Sharda University News : “फाइन की तलवार, टारगेटिंग की पीड़ा और साल बर्बाद करने की धमकी”, शारदा यूनिवर्सिटी में छात्रा की आत्महत्या के बाद छात्रों का फूटा गुस्सा, खुली प्रबंधन की पोल

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ग्रेटर नोएडा, रफ्तार टुडे। शारदा यूनिवर्सिटी में बीडीएस की छात्रा ज्योति शर्मा की आत्महत्या के बाद मामला गरमा गया है। अब तक चुप रहने वाले छात्रों ने प्रबंधन की सच्चाई उजागर की है। छात्रों के मुताबिक, यूनिवर्सिटी में तनाव और टारगेटिंग का ऐसा माहौल था, जिसमें छात्र-छात्राओं की मानसिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ता था।
फाइन के नाम पर छात्रों से वसूली, शिकायत करने वालों को बनाया जाता था निशाना
छात्रों ने खुलासा किया कि यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा छोटी-छोटी बातों पर जुर्माने लगाए जाते थे, जिनकी राशि 2,000 से लेकर 25,000 रुपये तक होती थी। कई बार फाइन बिना कारण बताए भी लगाया जाता था।
जो छात्र इन नीतियों पर सवाल उठाते या विरोध करते, उन्हें जानबूझकर टारगेट किया जाता। उनकी शिकायतों को नजरअंदाज किया जाता और बाद में उन्हें “अनुशासनहीन” बताकर मानसिक दबाव डाला जाता।
‘साल खराब करने की धमकी’ बनी मौत की वजह
ज्योति शर्मा के परिजनों का कहना है कि उसे टीचर्स द्वारा लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। आरोप लगाया गया था कि उसने असाइंमेंट्स पर टीचर्स की बजाय खुद हस्ताक्षर किए थे। इसी बात को आधार बनाकर उसे मानसिक रूप से परेशान किया गया।
टीचर्स ने उसे धमकी दी थी कि वे उसकी परीक्षा में “बैक” लगाकर पूरा साल खराब कर देंगे। इससे मानसिक दबाव में आई ज्योति ने खुदकुशी कर ली। कुछ दिनों पहले ही ज्योति के पिता ने यूनिवर्सिटी आकर प्रबंधन से शिकायत की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
छात्रों और संगठनों का एकजुट विरोध, पांच दिन में कार्रवाई की चेतावनी
ज्योति की आत्महत्या के बाद कई छात्र संगठन जैसे समाजवादी छात्र सभा, कांग्रेस, किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा, ABVP समेत अन्य संगठनों ने धरना प्रदर्शन किया। इन संगठनों ने आरोपियों को सख्त सजा देने और मानसिक उत्पीड़न की जांच कराने की मांग की है।
प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को पांच दिन का अल्टीमेटम दिया है। यदि इस अवधि में निष्पक्ष जांच और कार्रवाई नहीं होती, तो जोरदार आंदोलन की चेतावनी दी गई है।
प्रबंधन की कार्रवाई : 5 प्रोफेसर सस्पेंड, जांच कमेटी गठित
मामले को गंभीरता से लेते हुए शारदा यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने तत्काल प्रभाव से 5 प्रोफेसरों को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही प्रो-वाइस चांसलर प्रो. परमानंद के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित की गई है, जो 5 दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी।
प्रबंधन ने कहा कि वे घटना की निष्पक्ष जांच कराएंगे और दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन छात्रों और संगठनों का कहना है कि यह कदम देर से उठाया गया और सिर्फ दबाव के चलते किया गया है।
क्यों ज़रूरी है इस घटना पर मंथन?
ज्योति शर्मा की आत्महत्या ने एक बार फिर देश में कॉलेजों में मानसिक उत्पीड़न, दबाव और अनुचित नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यूनिवर्सिटी के अंदर ही छात्रों की आवाज दबाई जा रही है? क्या प्रबंधन जवाबदेह है? ये सवाल अब सार्वजनिक मंच पर हैं और जवाब मांगा जा रहा है।
जरूरी बदलाव की मांग
छात्रों और अभिभावकों ने सरकार से मांग की है कि:
- यूनिवर्सिटी में फी और फाइन प्रणाली की समीक्षा हो।
- मानसिक उत्पीड़न के मामलों की जांच के लिए स्वतंत्र कमेटी गठित हो।
- हर यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट वेलफेयर कमेटी और मेंटल हेल्थ काउंसलिंग सेंटर अनिवार्य हो।
- छात्राओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए कड़े दिशा-निर्देश बनाए जाएं।
निष्कर्ष
ज्योति की आत्महत्या कोई एक घटना नहीं, बल्कि एक सिस्टम की खामियों का आईना है। अगर अब भी जागरूकता, जवाबदेही और पारदर्शिता नहीं लाई गई, तो ऐसे मामले बार-बार दोहराए जाएंगे। छात्रों को पढ़ाई के लिए माहौल मिलना चाहिए, न कि डर और दबाव में जीने की मजबूरी।
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