Dadri Tehsil News : “भ्रामक रिपोर्ट और भूमाफियाओं से मिलीभगत का आरोप, दादरी तहसील के लेखपाल तुषार शर्मा के खिलाफ स्थानांतरण की मांग, इस अधिवक्त ने डीएम को सौंपी शिकायत”, भूमाफियाओं से मिलीभगत का आरोप – अवैध कॉलोनीकरण को बताया ‘राजस्व को नुकसान’, निष्पक्ष लेखपाल की तैनाती से ही संभव है न्यायपूर्ण कार्यवाही”

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। दादरी तहसील के अंतर्गत आने वाले बंबावड़ क्षेत्र में तैनात क्षेत्रीय लेखपाल तुषार शर्मा पर गंभीर आरोप लगाते हुए वरिष्ठ भाजपा कार्यकर्ता एवं पूर्व अध्यक्ष, दादरी बार एसोसिएशन, अधिवक्ता राकेश नागर ने जिलाधिकारी और उप जिलाधिकारी को एक विस्तृत स्थानांतरण प्रार्थना पत्र सौंपा है। इस पत्र में उन्होंने लेखपाल तुषार शर्मा पर भ्रामक रिपोर्ट देने, विपक्षी पक्ष के प्रभाव में आकर कार्य करने और भूमाफियाओं से मिलीभगत कर सरकारी भूमि को नुकसान पहुंचाने के गंभीर आरोप लगाए हैं।
तालाब भूमि पर अतिक्रमण हटाने के नाम पर हुई “कागज़ी कार्रवाई”
राकेश नागर ने बताया कि उन्होंने 18 अक्टूबर 2025 को आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस तहसील दादरी में राजस्व ग्राम कूडीखेड़ा के खसरा संख्या 299-ख (तालाब भूमि) पर अवैध अतिक्रमण हटवाने और मलबा साफ कर तालाब के सौंदर्यीकरण हेतु शिकायत दर्ज कराई थी।
इसके बाद 1 नवंबर को पुनः समाधान दिवस में मामला उठाने पर उप जिलाधिकारी महोदया ने तहसीलदार दादरी और थाना प्रभारी बादलपुर को कार्रवाई के आदेश दिए थे।
थाना बादलपुर के उपनिरीक्षक विशाल शर्मा ने मौके का निरीक्षण भी किया, लेकिन रिपोर्ट आने पर पता चला कि लेखपाल तुषार शर्मा ने अपनी जांच में लिखा कि अतिक्रमण पूरी तरह हटा दिया गया है। जबकि, शिकायतकर्ता का कहना है कि तालाब पर अब भी अवैध मलबा और आंशिक कब्जा बना हुआ है, जिससे गांव के लोगों को जलभराव, गंदगी और संक्रमण की समस्या झेलनी पड़ रही है।
स्थानीय लोगों में नाराज़गी, कहा – “लेखपाल की रिपोर्ट सच्चाई से दूर”
ग्राम कूडीखेड़ा के कई ग्रामीणों ने भी बताया कि तालाब भूमि पर अभी तक साफ-सफाई नहीं कराई गई, और क्षेत्र में मलबा अब भी जमा है। स्थानीय निवासी कहते हैं कि लेखपाल की रिपोर्ट वास्तविकता से मेल नहीं खाती, और प्रशासन को गुमराह करने का प्रयास किया गया है।
भूमाफियाओं से मिलीभगत का आरोप – अवैध कॉलोनीकरण को बताया ‘राजस्व को नुकसान’
राकेश नागर ने अपने प्रार्थना पत्र में दावा किया है कि लेखपाल तुषार शर्मा द्वारा बंबावड़ क्षेत्र में तैनाती के बाद से ही कई राजस्व ग्रामों में भूमाफियाओं के साथ मिलकर अवैध कॉलोनी विकसित कराई जा रही हैं।
उनके अनुसार, यह मिलीभगत राज्य की पशुचर भूमि, चकमार्ग, नाली और सरकारी भूखंडों को क्षति पहुंचा रही है, जिससे शासन को आर्थिक हानि हो रही है और ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है।
“प्रशासनिक मंशा के विपरीत कार्य”, रिपोर्ट में भ्रामक तथ्य
पत्र में आगे कहा गया है कि संपूर्ण समाधान दिवस और जनसुनवाई पोर्टल पर आने वाली शिकायतों पर तुषार शर्मा द्वारा पक्षपातपूर्ण और भ्रामक रिपोर्ट प्रस्तुत की जा रही है, जिससे उच्च अधिकारी भ्रमित हो जाते हैं।
यह कार्यवाही शासनादेशों और जिलाधिकारी/उप जिलाधिकारी की मंशा के विपरीत है, और इससे प्रशासन की छवि जनमानस में धूमिल हो रही है।
“निष्पक्ष लेखपाल की तैनाती से ही संभव है न्यायपूर्ण कार्यवाही”
अधिवक्ता राकेश नागर ने जिलाधिकारी और उप जिलाधिकारी से अनुरोध किया है कि “लेखपाल तुषार शर्मा का स्थानांतरण तत्काल प्रभाव से किसी अन्य तहसील में किया जाए और बंबावड़ क्षेत्र में किसी निष्पक्ष, ईमानदार एवं जनसेवी लेखपाल की तैनाती की जाए, ताकि शासन की मंशा के अनुरूप शिकायतों का निष्पक्ष निस्तारण हो सके।”
उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी भूमि और तालाब जैसी सार्वजनिक संपत्तियों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, और यदि राजस्व कर्मी ही पक्षपात करें तो जनता का भरोसा कमजोर होता है।
प्रशासनिक सूत्र बोले – जांच के बाद होगी कार्रवाई
इस मामले में राजस्व विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि “जिलाधिकारी महोदया ने शिकायत का संज्ञान ले लिया है। मामले की जांच राजस्व निरीक्षक और तहसीलदार स्तर से कराई जाएगी। यदि आरोप सत्य पाए जाते हैं, तो लेखपाल के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।”
गांव में चर्चा का विषय बनी शिकायत – स्थानीयों में जागी उम्मीद
इस शिकायत के बाद ग्राम कूडीखेड़ा और आसपास के ग्रामीणों में उम्मीद जगी है कि अब तालाब भूमि की सफाई और अतिक्रमण हटाने की वास्तविक कार्यवाही होगी। गांव के वरिष्ठ नागरिकों का कहना है कि “अधिवक्ता राकेश नागर ने आवाज उठाकर जनता की पीड़ा को सामने रखा है, अब प्रशासन को निष्पक्षता दिखानी चाहिए।”
न्याय और जनहित की दिशा में उठा कदम
यह प्रकरण सिर्फ एक लेखपाल के खिलाफ कार्रवाई का मामला नहीं है, बल्कि यह सवाल उठाता है कि स्थानीय स्तर पर सरकारी योजनाओं और शिकायत निस्तारण की वास्तविकता क्या है? यदि जांच निष्पक्ष हुई और दोष सिद्ध हुआ, तो यह मामला पूरे जिले में राजस्व विभाग की पारदर्शिता की कसौटी साबित हो सकता है।



