Greater Noida West Authority News : खस्ताहाल सड़कें, उफनती बारिश और DFCCIL की मजबूरी!, 130 मीटर रोड की मरम्मत पर ब्रेक, भारी ट्रैफिक के कारण अंडरपास की हालत जस की तस, सिरसा-नोएडा मार्ग पर रोजाना गुजरते हैं लाखों वाहन, बारिश में हाल बेहाल, जवाब में DFCCIL ने की स्थिति साफ

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट से सिरसा की ओर जाने वाले हजारों वाहन चालकों के लिए एक बुरी खबर है। जिस 130 मीटर रोड पर रोजाना लाखों वाहन गुजरते हैं, उसके तिलपता रोटरी से मकोड़ा रोटरी के बीच स्थित अंडरपास की जर्जर सड़कों की मरम्मत फिलहाल नहीं होगी। इसका कारण भारी ट्रैफिक और तकनीकी बाधाएं बताई गई हैं।
यह वही अंडरपास है जहाँ बरसात में न केवल पानी भर जाता है, बल्कि टूटी हुई सड़कों की वजह से दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। जनता की लगातार शिकायतों के बावजूद डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) ने फिलहाल मरम्मत कार्य से हाथ पीछे खींच लिए हैं।
ट्रैफिक की मार और सड़क की हार
DFCCIL के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक रेल ओवरब्रिज (ROB) का निर्माण पूरा नहीं हो जाता, तब तक अंडरपास के हिस्से की रीसरफेसिंग यानी नई सड़क बिछाने का काम संभव नहीं है। भारी वाहनों की आवाजाही और अस्थायी मार्ग होने के चलते सड़क निर्माण बार-बार नुकसान का शिकार हो सकती है।
इसका मतलब यह है कि आने वाले कुछ महीनों तक जनता को उबड़-खाबड़, गड्ढों से भरी और जलभराव वाली सड़कें ही नसीब होंगी।
बरसात में बर्बादी की तस्वीर बनी सड़क
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के निवासी मनीष कुमार ने इस मुद्दे पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने कहा,
“हर साल मानसून आते ही यह अंडरपास पूरी तरह जलमग्न हो जाता है। वाहन चालक घंटों फंसे रहते हैं, और गड्ढों की वजह से कई बार बाइक सवार गिर जाते हैं।“
यह स्थिति सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि दर्जनों गांवों और सेक्टरों को जोड़ने वाले मार्ग पर रोजाना आने-जाने वाले हजारों लोगों की है।
DFCCIL ने बताई अपनी मजबूरी
DFCCIL के महाप्रबंधक संदीप कुमार रविवंशी ने जवाब देते हुए बताया कि –
- 130 मीटर रोड का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
- अंडरपास को केवल अस्थायी वैकल्पिक मार्ग के रूप में खोला गया है।
- डीवाटरिंग पंप लगाकर जलभराव रोकने की कोशिश की जा रही है।
- लेकिन नाली की अनुपस्थिति के कारण पानी फिर से अंदर आ जाता है।
उन्होंने बताया कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण अब नाली निर्माण में जुटा है, जिससे भविष्य में जलभराव से राहत मिल सकती है।
ROB बनते ही होगी मरम्मत – लेकिन कब तक इंतजार?
DFCCIL के अनुसार, मरम्मत तभी होगी जब रेल ओवरब्रिज का निर्माण पूरा हो जाएगा। लेकिन इस ROB के निर्माण की कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई गई, जिससे जनता के सब्र का बांध टूटता दिख रहा है।
लोगों की चिंता यह है कि क्या हर साल मानसून में यही समस्या दोहराई जाएगी? क्या कोई वैकल्पिक मार्ग पूरी तरह तैयार नहीं किया जा सकता?
जनता की बढ़ती बेचैनी, प्रशासन पर सवाल
स्थानीय निवासियों का कहना है कि एक तरफ सरकार स्मार्ट सिटी के सपने दिखा रही है, दूसरी ओर लोगों को एक ठीक-ठाक सड़क तक नहीं मिल पा रही।
विकास की रफ्तार तब ही सार्थक होती है, जब बुनियादी ढांचे – सड़क, जल निकासी, ट्रैफिक मैनेजमेंट – को प्राथमिकता दी जाए।

क्या कहती हैं जमीनी हकीकत?
- ✅ अंडरपास से रोजाना 2 लाख+ वाहन गुजरते हैं
- ✅ बरसात में जलभराव से 3-4 फीट तक पानी भर जाता है
- ✅ टूटी सड़कें दर्जनों हादसों का कारण बन चुकी हैं
- ✅ DFCCIL ने मरम्मत से फिलहाल इनकार किया
- ✅ ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण अब नाली निर्माण में जुटा
नाली का निर्माण प्राधिकरण कर रहा है – कुछ राहत की उम्मीद
DFCCIL ने यह भी जानकारी दी कि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा अब अंडरपास के किनारे ड्रेनेज सिस्टम (नाली) का निर्माण किया जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद जलभराव की समस्या में कुछ हद तक सुधार हो सकता है।
लेकिन जब तक ओवरब्रिज का निर्माण नहीं होता, तब तक कोई स्थायी मरम्मत नहीं की जाएगी। यानी अभी भी जनता को तूफानों के बीच से ही रास्ता बनाना होगा।
जनहित से जुड़ी योजना, लेकिन अधूरी तैयारी बनी तकलीफ का कारण
130 मीटर रोड का यह अंडरपास भले ही वैकल्पिक हो, लेकिन यह इलाके की ट्रैफिक लाइफलाइन बन चुका है। अधूरी योजनाएं, अधूरे निर्माण और लचर व्यवस्थाएं स्थानीय जनता को मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से परेशान कर रही हैं।
रोज़ाना स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर ऑफिस के लिए निकलने वाले पेशेवर तक – सभी इस हालात से नाराज़ और हताश हैं।

निष्कर्ष: सड़क पर सियासत या सच्चाई?
यह मामला सिर्फ एक अंडरपास की मरम्मत का नहीं है, यह प्रशासनिक जिम्मेदारियों और प्राथमिकताओं का परीक्षण है। लाखों लोगों की सुरक्षा, सुविधा और समय का सवाल अब DFCCIL और प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।
अब देखना होगा कि क्या आने वाले महीनों में जनता को कोई स्थायी समाधान मिलेगा या फिर यह अंडरपास यूं ही ‘जल-संकट’ और ‘सड़क संकट’ का प्रतीक बना रहेगा।
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