Noida International Airport News : “आसमान में सुरक्षा की पहली उड़ान” – जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शुरू हुई कैलिब्रेशन फ्लाइट, अब टेस्टिंग फेज में प्रवेश; एयरपोर्ट संचालन की ओर एक बड़ा कदम, डेटा का महत्व, हर सिग्नल की कहानी, सटीकता का विज्ञान – मिलिमीटर तक की परख

जेवर एयरपोर्ट, रफ़्तार टुडे। उत्तर भारत का सबसे बड़ा और देश का अत्याधुनिक नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) अब अपने आखिरी परीक्षण चरण में पहुंच चुका है। एयरपोर्ट पर कैलिब्रेशन फ्लाइट शुरू हो गई है, जो किसी भी हवाई अड्डे के संचालन से पहले की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाती है।
यह उड़ान सिर्फ एक ‘टेस्ट फ्लाइट’ नहीं, बल्कि पूरे एयरपोर्ट सिस्टम की “सटीकता की परीक्षा” है। इसके जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि हवाई मार्ग, नेविगेशन, और कम्युनिकेशन सिस्टम अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुरक्षा मानकों पर खरे उतरें।
क्या होती है कैलिब्रेशन फ्लाइट? – सुरक्षा की नींव
कैलिब्रेशन फ्लाइट एक विशेष सुरक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया (Safety Evaluation Process) है। इसमें एक अत्याधुनिक तकनीक से लैस विमान पूर्व-निर्धारित मार्गों और ऊंचाइयों पर उड़ता है, ताकि यह जांची जा सके कि
एयरपोर्ट के सभी नेविगेशन, कम्युनिकेशन और इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) सही ढंग से काम कर रहे हैं या नहीं।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि“पायलट को मिलने वाला हर सिग्नल सटीक, निरंतर और भरोसेमंद हो।”
कैलिब्रेशन फ्लाइट की प्रमुख प्रक्रियाएं
कैलिब्रेशन फ्लाइट केवल विमान उड़ाने तक सीमित नहीं होती। यह एक बेहद तकनीकी और बहु-चरणीय प्रक्रिया होती है जिसमें निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं –
1) प्री-कैलिब्रेशन ब्रीफिंग (Pre-Calibration Briefing):
विशेषज्ञ दल पहले सभी सिस्टम की स्थिति, मौसम और उड़ान मार्ग का विस्तृत अध्ययन करता है।
2) फ्लाइट इंस्पेक्शन (Flight Inspection):
कैलिब्रेशन विमान निर्धारित पैटर्न में उड़ान भरता है और हर सिग्नल, हर बीम, हर फ्रीक्वेंसी को मापता है।
3) डेटा रिकॉर्डिंग और एनालिसिस (Data Recording & Analysis):
विमान में लगे अत्याधुनिक उपकरण हर क्षण का डेटा रिकॉर्ड करते हैं, जिसे बाद में जमीनी तकनीकी दल द्वारा विश्लेषित किया जाता है।
4) सिस्टम एडजस्टमेंट (System Adjustment):
अगर किसी सिग्नल में गड़बड़ी मिलती है, तो तुरंत उपकरणों में सुधार किया जाता है ताकि अगली उड़ान के लिए सिस्टम पूरी तरह सटीक हो जाए।
कैसे होते हैं ये विमान? – उड़ता लैबोरेटरी!
कैलिब्रेशन फ्लाइट के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले विमान सामान्य यात्री विमानों से अलग होते हैं।
इनमें ऐसे उपकरण लगे होते हैं जो रडार सिग्नल, रेडियो फ्रीक्वेंसी, ILS बीम, और संचार संकेतों को माप सकते हैं।
इन विमानों को आम तौर पर दो अनुभवी पायलट उड़ाते हैं और साथ में एक फ्लाइट इंस्पेक्टर होता है, जो वास्तविक समय में उपकरणों की रीडिंग मॉनिटर करता है।
मुख्य उपकरण जिनकी जांच की जाती है
कैलिब्रेशन उड़ान के दौरान कई अहम तकनीकी प्रणालियों की जांच की जाती है, जैसे –
ILS (Instrument Landing System): विमान को रनवे पर सुरक्षित लैंडिंग में मदद करता है।
DVOR (Doppler Very High Frequency Omni Range): दिशा और दूरी बताने वाला रेडियो नेविगेशन उपकरण।
DME (Distance Measuring Equipment): विमान की रनवे से दूरी मापता है।
Radar & Communication Systems: एटीसी (Air Traffic Control) और विमान के बीच सटीक संचार सुनिश्चित करते हैं।
डेटा का महत्व – हर सिग्नल की कहानी
कैलिब्रेशन फ्लाइट के दौरान इकट्ठा किया गया डेटा एयरपोर्ट की “तकनीकी स्वास्थ्य रिपोर्ट” के समान होता है।
हर एक सिग्नल का मापन यह दर्शाता है कि विमान की लैंडिंग और टेकऑफ गाइडेंस सिस्टम्स कितनी सटीकता से काम कर रहे हैं। अगर किसी फ्रीक्वेंसी में बाधा या असमानता पाई जाती है तो उसे तुरंत ठीक किया जाता है।
इस प्रक्रिया को पूरा होने में कई घंटे से लेकर कई दिन तक लग सकते हैं।
जेवर एयरपोर्ट के लिए क्यों खास है यह चरण?
जेवर एयरपोर्ट फिलहाल अपने ऑपरेशनल ट्रायल फेज में है।
कैलिब्रेशन फ्लाइट के सफल समापन के बाद ही एयरपोर्ट को DGCA (Directorate General of Civil Aviation) और ICAO (International Civil Aviation Organization) की मंजूरी मिल सकेगी।
इसका मतलब यह है कि “कैलिब्रेशन फ्लाइट की सफलता = एयरपोर्ट की उड़ान की मंजूरी।”
यह फ्लाइट सुनिश्चित करती है कि रनवे की एलाइनमेंट, एप्रोच पाथ, कंट्रोल टॉवर कम्युनिकेशन, और रडार सिस्टम पूरी तरह तैयार हैं।

सटीकता का विज्ञान – मिलिमीटर तक की परख
कैलिब्रेशन फ्लाइट में त्रुटि की कोई गुंजाइश नहीं होती।
हर सिग्नल की सटीकता मिलिमीटर लेवल तक मापी जाती है, ताकि लैंडिंग के समय विमान का गाइडेंस बिल्कुल सही हो। इससे रनवे पर ‘शून्य दृष्टि (Zero Visibility)’ की स्थिति में भी विमान सुरक्षित उतर सकेगा।
सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम
कैलिब्रेशन फ्लाइट न केवल उपकरणों की जांच करती है बल्कि यह एयरपोर्ट के सुरक्षा मानकों का आधिकारिक प्रमाणीकरण (Official Certification) भी होती है।
इसी आधार पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) हवाई अड्डे को संचालन की अंतिम मंजूरी देता है।
जेवर एयरपोर्ट की प्रगति पर देशभर की नजर
जेवर एयरपोर्ट देश का पहला नेट-जीरो कार्बन एमिशन एयरपोर्ट बनने की दिशा में अग्रसर है। यहां 6 रनवे, अत्याधुनिक कार्गो हब, और कनेक्टेड मेट्रो-हाईवे नेटवर्क इसे भारत का सबसे हाई-टेक एविएशन सेंटर बनाएंगे। कैलिब्रेशन फ्लाइट की शुरुआत इस बात का संकेत है कि अब नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट टेकऑफ के बेहद करीब है।
सीईओ का बयान
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (NIAL) के सीईओ ने कहा “कैलिब्रेशन फ्लाइट एयरपोर्ट की तैयारियों का सबसे अहम परीक्षण है। यह प्रक्रिया पूरी होते ही हम ऑपरेशनल ट्रायल की ओर बढ़ेंगे, ताकि नवंबर 2025 में निर्धारित पहली उड़ान समय पर उड़ सके।”
अब अगला चरण – ऑपरेशनल रेडीनेस ट्रायल (ORAT)
कैलिब्रेशन फ्लाइट के बाद अगला चरण होगा ORAT (Operational Readiness and Airport Transfer), जिसमें सभी सिस्टम, सुरक्षा टीम, एटीसी, ग्राउंड हैंडलिंग और एयरलाइंस के समन्वय का परीक्षण किया जाएगा।
कैलिब्रेशन फ्लाइट का मतलब सिर्फ तकनीकी उड़ान नहीं, बल्कि यह सुरक्षित उड़ानों की गारंटी की पहली परीक्षा है।
जेवर एयरपोर्ट पर इस उड़ान की शुरुआत ने यह साफ कर दिया है कि अब देश को मिलने वाला है एक ऐसा एयरपोर्ट जो न सिर्फ आधुनिकता बल्कि सुरक्षा के उच्चतम मानकों पर भी खरा उतरेगा। अगर सब कुछ तय योजना के अनुसार हुआ, तो नवंबर 2025 में जेवर एयरपोर्ट से भारत की पहली व्यावसायिक उड़ान इतिहास रचेगी।



