CM Yogi On Orginazation News : सीएम योगी के स्वागत में दिखी बीजेपी की अंदरूनी गुटबाजी!, जेवर एयरपोर्ट निरीक्षण के दौरान पदाधिकारियों में खींचतान, कई नेताओं को लकी ड्रॉ की तरह ‘लिस्ट से हटाया गया’, स्वागत कार्यक्रम में ‘सूची विवाद’ से मचा सियासी हड़कंप, विधायक और जिला पंचायत अध्यक्ष कार्यकर्ताओं का सियासी हड़कंप, “एकता की जरूरत, मतभेदों पर लगाम जरूरी”
“एकता की जरूरत, मतभेदों पर लगाम जरूरी”, लकी ड्रॉ’ की तरह नामों की लिस्ट बदली गई – कार्यकर्ताओं का तंज, “सूचना न देने” से बढ़ी नाराज़गी, कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा और प्रोटोकॉल का हवाला

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। गौतमबुद्ध नगर ज़िले की राजनीति में शनिवार को उस समय हलचल मच गई जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान भाजपा के भीतर गुटबाजी खुलकर सामने आ गई।
मुख्यमंत्री के स्वागत को लेकर तैयार की गई सूची में आखिरी समय पर कई स्थानीय नेताओं और पार्टी पदाधिकारियों के नाम बदल दिए गए। बताया गया कि इससे कई पुराने कार्यकर्ताओं को हेलिपैड पर पहुंचने और मुख्यमंत्री से मिलने का मौका नहीं मिला।
हेलिपैड पर मचा घमासान – “नाम काटे जाने” से भड़के कार्यकर्ता
सूत्रों के मुताबिक, हेलिपैड पर मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए जिन पार्टी पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को बुलाया गया था, उनकी सूची अंतिम समय में संशोधित कर दी गई।
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली नेताओं ने अपने गुट के लोगों को शामिल करवाने के लिए नामों में फेरबदल कराया। इस बदलाव के चलते जेवर और दादरी के कई प्रमुख भाजपा कार्यकर्ताओं को कार्यक्रम स्थल से दूर रहना पड़ा।
महिला प्रतिनिधि ने लगाया आरोप – “हमारे नाम जानबूझकर हटाए गए”
एक महिला जनप्रतिनिधि ने बताया कि उनका नाम पहले मुख्यमंत्री के स्वागत दल में शामिल था, लेकिन अचानक सूची से हटा दिया गया। उन्होंने कहा, “यह केवल व्यक्तिगत राजनीति का परिणाम है। हम लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन जब मुख्यमंत्री आते हैं तो हमें ही पीछे कर दिया जाता है।”
उन्होंने इसे कार्यकर्ताओं के मनोबल पर आघात बताया और कहा कि यह रवैया संगठन को कमजोर करता है।
डीएम और सिटी मजिस्ट्रेट बने विवाद के केंद्र
मामला बढ़ता देख ज़िला प्रशासन के अधिकारियों को भी सफाई देनी पड़ी। सूत्रों के मुताबिक, सीएम के आगमन से ठीक पहले जिला पंचायत अध्यक्ष को भी सूचना नहीं दी गई, जिससे स्थिति और पेचीदा हो गई। मुख्यमंत्री के स्वागत से जुड़ी सारी व्यवस्था की ज़िम्मेदारी सिटी मजिस्ट्रेट को दी गई थी। हालांकि, बाद में जिला प्रशासन ने सफाई देते हुए कहा कि “कार्यक्रम की सूची में बदलाव केवल प्रोटोकॉल कारणों से हुआ है, किसी को जानबूझकर बाहर नहीं किया गया।”
जिलाध्यक्ष ने दी शिकायत – ‘अंदरुनी राजनीति से कार्यकर्ता नाराज़’
बीजेपी जिला अध्यक्ष के पास यह मामला पहुँचा। कई कार्यकर्ताओं ने शिकायत करते हुए कहा कि उन्हें हेलिपैड के भीतर प्रवेश की अनुमति नहीं मिली। जिला अध्यक्ष ने ज़िलाधिकारी से मुलाकात की और कहा कि इस तरह की घटनाएं पार्टी की एकता को प्रभावित कर सकती हैं।
उनका कहना था कि मुख्यमंत्री के स्वागत जैसे बड़े कार्यक्रम में संगठन के हर स्तर के कार्यकर्ता को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए था।
वरिष्ठ नेताओं में नाराज़गी – “कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करना गलत”
जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह, दादरी विधायक तेजपाल नागर, पूर्व मंत्री नरेंद्र भाटी तक यह चर्चा पहुँची। कई वरिष्ठ नेताओं ने इस पर असंतोष व्यक्त किया कि जिला इकाई ने अंतिम क्षणों में नामों की सूची में बदलाव किया।
सूत्रों के मुताबिक, कुछ नेताओं ने तो यहां तक कहा कि “यह केवल स्वागत कार्यक्रम नहीं, बल्कि गुटबाजी का प्रदर्शन बन गया।”
बीजेपी के अंदर गुटबाज़ी ने फिर दिखाई झलक
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि गौतमबुद्ध नगर बीजेपी में गुटबाज़ी कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार मुख्यमंत्री के स्वागत जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर उसका असर दिखना चिंताजनक है।
जेवर एयरपोर्ट, जो कि उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी विकास परियोजनाओं में से एक है, उसके निरीक्षण जैसे अवसर पर यदि संगठन एकजुट नहीं दिखता, तो यह पार्टी के लिए संदेशात्मक रूप से नकारात्मक है।
कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा और प्रोटोकॉल का हवाला
दूसरी ओर प्रशासन ने इस पूरे विवाद पर कहा कि सुरक्षा कारणों और वीआईपी प्रोटोकॉल के तहत केवल सीमित संख्या में लोगों को ही हेलिपैड क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति थी।
सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि “सूची में नामों का बदलाव सुरक्षा एजेंसियों की सिफारिश पर किया गया था, इसमें किसी प्रकार की राजनीतिक मंशा नहीं थी।” हालांकि, स्थानीय कार्यकर्ता इस तर्क को स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।
“सूचना न देने” से बढ़ी नाराज़गी
कुछ पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें कार्यक्रम की सूचना ही नहीं दी गई।
यहां तक कि जिला पंचायत अध्यक्ष को भी मुख्यमंत्री के आगमन की जानकारी समय पर नहीं दी गई, जिससे उन्हें कार्यक्रम से बाहर रहना पड़ा।
इस घटना के बाद पार्टी के भीतर समन्वय की कमी पर कई सवाल उठने लगे हैं।
‘लकी ड्रॉ’ की तरह नामों की लिस्ट बदली गई – कार्यकर्ताओं का तंज
कार्यकर्ताओं ने व्यंग्य करते हुए कहा कि “नामों की लिस्ट तो जैसे लकी ड्रॉ की तरह बदली गई। किसी को पता नहीं था कि किसका नाम रहेगा और किसका कट जाएगा।” कई लोगों ने इसे पार्टी के भीतर बढ़ती व्यक्तिगत राजनीति का नतीजा बताया।
समीक्षा बैठक की मांग
सूत्रों के अनुसार, भाजपा संगठन के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारी इस पूरे घटनाक्रम की समीक्षा कराने की मांग उठा रहे हैं।
उनका कहना है कि “यदि भविष्य में मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री का दौरा होता है, तो प्रोटोकॉल सूची पहले से फाइनल हो और सभी को समान अवसर मिले।”
मुख्यमंत्री का कार्यक्रम रहा सफल, लेकिन संगठन में उठे सवाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जेवर एयरपोर्ट के निर्माण कार्य का गहन निरीक्षण किया और अधिकारियों को कई दिशा-निर्देश दिए।
हालांकि कार्यक्रम प्रशासनिक रूप से सफल रहा, लेकिन राजनीतिक तौर पर भाजपा के अंदर की गुटबाजी ने एक बार फिर चर्चा का विषय बना दिया।
“एकता की जरूरत, मतभेदों पर लगाम जरूरी”
इस पूरे विवाद ने साफ कर दिया कि जेवर जैसे बड़े प्रोजेक्ट के क्षेत्र में राजनीतिक समरसता और संगठनात्मक एकजुटता बेहद जरूरी है। बीजेपी की स्थानीय इकाई को अब यह तय करना होगा कि आने वाले समय में ऐसे कार्यक्रमों में आंतरिक मतभेदों को सार्वजनिक न होने दिया जाए।
क्योंकि एक ओर मुख्यमंत्री विकास की गति को नई ऊंचाई पर ले जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कार्यकर्ताओं के बीच गुटबाज़ी जैसी घटनाएं उस मिशन को कमजोर करती हैं।



