Llyod College News : “क्लासरूम से निकलकर बनेंगे करोड़ों के क्रिएटर!”, लॉयड इन्क्यूबेशन ने मचाया स्टार्टअप जगत में धमाका, सिर्फ 1 साल में 56+ स्टार्टअप्स तैयार, ₹2.5 करोड़ की ग्रांट से ग्रेटर नोएडा बना इनोवेशन का नया ‘स्टार्टअप हब’, AI से लेकर हेल्थ-टेक तक… युवाओं के आइडिया बन रहे करोड़ों के अवसर

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। जहां एक तरफ देशभर के युवा नौकरी की तलाश में भटक रहे हैं, वहीं ग्रेटर नोएडा का एक शिक्षण संस्थान युवाओं को “जॉब सीकर” नहीं बल्कि “जॉब क्रिएटर” बनाने में जुटा है। लॉयड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के अंतर्गत संचालित लॉयड इन्क्यूबेशन (LTBIF) ने स्टार्टअप और नवाचार की दुनिया में ऐसा रिकॉर्ड बनाया है, जिसने पूरे शिक्षा जगत और उद्योग क्षेत्र का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। महज एक वर्ष के भीतर 56 से अधिक स्टार्टअप्स को इन्क्यूबेट और पंजीकृत कर लॉयड इन्क्यूबेशन ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही मार्गदर्शन, संसाधन और विजन मिले तो भारत का युवा दुनिया बदलने की ताकत रखता है।
सबसे खास बात यह है कि इन स्टार्टअप्स को केवल कागज़ों तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि उन्हें तकनीकी सहायता, बिजनेस डेवलपमेंट, मेंटरशिप, लाइव प्रोजेक्ट्स और निवेशकों तक पहुंच जैसी सुविधाएं देकर एक मजबूत उद्यम में बदलने का प्रयास किया जा रहा है। यही वजह है कि आज लॉयड इन्क्यूबेशन को ग्रेटर नोएडा ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के उभरते स्टार्टअप इकोसिस्टम का मजबूत केंद्र माना जाने लगा है।
AI से लेकर हेल्थ-टेक तक… युवाओं के आइडिया बन रहे करोड़ों के अवसर
लॉयड इन्क्यूबेशन के अंतर्गत विकसित हो रहे अधिकांश स्टार्टअप्स आधुनिक तकनीकों पर आधारित हैं। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), हेल्थ-टेक, एग्री-टेक, एड-टेक, डिजिटल सॉल्यूशंस और टेक्नोलॉजी आधारित कई इनोवेटिव मॉडल शामिल हैं। ये स्टार्टअप्स केवल व्यापारिक लाभ के लिए नहीं बल्कि समाज की वास्तविक समस्याओं को हल करने के उद्देश्य से काम कर रहे हैं।
कहीं किसान की खेती को स्मार्ट तकनीक से जोड़ने का प्रयास हो रहा है, तो कहीं स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से मजबूत किया जा रहा है। कुछ स्टार्टअप्स शिक्षा को और अधिक सुलभ बनाने पर काम कर रहे हैं, जबकि कई युवा डिजिटल टेक्नोलॉजी के माध्यम से छोटे व्यापारियों को नई दिशा देने में जुटे हैं।
2023 में शुरुआत… 2025 तक बना स्टार्टअप पावरहाउस
वर्ष 2023 में धारा-8 कंपनी के रूप में शुरू हुआ लॉयड इन्क्यूबेशन आज स्टार्टअप जगत का बड़ा नाम बन चुका है। वर्ष 2024 में इसे MSME द्वारा मान्यता प्राप्त इन्क्यूबेशन सेंटर का दर्जा मिला, जबकि वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति के तहत इसे आधिकारिक इन्क्यूबेटर के रूप में मान्यता प्रदान की गई। 20 अप्रैल 2025 को पहले स्टार्टअप के इन्क्यूबेशन से शुरू हुई यात्रा अब 56 से अधिक स्टार्टअप्स तक पहुंच चुकी है। यह उपलब्धि केवल संख्या नहीं, बल्कि युवाओं की बदलती सोच और भारत में उभरती उद्यमिता क्रांति का प्रतीक मानी जा रही है।
₹2.5 करोड़ की ग्रांट ने बढ़ाई ताकत, बनेगा हाईटेक इन्क्यूबेशन विंग
कार्यक्रम के दौरान डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) एवं लॉयड इन्क्यूबेशन के मेंटर डॉ. एस.पी. द्विवेदी ने बताया कि उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति के अंतर्गत लॉयड इन्क्यूबेशन को ₹2.5 करोड़ की बड़ी ग्रांट प्राप्त हुई है। इस राशि से अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस नया इन्क्यूबेशन विंग तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा संस्थान को MSME हैकाथॉन के तहत ₹40 लाख और विभिन्न स्टार्टअप योजनाओं के अंतर्गत ₹37.5 लाख की अतिरिक्त स्वीकृतियां भी मिली हैं। इन संसाधनों की मदद से युवा उद्यमियों को बेहतर तकनीकी सहयोग, निवेशकों तक पहुंच, बिजनेस मॉडलिंग और उद्योग विशेषज्ञों का मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।
“हम नौकरी खोजने वाले नहीं, रोजगार देने वाले युवा तैयार कर रहे”
लॉयड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस की ग्रुप डायरेक्टर डॉ. वंदना अरोड़ा सेठी ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं बल्कि ऐसे नेतृत्वकर्ताओं और नवाचारकर्ताओं को तैयार करना है जो समाज और उद्योग की वास्तविक चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत कर सकें।
उन्होंने कहा—“भारत का भविष्य नवाचार, उद्यमिता और युवाओं की समस्या-समाधान क्षमता से तय होगा। हम ऐसा इकोसिस्टम बना रहे हैं जहां एक छोटा विचार भी सही मार्गदर्शन और संसाधनों के जरिए सफल कंपनी बन सके।”
छात्रों को मिल रहे लाइव प्रोजेक्ट्स और इंडस्ट्री एक्सपीरियंस
लॉयड इन्क्यूबेशन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां पढ़ने वाले छात्र केवल किताबों तक सीमित नहीं रहते। इन्क्यूबेटेड स्टार्टअप्स के जरिए प्रौद्योगिकी, प्रबंधन और फार्मेसी के छात्रों को— लाइव प्रोजेक्ट्स, इंडस्ट्री इंटर्नशिप
मेंटरशिप, बिजनेस डेवलपमेंट एक्सपीरियंस, स्टार्टअप कल्चर जैसे अवसर मिल रहे हैं। इससे छात्रों में समस्या समाधान की क्षमता और उद्यमशीलता कौशल तेजी से विकसित हो रहा है।
ग्रेटर नोएडा बन रहा ‘स्टार्टअप कैपिटल’
विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा अब केवल शिक्षा और रियल एस्टेट हब नहीं रहे, बल्कि तेजी से स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी इनोवेशन सेंटर के रूप में उभर रहे हैं। लॉयड इन्क्यूबेशन जैसी पहलें इस बदलाव को और गति दे रही हैं। डॉ. रिपुदमन गौर, डीन लॉयड बिजनेस स्कूल ने कहा— “भारत के युवाओं में अपार क्षमता है। जरूरत सिर्फ ऐसे मंच की है जो उनके विचारों को अवसर और अवसरों को सफल उद्यम में बदल सके।”
आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत की दिशा में बड़ा कदम
लॉयड इन्क्यूबेशन की सफलता इस बात का प्रमाण है कि अगर युवाओं को सही दिशा, संसाधन और नीतिगत समर्थन मिले तो वे देश की अर्थव्यवस्था और समाज दोनों में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। महज एक साल में 56 से अधिक स्टार्टअप्स का इन्क्यूबेशन न केवल संस्थान की उपलब्धि है, बल्कि यह “आत्मनिर्भर भारत” और “विकसित भारत” के सपने को साकार करने की दिशा में भी मजबूत कदम माना जा रहा है।



