Breaking News : “प्यार, प्रॉपर्टी या खूनी साज़िश?”… नोएडा के चर्चित आईवी काउंटी हत्याकांड में बड़ा मोड़, आरोपी प्रिया सिंह की जमानत खारिज, कोर्ट बोला—‘गंभीर अपराध में राहत नहीं’, नोएडा में मचा था हड़कंप, हाईप्रोफाइल सोसाइटी में हुई थी वारदात, वादी पक्ष बोला—“दोषियों को सख्त सजा दिलाकर रहेंगे”
दिनदहाड़े गोलीकांड से दहला था नोएडा, प्रॉपर्टी कारोबारी साहिल सिंघल की हत्या मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला, पीड़ित परिवार बोला—‘अब न्याय की उम्मीद और मजबूत’

नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा के सेक्टर-75 स्थित हाईप्रोफाइल आईवी काउंटी सोसाइटी में हुए चर्चित साहिल सिंघल हत्याकांड मामले में अदालत से एक बड़ा और अहम फैसला सामने आया है। इस सनसनीखेज मामले में आरोपी प्रिया सिंह की जमानत याचिका को गौतमबुद्धनगर की माननीय अपर सत्र न्यायाधीश (त्वरित न्यायालय द्वितीय) ने खारिज कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले के बाद जहां पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली है, वहीं पूरे मामले ने एक बार फिर नोएडा की हाईराइज सोसाइटियों की सुरक्षा व्यवस्था और बढ़ते आपराधिक विवादों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह वही मामला है जिसने कुछ समय पहले पूरे नोएडा को झकझोर कर रख दिया था। दिनदहाड़े एक पॉश सोसाइटी के मार्केट एरिया में प्रॉपर्टी कारोबारी साहिल सिंघल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना इतनी अचानक और भयावह थी कि मौके पर मौजूद लोग दहशत में आ गए थे। इस वारदात की गूंज नोएडा से लेकर पूरे एनसीआर तक सुनाई दी थी।
“बात करने के बहाने बुलाया और फिर बरसाईं गोलियां” — वादी पक्ष का बड़ा दावा
वादी पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता एडवोकेट कपिल शर्मा ने अदालत में कहा कि यह कोई सामान्य झगड़ा या अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि पूरी तरह से सुनियोजित और गंभीर अपराध था। उन्होंने अदालत को बताया कि घटना वाले दिन आरोपी प्रिया सिंह ने पहले साहिल सिंघल और उनकी पत्नी को बातचीत करने के बहाने नीचे बुलाया था। वादी पक्ष के अनुसार, जैसे ही साहिल सिंघल नीचे पहुंचे, वहां पहले से मौजूद आरोपी पक्ष के लोगों ने मिलकर हमला कर दिया। आरोप है कि प्रिया सिंह और उसके भाइयों ने एक राय होकर साहिल सिंघल पर गोलियां चलाईं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। सबसे दर्दनाक बात यह रही कि यह पूरी घटना मृतक की पत्नी की आंखों के सामने हुई।
कोर्ट ने माना—अपराध गंभीर, जमानत का आधार नहीं
माननीय न्यायालय ने मामले में प्रस्तुत केस डायरी, परिस्थितिजन्य साक्ष्य, गवाहों के बयान और घटना की गंभीरता को देखते हुए साफ कहा कि आरोपी को जमानत देने का पर्याप्त आधार नहीं बनता है। अदालत ने माना कि प्रथम दृष्टया आरोपी पक्ष की भूमिका गंभीर दिखाई देती है और ऐसे मामलों में जल्द राहत देना न्यायहित में उचित नहीं होगा। कोर्ट के इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए एक बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है। वादी पक्ष का कहना है कि यह फैसला न्याय प्रक्रिया में लोगों का भरोसा मजबूत करेगा।
नोएडा में मचा था हड़कंप, हाईप्रोफाइल सोसाइटी में हुई थी वारदात
आईवी काउंटी हत्याकांड ने उस समय पूरे शहर को हिलाकर रख दिया था। पॉश और सुरक्षित मानी जाने वाली सोसाइटियों में रहने वाले लोग भी इस घटना के बाद खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे थे। सोशल मीडिया पर घटना को लेकर लगातार चर्चाएं होती रहीं और लोगों ने सवाल उठाया कि यदि हाई सिक्योरिटी अपार्टमेंट में भी दिनदहाड़े गोलीबारी हो सकती है तो आम नागरिक आखिर कितना सुरक्षित है।
वादी पक्ष बोला—“दोषियों को सख्त सजा दिलाकर रहेंगे”
वादी पक्ष के अधिवक्ता एडवोकेट कपिल शर्मा ने कहा कि अदालत द्वारा जमानत याचिका खारिज किया जाना न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि—
“हम पूरी मजबूती के साथ न्यायालय में पैरवी करेंगे। हमारा उद्देश्य है कि मृतक परिवार को न्याय मिले और दोषियों को कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए।”
उन्होंने यह भी कहा कि मामले में मौजूद साक्ष्य बेहद महत्वपूर्ण हैं और जांच एजेंसियों ने जो तथ्य जुटाए हैं, वे आरोपी पक्ष की भूमिका को स्पष्ट करते हैं।
हाईराइज सोसाइटियों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस घटना के बाद एक बार फिर नोएडा और ग्रेटर नोएडा की हाईराइज सोसाइटियों की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस तेज हो गई है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि—
क्या सोसाइटी सिक्योरिटी सिस्टम पर्याप्त है?
क्या विजिटर और हथियारों की जांच प्रभावी तरीके से हो रही है?
क्या निजी विवाद अब खुलेआम हिंसक रूप लेने लगे हैं?
अब आगे क्या?
कानूनी जानकारों के अनुसार, जमानत याचिका खारिज होने के बाद आरोपी पक्ष उच्च अदालत का रुख कर सकता है। वहीं पुलिस भी मामले में बाकी आरोपियों और घटनाक्रम से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच जारी रखे हुए है।
फिलहाल अदालत के फैसले ने यह साफ कर दिया है कि गंभीर अपराधों में न्यायालय तथ्यों और साक्ष्यों को प्राथमिकता दे रहा है और जल्दबाजी में राहत देने के पक्ष में नहीं है।



