YEIDA News : डीजल नहीं, अब हाइड्रोजन से दौड़ेंगी बसें!, यमुना प्राधिकरण में शुरू हुआ हरित परिवहन का नया अध्याय, देश के सबसे बड़े ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी प्रोजेक्ट को मिली रफ्तार, प्रतिदिन 2080 किलोग्राम ऑक्सीजन उत्पादन का भी लाभ, एक बार भरने पर 750 किलोमीटर तक का सफर

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र में अब परिवहन का नया युग शुरू होने जा रहा है। इलेक्ट्रिक बसों के साथ-साथ अब तीन अत्याधुनिक ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूल सेल बसों को भी फ्लैग ऑफ किया जाएगा। यह परियोजना एनटीपीसी दादरी द्वारा विकसित की गई है और यमुना प्राधिकरण के सहयोग से इसका संचालन किया जाएगा।
यह पहल देश में हरित ऊर्जा आधारित सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ग्रीन हाइड्रोजन आधारित तकनीक न केवल परिवहन क्षेत्र की तस्वीर बदलेगी, बल्कि भारत को स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में भी आगे बढ़ाएगी।
ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी प्रोजेक्ट क्या है?
ग्रीन हाइड्रोजन आधारित मोबिलिटी परियोजना एक अत्याधुनिक और पर्यावरण अनुकूल अवधारणा है, जिसमें पारंपरिक डीजल और जीवाश्म ईंधन के स्थान पर हाइड्रोजन को ऊर्जा स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक से चलने वाली बसों में प्रदूषणकारी गैसों का उत्सर्जन नहीं होता और इनके संचालन से केवल पानी निकलता है। यही वजह है कि दुनिया के कई विकसित देशों के बाद अब भारत भी तेजी से ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के पानी से तैयार होगी स्वच्छ ऊर्जा
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें भूजल का दोहन नहीं किया जाएगा। ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के शोधित जल का उपयोग किया जाएगा। इससे जहां जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, वहीं प्राकृतिक संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव भी नहीं पड़ेगा। विशेषज्ञ इसे “वेस्ट टू वेल्थ” मॉडल का उत्कृष्ट उदाहरण मान रहे हैं।
प्रतिदिन 2080 किलोग्राम ऑक्सीजन उत्पादन का भी लाभ
इस परियोजना के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 2080 किलोग्राम ऑक्सीजन का उत्पादन भी होगा। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार यह लगभग 1750 पेड़ लगाने के बराबर लाभ प्रदान करेगा। यानी यह परियोजना केवल स्वच्छ परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संतुलन और हरित विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
बसों से निकलेगा सिर्फ पानी, नहीं होगा वायु प्रदूषण
हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इसमें किसी प्रकार की जहरीली गैस या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता। इन बसों के संचालन के दौरान केवल जलवाष्प और पानी उत्पन्न होता है।।इससे वायु प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आएगी और क्षेत्र की आबोहवा को स्वच्छ बनाए रखने में मदद मिलेगी।
हर साल करीब 1000 टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में आएगी कमी
ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी प्रोजेक्ट के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 1000 टन कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) के उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है।
वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग जैसी चुनौतियों को देखते हुए यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है।
देश का सबसे बड़ा ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूलिंग स्टेशन
यह परियोजना एक और वजह से खास है, क्योंकि इसके अंतर्गत स्थापित किया गया हाइड्रोजन फ्यूलिंग स्टेशन देश का सबसे बड़ा ग्रीन हाइड्रोजन फ्यूलिंग स्टेशन माना जा रहा है। इससे भविष्य में हाइड्रोजन आधारित वाहनों के विस्तार को भी गति मिलेगी और भारत में स्वच्छ परिवहन व्यवस्था को नई दिशा प्राप्त होगी।
एक बार भरने पर 750 किलोमीटर तक का सफर
इन आधुनिक बसों की क्षमता भी बेहद प्रभावशाली है। करीब 12 मीटर लंबी प्रत्येक बस में 42 यात्रियों के बैठने की सुविधा होगी। एक बार में इनमें लगभग 56 किलोग्राम हाइड्रोजन भरा जा सकेगा, जिसके बाद बस लगभग 750 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकेगी। इससे लंबी दूरी की यात्रा भी अधिक सुविधाजनक और किफायती बन सकेगी।
हरित भविष्य की ओर बढ़ता भारत
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीन हाइड्रोजन आधारित मोबिलिटी परियोजना केवल एक परिवहन व्यवस्था नहीं, बल्कि भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत है। यह परियोजना स्वच्छ ऊर्जा, कार्बन उत्सर्जन में कमी, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास के लक्ष्यों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यमुना प्राधिकरण और एनटीपीसी दादरी की यह पहल आने वाले वर्षों में देश के अन्य शहरों के लिए भी एक मॉडल के रूप में सामने आ सकती है। माना जा रहा है कि यह परियोजना भविष्य के हरित और प्रदूषण मुक्त भारत की मजबूत नींव साबित होगी।



