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Corruption Free India News : 1857 की क्रांति के अमर शहीद दरियाव सिंह नागर की याद में हो पुस्तकालय निर्माण!, करप्शन फ्री इंडिया संगठन ने उठाई ऐतिहासिक मांग, कहा “वीरता की विरासत को जीवंत रखने की है ज़रूरत”, एडीएम को सौंपा गया जिलाधिकारी के नाम ज्ञापन

दनकौर (गौतम बुद्ध नगर), रफ़्तार टुडे।


1857 की क्रांति के अग्रदूत शहीद दरियाव सिंह नागर की स्मृति में बने पुस्तकालय – करप्शन फ्री इंडिया संगठन की जिलाधिकारी से मांग


देश की आज़ादी के पहले स्वतंत्रता संग्राम – 1857 की क्रांति – में अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीद गुर्जर दरियाव सिंह नागर को आज भी वह सम्मान नहीं मिल पाया है, जिसके वे वास्तविक हकदार हैं। इसी ऐतिहासिक विस्मरण को खत्म करने और युवा पीढ़ी को उनके बलिदान से जोड़ने के उद्देश्य से करप्शन फ्री इंडिया संगठन ने शहीद की स्मृति में एक पुस्तकालय निर्माण की मांग की है।


एडीएम को सौंपा गया जिलाधिकारी के नाम ज्ञापन

शुक्रवार को संगठन के कार्यकर्ता एडीएम प्रशासन श्री मंगलेश दुबे से मिले और उन्हें जिलाधिकारी के नाम एक गंभीर ज्ञापन सौंपा, जिसमें जुनेदपुर गांव के वीर सपूत के नाम पर पुस्तकालय की मांग की गई।

करप्शन फ्री इंडिया के संस्थापक चौधरी प्रवीण भारतीय और मास्टर दिनेश नागर ने संयुक्त रूप से बताया:

शहीद दरियाव सिंह नागर को ब्रिटिश हुकूमत ने बुलंदशहर के काले आम पर फांसी दी थी। लेकिन आज के बच्चे और युवा उनकी शौर्यगाथा से अपरिचित हैं। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे इतिहास के ऐसे महान सेनानी गुमनामी के अंधेरे में खो गए हैं।”


शिक्षा से जुड़े यश को अमर बनाएगी यह लाइब्रेरी

ज्ञापन में ज़ोर देते हुए कहा गया है कि:

शिक्षा और जागरूकता किसी भी समाज के उत्थान की नींव है। अगर शहीद दरियाव सिंह नागर के नाम से एक आधुनिक पुस्तकालय का निर्माण कराया जाए तो यह वीरता, बलिदान और राष्ट्रप्रेम को जीवित रखने का सशक्त माध्यम बनेगा।”

प्रवीण भारतीय ने यह भी कहा कि यह पुस्तकालय न केवल ज्ञान का केंद्र होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगा कि कैसे एक किसान परिवार का बेटा अंग्रेजों से लोहा लेकर अमर शहीद बना।


कौन थे शहीद दरियाव सिंह नागर? — एक ऐतिहासिक झलक

  • जुनेदपुर गांव (दनकौर क्षेत्र) के मूल निवासी
  • 1857 की क्रांति में अग्रणी भूमिका निभाई
  • ब्रिटिश हुकूमत ने फांसी पर लटकाया, स्थान: बुलंदशहर का ‘काला आम’
  • गुमनाम नायक जिनका योगदान इतिहास की पुस्तकों में भी बहुत कम दर्ज है

संगठन की अपील — ‘वीरता की विरासत सहेजनी है’

करप्शन फ्री इंडिया संगठन का मानना है कि यदि समय रहते स्थानीय प्रशासन व राज्य सरकार ने इस पर संज्ञान नहीं लिया, तो इतिहास के ये स्वर्णिम पन्ने युवाओं की स्मृति से मिटते जाएंगे।

संगठन ने मांग की है कि:

  1. शहीद दरियाव सिंह नागर की जीवनी पर आधारित साहित्य पुस्तकालय में शामिल किया जाए।
  2. स्कूल-कॉलेज स्तर पर व्याख्यान और संगोष्ठियां आयोजित हों।
  3. पुस्तकालय में डिजिटल सामग्री और आधुनिक तकनीक से सुसज्जित अध्ययन केंद्र बनाया जाए।

प्रशासन से अपेक्षा — जल्द हो सकारात्मक निर्णय

एडीएम प्रशासन मंगलेश दुबे ने ज्ञापन प्राप्त कर शांतिपूर्वक विचार और अग्रेषण का भरोसा दिलाया है। संगठन को आशा है कि यह मांग जल्द ही वास्तविकता का रूप लेगी और जुनेदपुर गांव को उत्तर भारत के वीरता-स्मृति स्थल के रूप में नई पहचान मिलेगी।


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