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Breaking News : “जेवर एयरपोर्ट विस्तार का बड़ा अपडेट, 14 गांवों के किसानों को मिलेगा मुआवजा, डीएम मेधा रूपम ने बनाया ‘गांव-गांव कैंप प्लान’!”, “1838 हेक्टेयर जमीन, “3 अप्रैल से गांव-गांव कैंप”—अब किसानों को नहीं लगानी पड़ेगी चक्कर, “कागजी प्रक्रिया से भुगतान तक”—वन-स्टॉप सॉल्यूशन मॉडल

जेवर/ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के तेजी से बढ़ते दायरे के बीच अब प्रभावित किसानों के लिए राहत की बड़ी खबर सामने आई है। एयरपोर्ट विस्तार परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को मुआवजा वितरण की प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने ठोस कदम उठाए हैं। इस संबंध में जिलाधिकारी मेधा रूपम ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।


“1838 हेक्टेयर जमीन, 14 गांव—अब मुआवजा सीधे प्रक्रिया में
प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, जेवर तहसील के 14 गांवों की कुल 1838.4176 हेक्टेयर भूमि एयरपोर्ट विस्तार के लिए अधिग्रहित की गई है। इस अधिग्रहण से प्रभावित किसानों को उनका प्रतिकर (मुआवजा) समय पर और बिना किसी जटिलता के मिल सके, इसके लिए प्रशासन ने एक स्ट्रक्चर्ड कैंप सिस्टम लागू करने का फैसला किया है।
डीएम मेधा रूपम ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी, तेज और किसान-केंद्रित होनी चाहिए, ताकि किसी भी स्तर पर शिकायत की गुंजाइश न रहे।

“3 अप्रैल से गांव-गांव कैंप”—अब किसानों को नहीं लगानी पड़ेगी चक्कर
प्रशासन ने किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 3 अप्रैल 2026 से प्रत्येक प्रभावित गांव में कैंप लगाने का निर्णय लिया है। इन कैंपों में किसान अपनी भूमि से संबंधित दस्तावेज जमा कर सकेंगे और मुआवजा प्रक्रिया की सभी औपचारिकताएं वहीं पूरी की जाएंगी।
यह कैंप ग्राम थोरा, बंकापुर, नीमका शाहजहांपुर, अहमदपुर चौरोली, ख्वाजपुर, रामनेर, किशोरपुर, बनवारीबांस, पारोही, रोही, मुकीमपुर शिवारा, जेवर बांगर, साबोता मुस्तफाबाद और दयानतपुर सहित सभी प्रभावित गांवों में लगाए जाएंगे।
हर कैंप में राजस्व विभाग की टीम—राजस्व निरीक्षक, लेखपाल और अमीन—तैनात रहेंगे, जो मौके पर ही दस्तावेजों की जांच और प्रक्रिया पूरी करेंगे।


“कागजी प्रक्रिया से भुगतान तक”—वन-स्टॉप सॉल्यूशन मॉडल
इन कैंपों के माध्यम से किसानों से प्रतिकर प्रपत्र प्राप्त किए जाएंगे और उनकी पत्रावली तैयार की जाएगी। साथ ही, भूमि अधिग्रहण से संबंधित सभी आवश्यक औपचारिकताओं को एक ही स्थान पर पूरा करने की सुविधा दी जाएगी। डीएम मेधा रूपम ने तहसीलदार जेवर को इन सभी कैंपों का प्रभारी नियुक्त किया है, ताकि कार्य में समन्वय और निगरानी बनी रहे।
इस कदम को प्रशासन का “डोर-स्टेप गवर्नेंस मॉडल” भी कहा जा रहा है, जिसमें लोगों को दफ्तरों के चक्कर लगाने के बजाय सुविधा उनके गांव में ही दी जा रही है।

“किसानों से अपील—कैंप में पहुंचकर पूरी करें प्रक्रिया”
जिलाधिकारी ने सभी प्रभावित किसानों से अपील की है कि वे अपने-अपने गांव में आयोजित होने वाले कैंपों में अनिवार्य रूप से उपस्थित होकर मुआवजा से संबंधित सभी औपचारिकताएं पूरी करें। उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया इस तरह से तैयार की गई है कि हर पात्र किसान को समय पर और बिना किसी बाधा के उसका हक मिल सके।


“एयरपोर्ट विस्तार और विकास की रफ्तार”
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का विस्तार न केवल क्षेत्रीय विकास को गति देगा, बल्कि यह पूरे उत्तर प्रदेश और एनसीआर के लिए एक बड़ा आर्थिक इंजन साबित होगा।
हालांकि, भूमि अधिग्रहण जैसी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और किसानों के हितों का संरक्षण सबसे महत्वपूर्ण पहलू होता है। ऐसे में प्रशासन का यह कदम किसानों के विश्वास को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।


बैठक में रहे वरिष्ठ अधिकारी मौजूद
इस महत्वपूर्ण बैठक में अपर जिलाधिकारी बच्चू सिंह, अपर जिलाधिकारी अतुल कुमार, उप जिलाधिकारी जेवर दुर्गेश सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारी भी मौजूद रहे। सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे इस कार्य को समयबद्ध और निष्पक्ष तरीके से पूरा करें।


विकास और विश्वास—दोनों पर फोकस”
जेवर एयरपोर्ट विस्तार परियोजना के बीच प्रशासन का यह कदम यह दर्शाता है कि विकास के साथ-साथ किसानों के अधिकारों और हितों का भी पूरा ध्यान रखा जा रहा है।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि यह कैंप सिस्टम जमीन पर कितनी तेजी और पारदर्शिता के साथ लागू होता है और किसानों को उनका मुआवजा कितनी जल्दी मिलता है।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

Raftar Today
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