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Greater Noida Authority News : अब 'ऑनलाइन निगरानी' से होगा सीवर सिस्टम का शुद्धिकरण!, ग्रेटर नोएडा के एसटीपी पर हाईटेक नज़र, बादलपुर से लेकर ईकोटेक तक हुआ डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, अब लैपटॉप से चलेगा सीवेज सिस्टम!, ग्रेटर नोएडा के एसटीपी पर ओसीएमएस की शुरुआत, कासना का भी नंबर जल्द



ग्रेटर नोएडा, रफ्तार टुडे। शहर की सीवरेज व्यवस्था अब तकनीकी नजरों के दायरे में आ गई है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (STPs) पर ऑनलाइन कंट्रोल मॉनिटरिंग सिस्टम (OCMS) स्थापित करना शुरू कर दिया है, जिससे न केवल प्राधिकरण के अधिकारी बल्कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) और नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा (NMCG) जैसी संस्थाएं भी कंप्यूटर स्क्रीन पर बैठकर एसटीपी की निगरानी कर सकेंगी।

फिलहाल बादलपुर, ईकोटेक-2 और ईकोटेक-3 के एसटीपी पर यह सिस्टम लग चुका है और अब कासना स्थित 137 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी को एक माह में ऑनलाइन निगरानी के दायरे में लाने की तैयारी चल रही है।


बटन दबाते ही स्क्रीन पर दिखेगी गंदगी की हकीकत! ऑनलाइन सिस्टम देगा हर स्तर की जानकारी

एसटीपी पर यह नया OCMS सिस्टम लगने से अब ये जानना आसान हो गया है कि—

  • कितनी मात्रा में बीओडी (Biological Oxygen Demand) और सीओडी (Chemical Oxygen Demand) है?
  • सीवेज का शोधन सही मानकों पर हो रहा है या नहीं?
  • पानी की गुणवत्ता क्या है?

इस सिस्टम से एक साथ छह डिवाइस कनेक्ट हो सकते हैं। यानी सीवर विभाग, यूपीपीसीबी, एनएमसीजी और अन्य संबंधित एजेंसियां अपने कार्यालय में बैठकर रियल टाइम डेटा देख सकती हैं।


137 एमएलडी वाले कासना एसटीपी की भी बारी आने वाली है, जल्द लगेगा हाईटेक सिस्टम

ग्रेटर नोएडा का सबसे बड़ा एसटीपी कासना में स्थित है, जिसकी क्षमता 137 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) है। यहां भी एक माह के भीतर ओसीएमएस सिस्टम लगाने की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही ग्रेटर नोएडा के चारों प्रमुख एसटीपी हाईटेक निगरानी प्रणाली से लैस हो जाएंगे।


30 लाख रुपये प्रति यूनिट की लागत, लेकिन फायदे हैं बेशुमार!

वरिष्ठ प्रबंधक विनोद शर्मा के अनुसार, एक एसटीपी पर ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाने में लगभग 30 लाख रुपये की लागत आती है, लेकिन इसके जरिए—

  • बेहतर ट्रैकिंग हो सकेगी,
  • सीवर प्रबंधन पारदर्शी होगा,
  • और पर्यावरणीय नियमों का पालन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।

इस लागत को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण वहन कर रहा है, ताकि प्रदूषण नियंत्रण और जल संसाधनों की शुद्धता पर कोई समझौता न हो।


ट्रीटेड वॉटर: अब गंदा पानी भी बनेगा वरदान! निर्माण और सिंचाई में हो रहा है उपयोग

एसटीपी से शोधित जल का इस्तेमाल अब सिंचाई और निर्माण कार्यों में किया जा रहा है। एनटीपीसी भी बिजली उत्पादन के लिए इसी ट्रीटेड वॉटर का उपयोग करने पर विचार कर रही है।

अगर कोई व्यक्ति या संस्था ट्रीटेड वॉटर लेना चाहती है तो वह सीवर विभाग के मोबाइल नंबर 9211825118 पर संपर्क कर सकती है। इसकी दर सिर्फ ₹7 प्रति किलोलीटर तय की गई है, जो व्यावसायिक उपयोग के लिए भी काफी किफायती है।


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ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा STP प्लांट

एसटीपी की वर्तमान क्षमता पर एक नजर

स्थानक्षमता (एमएलडी)
बादलपुर2
कासना137
ईकोटेक-215
ईकोटेक-320

एसीईओ प्रेरणा सिंह का बड़ा बयान — तकनीक से जुड़ेगी पारदर्शिता

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की एसीईओ प्रेरणा सिंह ने स्पष्ट किया:

“सभी एसटीपी को ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम से लैस करने की योजना पर काम चल रहा है। इससे संचालन की निगरानी आसान होगी और गुणवत्ता पर नियंत्रण बना रहेगा। साथ ही, जो लोग सिंचाई या निर्माण के लिए पानी लेना चाहते हैं, वे मामूली शुल्क देकर प्राधिकरण से ट्रीटेड वॉटर ले सकते हैं।”


नमामि गंगे मिशन का हिस्सा, अब ग्रेटर नोएडा भी निभाएगा जिम्मेदारी

यह योजना केंद्र सरकार की नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत लागू की गई है, जिसमें पूरे उत्तर प्रदेश के एसटीपी को ऑनलाइन मोड में लाने का लक्ष्य रखा गया है। गंगा की शुद्धता और पर्यावरणीय संतुलन के लिए यह कदम अत्यंत महत्वपूर्ण है।


अब लैपटॉप से होगी निगरानी, कंट्रोल रूम से चलेगा गंदे पानी पर कंट्रोल

अब अधिकारी लैपटॉप या मोबाइल से लॉग इन कर यह देख सकेंगे कि—

  • किस समय कितनी मात्रा में सीवेज प्रोसेस हो रही है?
  • क्या आउटलेट वॉटर मानकों के अनुरूप है?
  • कहीं कोई सिस्टम फेल तो नहीं?

यह मॉनिटरिंग न केवल सतत सुधार की दिशा में कदम है, बल्कि आने वाले समय में स्मार्ट सिटी मिशन के भी अनुरूप है।


स्वच्छता और पर्यावरण के लिए बड़ा कदम! अब प्रदूषण पर होगा तुरंत नियंत्रण

OCMS से डेटा सीधे उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और गंगा मिशन के सिस्टम से लिंक होगा। अगर किसी एसटीपी में मानकों से ज़्यादा प्रदूषित जल निकलता है, तो रियल टाइम अलर्ट भेजा जाएगा।

इससे समय रहते समस्या का समाधान हो सकेगा और प्रदूषण पर लगाम लगेगी।


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