Noida Authority News : “नोएडा प्राधिकरण में बड़ी कार्रवाई! जन शिकायतों की अनदेखी पर CEO ने गिराई गाज — 8 वरिष्ठ अधिकारियों का वेतन रोका, अब 15 दिन में निपटाने होंगे सभी लंबित केस!”, नोएडा में प्रशासनिक सख्ती का बड़ा उदाहरण—जन शिकायतों में लापरवाही पर CEO डॉ. लोकेश एम का कड़ा प्रहार

नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा प्राधिकरण में जन शिकायतों के निस्तारण को लेकर लापरवाही अब भारी पड़ने लगी है। प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) डॉ. लोकेश एम ने एक अभूतपूर्व, ऐतिहासिक और सख्त कदम उठाते हुए 8 वरिष्ठ अधिकारियों का वेतन रोकने का आदेश जारी कर दिया है।
यह कार्रवाई सीधे तौर पर इंटीग्रेटेड ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम (IGRS) मामलों में लगातार जारी ढिलाई और खराब प्रदर्शन को देखते हुए की गई है।
इस फैसले ने पूरे प्राधिकरण और शहर की प्रशासनिक मशीनरी में बड़ा संदेश दे दिया है कि जनहित सर्वोपरि है, और कोई भी अधिकारी लापरवाही बरतता है तो परिणाम तुरंत भुगतने होंगे।
क्यों लेना पड़ा इतना बड़ा फैसला? – शिकायतें लंबित, चेतावनियाँ अनसुनी
IGRS पोर्टल पर आने वाली शिकायतें नागरिकों की बुनियादी समस्याओं से जुड़ी होती हैं—
ग्रुप हाउसिंग
भूलेख
जलापूर्ति
औद्योगिक क्षेत्र की समस्याएँ
आवासीय भूखंड
सिविल और निर्माण से जुड़ी शिकायतें
इन विभागों में शिकायतें लगातार लंबित थीं, और बार-बार चेतावनी देने के बावजूद संबंधित अधिकारी समय पर समाधान नहीं कर पाए।
कई शिकायतें 12 दिनों से अधिक समय से लंबित थीं, जो IGRS की निर्धारित समय-सीमा के खिलाफ है।
CEO ने कई बार विभागों की समीक्षा बैठकों में सख्त निर्देश दिए थे, लेकिन सुधार नहीं दिखने पर उन्होंने यह कदम उठाया—“वेतन रोकना”, जो अब तक की सबसे कड़ी कार्रवाई मानी जा रही है।
जिन 8 अधिकारियों पर गिरी गाज – विभागवार सूची जारी
CEO द्वारा वेतन रोकने की कार्रवाई जिन अधिकारियों के खिलाफ की गई, उनकी सूची इस प्रकार है—
ग्रुप हाउसिंग विभाग
श्री क्रांति शेखर सिंह, विशेष कार्याधिकारी
भूलेख विभाग
श्री अरविन्द कुमार सिंह, विशेष कार्याधिकारी
सिविल विभाग (महाप्रबंधक वर्ग)
श्री ए.के. अरोड़ा, महाप्रबंधक
श्री एस.पी. सिंह, महाप्रबंधक
जल विभाग
श्री आर.पी. सिंह, महाप्रबंधक
नियोजन विभाग
श्रीमती मीना भार्गव, महाप्रबंधक
औद्योगिक विभाग
श्रीमती प्रिया सिंह, सहायक महाप्रबंधक
आवासीय भूखंड विभाग
श्री संजीव कुमार बेदी, सहायक महाप्रबंधक
इन सभी विभागों को ‘डिफॉल्टर विभाग’ घोषित कर दिया गया है।
CEO डॉ. लोकेश एम का सख्त संदेश: “जनता की शिकायतें हमारी पहली प्राथमिकता”
कार्रवाई के बाद CEO ने स्पष्ट कहा “जनता की शिकायतों के समाधान में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बार-बार निर्देश देने के बावजूद यदि अधिकारी जिम्मेदारी से काम नहीं करेंगे, तो आगे और भी कठोर कदम उठाए जाएंगे।”
उनका यह बयान साफ संकेत देता है कि आने वाले दिनों में प्राधिकरण में जवाबदेही की व्यवस्था और ज्यादा मजबूत होने वाली है।
जनों में खुशी: ‘अब सुधरेगा सिस्टम, बढ़ेगी जवाबदेही’
नोएडा के निवासियों ने इस कार्रवाई का स्वागत किया है।
रहवासियों का कहना है कि—
ग्रुप हाउसिंग में रखरखाव व निर्माण की शिकायतें
जल आपूर्ति में अनियमितता
भूलेख से जुड़े विवाद
भूखंड आवंटन में देरी
सिविल विकास कार्यों में धीमी गति
जैसी समस्याएँ लंबे समय से अनसुलझी पड़ी रहती थीं।
CEO के इस कदम से न केवल अधिकारियों में डर और जवाबदेही की भावना बढ़ेगी, बल्कि जनता की शिकायतों का निस्तारण भी तेज़ी से होगा।
अब 15 दिन की डेडलाइन – 100% निस्तारण का टारगेट
CEO ने सभी विभागों को 15 दिन के भीतर—
सभी लंबित IGRS शिकायतों का
समयबद्ध
गुणवत्तापूर्ण
स्थायी समाधान करने का आदेश दिया है।
इसके साथ ही यह व्यवस्था की गई है कि—
हर सप्ताह CEO स्वयं IGRS मामलों की समीक्षा करेंगे
विभाग प्रमुखों को प्रगति रिपोर्ट देनी होगी
किसी भी लापरवाही पर तुरंत दंडात्मक कार्रवाई होगी
नोएडा प्रशासन का नया रूप – पारदर्शिता + जवाबदेही = बेहतर सेवा
यह कार्रवाई एक बड़े प्रशासनिक परिवर्तन की ओर इशारा कर रही है।
नोएडा जैसे स्मार्ट शहर की दिशा में काम करते हुए प्राधिकरण चाहता है कि—
जनता को समय पर सुविधाएँ मिलें
शिकायत प्रणाली पर भरोसा मजबूत हो
सरकारी सिस्टम में जिम्मेदारी तय हो
भ्रष्टाचार और ढिलाई खत्म हो
लोगों का कहना है कि यह कदम नोएडा प्रशासन की छवि को एक सख्त, पारदर्शी और जवाबदेह संस्था के रूप में स्थापित करेगा।
अगले कदम – क्या अब होगा सिस्टम में सुधार?
विशेषज्ञों का मानना है कि—
वेतन रोकना अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है
भविष्य में कोई अधिकारी शिकायतों की अनदेखी करने से पहले दो बार सोचेगा
IGRS पोर्टल की कार्यक्षमता बढ़ेगी
जनता को लाभ मिलेगा
प्राधिकरण का यह रुख आने वाले समय में शहर की सेवा व्यवस्था को नए स्तर पर ले जा सकता है।
जनता के लिए बड़ी राहत, अधिकारियों पर कसता शिकंजा
CEO डॉ. लोकेश एम की यह कार्रवाई नोएडा प्राधिकरण में एक नया अध्याय जोड़ती है—जहां जिम्मेदारी, समयबद्धता और पारदर्शिता को प्राथमिकता मिलेगी। यह फैसला प्रशासनिक सख्ती का उदाहरण बनकर सामने आया है और निवासियों में उम्मीद जगा रहा है कि आने वाले दिनों में शहर की समस्याओं के समाधान में और तेजी आएगी।



