मुझे सांस लेने में तकलीफ थी… लेकिन शारदा की टीम ने मुझे समझाया, मेरा साथ दिया। मैं कभी सोच भी नहीं सकती थी कि बिना स्मोक किए मुझे लंग कैंसर होगा। लेकिन अब मैं ठीक हूं, और यह मेरे लिए दूसरी जिंदगी जैसी है।”


शारदा केयर: आधुनिकता, मानवता और उम्मीद का संगम

शारदा केयर – हेल्थसिटी अब केवल भारत के नहीं, अंतरराष्ट्रीय मरीजों के लिए भी एक प्रमुख कैंसर ट्रीटमेंट डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। यहां उपलब्ध हैं:

  • अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक लैब्स
  • नवीनतम रेडिएशन टेक्नोलॉजी
  • अनुभवी ऑन्कोलॉजिस्ट्स
  • मरीज-केंद्रित पर्सनलाइज्ड प्लानिंग

इसका नतीजा है – सैकड़ों सफल केस, विश्वास और उम्मीद का विस्तार


क्या आप जानते हैं?

एडेनोकार्सिनोमा लंग कैंसर का सबसे सामान्य प्रकार है और अब यह नॉन-स्मोकर्स, युवा महिलाओं और शहरी प्रदूषण-प्रभावित लोगों में तेजी से बढ़ रहा है। इसका प्रारंभिक लक्षण – लगातार खांसी, सांस की तकलीफ या थकान – अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।


World Lung Cancer Day पर संदेश:

“हर सांस कीमती है, हर तकलीफ को हल्के में न लें। समय पर जांच और विशेषज्ञों से परामर्श ही कैंसर जैसी बीमारियों से बचाव की कुंजी है।”


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