Mahakauthig Noida 2025: 15वें महाकौथिग का छठवां दिन सुपर मॉम प्रतियोगिता, “माँ की ममता, पहाड़ों की संस्कृति और मंच पर आत्मविश्वास” नोएडा स्टेडियम में महाकौथिग 2025 के छठवें दिन सुपर मॉम प्रतियोगिता ने बिखेरा लोक-संस्कृति का रंग

नोएडा, रफ़्तार टूडे। नोएडा स्टेडियम में आयोजित 15वां महाकौथिग मेला 2025 जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है, वैसे-वैसे इसकी रंगत, गरिमा और सांस्कृतिक गहराई और भी निखरती जा रही है। मेले के छठवें दिन का पूरा सुबह का सत्र ‘सुपर मॉम’ प्रतियोगिता के नाम रहा, जिसमें मातृत्व, आत्मनिर्भरता, लोक-संस्कृति और सामाजिक योगदान का अद्भुत संगम देखने को मिला।
यह दिन केवल एक प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तराखंड की महिलाओं की शक्ति, परंपरा और आधुनिक सोच का भव्य उत्सव बन गया।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ छठवें दिन के सत्र का शुभारंभ
छठवें दिन के सुबह के सत्र का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. प्रवीण रंजन, डीसीपी ट्रैफिक, नोएडा द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ ही पूरे पंडाल में एक सकारात्मक और सांस्कृतिक ऊर्जा का संचार हुआ।
इस अवसर पर डॉ. प्रवीण रंजन ने मंच से महाकौथिग के आयोजन की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि—
“नोएडा जैसे महानगर में महाकौथिग के मंच पर जागेश्वर धाम के दर्शन जैसा अनुभव होना, अपने आप में बहुत सुखद है। उत्तराखंड की संस्कृति, खानपान और पारंपरिक परिधान आज भी उतने ही जीवंत हैं, यह देखकर मन प्रसन्न हो जाता है।” उन्होंने उत्तराखंडी व्यंजनों, लोक वेशभूषा और महिलाओं की भागीदारी को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया।
‘सुपर मॉम’ प्रतियोगिता: जब मातृत्व बना मंच की शान
महाकौथिग के छठवें दिन का सबसे बड़ा आकर्षण रही उत्तराखंडी सुपर मॉम प्रतियोगिता, जिसमें कुल 16 प्रतिभागी महिलाओं ने भाग लिया।
यह प्रतियोगिता केवल सौंदर्य या मंच प्रदर्शन तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें संस्कार, संस्कृति, सामाजिक चेतना और आत्मविश्वास की गहरी झलक दिखाई दी।
प्रतियोगिता का उद्देश्य उत्तराखंडी महिलाओं की उस भूमिका को सामने लाना था, जिसमें वे एक माँ होने के साथ-साथ समाज, संस्कृति और परिवार की मजबूत रीढ़ हैं।
तीन राउंड में परखी गई प्रतिभा, संस्कृति और समझ
सुपर मॉम प्रतियोगिता को तीन अलग-अलग राउंड में आयोजित किया गया, ताकि प्रतिभागियों की बहुआयामी प्रतिभा सामने आ सके।
पहला राउंड: परिचय और व्यक्तित्व
पहले राउंड में सभी प्रतिभागियों ने मंच पर अपना परिचय दिया। उन्होंने बताया कि वे किस क्षेत्र से आती हैं, उनके जीवन का संघर्ष क्या रहा और वे किस तरह अपने परिवार व समाज में योगदान दे रही हैं।
यह राउंड आत्मविश्वास और संवाद कौशल का आईना साबित हुआ।
दूसरा राउंड: लोक नृत्य और प्रस्तुति
दूसरे राउंड में प्रतिभागियों ने उत्तराखंडी लोक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। किसी ने झोड़ा-चांचरी से मंच जीवंत किया, तो किसी ने पारंपरिक गीतों के माध्यम से पहाड़ों की खुशबू बिखेरी।
तीसरा राउंड: संस्कृति और समाज से जुड़े प्रश्न
तीसरे और निर्णायक राउंड में जजों ने प्रतिभागियों से उत्तराखंड के
पारंपरिक खानपान
लोक परिधान
आभूषण
बोली-भाषा
सामाजिक योगदान
से जुड़े प्रश्न पूछे। इस राउंड ने साबित कर दिया कि ये महिलाएं केवल मंच पर ही नहीं, बल्कि संस्कृति की सच्ची संवाहक भी हैं।
निर्णायक मंडल: लोक-संस्कृति के अनुभवी चेहरे
प्रतियोगिता को परखने के लिए एक सशक्त और अनुभवी निर्णायक मंडल मौजूद रहा, जिसमें—
लोक गायिका स्वर कोकिला कल्पना चौहान
उत्तराखंडी अभिनेत्री मनीषा मलकोटी
प्रसिद्ध संगीत निर्देशक राकेश गुसाईं
शामिल रहे।
तीनों जजों ने प्रतिभागियों की प्रस्तुति, आत्मविश्वास, सांस्कृतिक ज्ञान और सामाजिक सोच को बारीकी से परखा।
विजेताओं की घोषणा: मेहनत और आत्मविश्वास की जीत
तीन राउंड की कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद जजों ने परिणाम घोषित किए—
प्रथम स्थान (सुपर मॉम 2025):
पूनम तोमर, बुराड़ी, दिल्ली
द्वितीय स्थान:
सुनीता नयाल, सेक्टर-22, नोएडा
तृतीय स्थान:
ममता गुसाईं, सुपरटेक, नोएडा
विजेताओं की घोषणा होते ही पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
विशेष पुरस्कारों ने बढ़ाया उत्साह
प्रतियोगिता के साथ-साथ कुछ विशेष पुरस्कार भी प्रदान किए गए— ‘बिगरेली बांद’ पुरस्कार:
रेनु उनियाल, इंद्रापुरम
लंबी धौंपेली’ पुरस्कार:
कविता भाकुनी, मयूर विहार फेस-3
इन पुरस्कारों ने प्रतिभागियों के उत्साह को और बढ़ा दिया।
शाम का सत्र: नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों की गूंज
सुबह के सांस्कृतिक और प्रेरणादायक सत्र के बाद अब सभी की निगाहें शाम के सत्र पर टिकी हैं।
शाम का मुख्य आकर्षण रहेंगे गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी, जिनके लोकगीत उत्तराखंड की आत्मा माने जाते हैं।
उनके गीतों के साथ महाकौथिग का मंच एक बार फिर पहाड़ों की स्मृतियों और भावनाओं से भर उठेगा।
आयोजन टीम की सक्रिय भूमिका
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में महाकौथिग टीम की भूमिका सराहनीय रही। मौके पर—, मुख्य संयोजक राजेन्द्र चौहान, संस्थापक कल्पना चौहान, चेयरमैन आदित्य घिल्डियाल, अध्यक्ष हरीश असवाल, संयोजिका इंद्रा चौधरी
मीडिया प्रभारी रजनी जोशी सत्येंद्र नेगी, नीरज रावत
सहित पूरी टीम उपस्थित रही और व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संभाला।
महाकौथिग 2025 का छठवां दिन यह संदेश देकर गया कि उत्तराखंडी महिलाएं केवल घर की जिम्मेदारियां ही नहीं, बल्कि संस्कृति, समाज और पहचान की मजबूत धुरी हैं।
सुपर मॉम प्रतियोगिता ने यह साबित कर दिया कि मातृत्व, आत्मविश्वास और परंपरा जब एक साथ मंच पर उतरते हैं, तो वह सिर्फ कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक प्रेरणा बन जाता है।



