Greater Noida News: ग्रेटर नोएडा का गौरव डॉ. विनोद ‘प्रसून’ को मिला ‘प्रतिष्ठित लेखक सम्मान-2025’, हिंदी शिक्षण में लयात्मक नवाचार से कर रहे हैं नई पीढ़ी का मार्गदर्शन, एनसीईआरटी और डीपीएस से जुड़ा योगदान

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
हिंदी भाषा और साहित्य के क्षेत्र में निरंतर नवाचार करने वाले, शिक्षण को आसान और रोचक बनाने वाले, और व्याकरण को गीतों की मधुर धुनों में पिरोकर बच्चों तक पहुँचाने वाले डॉ. विनोद ‘प्रसून’ को भारतीय शैक्षिक प्रकाशक संघ (FEPI) द्वारा ‘प्रतिष्ठित लेखक सम्मान (स्कूली शिक्षा) – 2025’ से सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत समर्पण की पहचान है, बल्कि पूरे हिंदी शिक्षण जगत के लिए एक प्रेरणा है।
सम्मान का गौरवपूर्ण क्षण
22 अगस्त 2025 को दिल्ली के भव्य होटल ली मेरिडियन में आयोजित समारोह में यह सम्मान प्रदान किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित माननीय श्री हरीश मल्होत्रा, राज्यमंत्री (कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय एवं सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय) ने डॉ. प्रसून को शॉल, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। समारोह में देशभर से आए शिक्षाविदों, लेखकों, प्रकाशकों और साहित्यकारों ने इस पल का साक्षात्कार किया और जोरदार तालियों से उनका स्वागत किया।
‘सार्थक हिंदी व्याकरण’ को मिला बेस्ट बुक अवॉर्ड-2025
डॉ. प्रसून की रचना ‘सार्थक हिंदी व्याकरण’, जो न्यू सरस्वती हाउस (नई दिल्ली) से प्रकाशित हुई है, को ‘बेस्ट बुक अवॉर्ड-2025’ से भी सम्मानित किया गया। यह पुस्तक विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के बीच तेजी से लोकप्रिय हुई है क्योंकि इसमें कठिन से कठिन व्याकरणिक नियमों को गीतों, कविताओं और रोचक उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया है।
लयात्मक हिंदी शिक्षण के प्रणेता
डॉ. विनोद ‘प्रसून’ हिंदी शिक्षण में लयात्मक नवाचार (Rhythmic Innovation) के प्रणेता माने जाते हैं। उन्होंने कठिन विषयों को बच्चों के लिए सरल और रोचक बनाने के उद्देश्य से व्याकरण को गीतों और कविताओं के रूप में प्रस्तुत किया। उदाहरण के लिए—
संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण जैसे व्याकरणिक अध्याय बच्चों को गीत गाकर सिखाए जाते हैं।
क्रिया और काल जैसे जटिल विषय भी ताल और लय के साथ गुनगुनाने पर आसानी से याद हो जाते हैं। उनका यह अभिनव प्रयोग बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों के बीच भी बेहद लोकप्रिय हो रहा है।
देश-विदेश में किया नवाचार का प्रचार-प्रसार
डॉ. प्रसून ने केवल कक्षा-कक्षाओं तक सीमित न रहते हुए, अपने इस शिक्षण मॉडल का प्रचार-प्रसार देश-विदेश में आयोजित सैकड़ों हिंदी कार्यशालाओं के माध्यम से किया है।
दुबई, कतर, नेपाल, सिंगापुर और मॉरीशस जैसे देशों में उन्होंने हिंदी अध्यापकों और छात्रों को इस लयात्मक पद्धति से प्रशिक्षित किया। भारत के कई राज्यों में एनसीईआरटी और सीबीएसई से जुड़े कार्यक्रमों में भी उनकी पद्धति को सराहा गया।
एनसीईआरटी और डीपीएस से जुड़ा योगदान
डॉ. प्रसून एनसीईआरटी द्वारा प्रकाशित कक्षा 1 और 2 की हिंदी पाठ्यपुस्तक ‘सारंगी’ की निर्माण समिति के सदस्य रहे हैं। वर्तमान में वह दिल्ली पब्लिक स्कूल, ग्रेटर नोएडा में हिंदी विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं। उनकी शिक्षण शैली विद्यार्थियों को न केवल हिंदी सीखने में मदद करती है बल्कि भाषा से प्रेम भी जगाती है।
सम्मान समारोह के विशिष्ट अतिथि
इस समारोह में शिक्षा और प्रकाशन जगत की कई हस्तियाँ मौजूद थीं।
गोपाल कृष्णन – अध्यक्ष, भारतीय शैक्षिक प्रकाशक संघ
राजेश गुप्ता – महासचिव, FEPI
सुप्रसिद्ध अभिनेत्री एवं शिक्षिका स्वरूप संपत
हिमांशु गुप्ता – डायरेक्टर, एस. चाँद समूह
शम्मी मानिक – सीईओ, न्यू सरस्वती हाउस प्रकाशन
अनुरिमा जी – मार्केटिंग हेड
डॉ. ऋषि शर्मा – वरिष्ठ शिक्षाविद
देशभर से आए सैकड़ों प्रसिद्ध लेखक और प्रकाशक भी इस गरिमामयी अवसर के गवाह बने।
लोगों की प्रतिक्रियाएँ
भारतीय शैक्षिक प्रकाशक संघ के अध्यक्ष गोपाल कृष्णन ने कहा:
> “डॉ. विनोद ‘प्रसून’ ने हिंदी शिक्षण को सरल, रोचक और आधुनिक बनाया है। उनके प्रयोग आने वाली पीढ़ियों के लिए मील का पत्थर साबित होंगे।”
सुप्रसिद्ध अभिनेत्री स्वरूप संपत ने कहा:
> “गीतों और कविताओं में व्याकरण को पिरोना एक अनोखी पहल है। बच्चों के लिए इससे हिंदी सीखना आनंददायक हो जाता है।”
डॉ. विनोद ‘प्रसून’ का संदेश
सम्मान प्राप्त करने के बाद डॉ. प्रसून ने अपने भाव साझा करते हुए कहा “यह सम्मान सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि उन सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों का है जिन्होंने हिंदी भाषा को अपनाया और इसे प्रेम से सीखा। मेरा उद्देश्य है कि हिंदी केवल एक विषय न रहे, बल्कि बच्चों के जीवन का हिस्सा बने। गीत, लय और ताल के माध्यम से शिक्षा को सरल और स्मरणीय बनाना मेरा संकल्प है।”
ग्रेटर नोएडा को गर्व का अवसर
ग्रेटर नोएडा जैसे उभरते शैक्षिक और औद्योगिक केंद्र से डॉ. विनोद ‘प्रसून’ का यह सम्मान जुड़ना पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है। यहाँ के शिक्षकों, विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों में खुशी की लहर है कि उनके शहर से जुड़ा एक शिक्षक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी के प्रचार-प्रसार का वाहक बना है।
भविष्य की दिशा
डॉ. प्रसून का कहना है कि वे आने वाले समय में इस पद्धति को और विस्तारित करेंगे। उनका लक्ष्य है कि लयात्मक शिक्षण को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स, मोबाइल ऐप्स और ऑनलाइन मॉड्यूल्स के माध्यम से हर बच्चे तक पहुँचाया जाए।
डॉ. विनोद ‘प्रसून’ का यह सम्मान हिंदी भाषा की शक्ति, लचीलेपन और शिक्षण की नई दिशा का प्रतीक है। उनकी यह उपलब्धि आने वाले समय में लाखों बच्चों और शिक्षकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। यह सिद्ध करता है कि अगर नीयत सही हो और उद्देश्य पवित्र, तो शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि गीतों और कविताओं की तरह जीवन में घुल-मिल जाती है।



