GL Bajaj College News : जीएलबीआईएमआर में संस्थापक दिवस का भव्य आयोजन, हवन, आस्था और एकता के संग गूंजा परिसर, संस्थान के प्रति सम्मान और आभार का अवसर

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
ग्रेटर नोएडा स्थित जीएल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च (GLBIMR) में संस्थापक दिवस का आयोजन बड़े ही धूमधाम और श्रद्धाभाव से संपन्न हुआ। इस अवसर पर संस्थान के प्रांगण में विशाल हवन का आयोजन किया गया, जिसने पूरे परिसर को भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा से भर दिया।
इस विशेष दिन पर निदेशक डॉ. सपना राकेश, डॉ. प्रीति बजाज (निदेशक, जीएलबीआईटीएम), संकाय सदस्य, प्रशासनिक अधिकारी, कर्मचारी और विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से भाग लेकर संस्थान के प्रति अपना समर्पण और आभार व्यक्त किया।
जीएलबीआईएमआर का संस्थापक दिवस एक ऐसा पल है, जो न केवल संस्थान की उपलब्धियों को याद करने का अवसर देता है, बल्कि सभी को आने वाले वर्षों के लिए नई प्रेरणा और ऊर्जा से भी भरता है।
यह दिन हर साल विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को यह याद दिलाता है कि वे केवल शिक्षा का हिस्सा नहीं, बल्कि एक संस्था की परंपरा और विरासत के संवाहक भी हैं।
हवन ने बढ़ाया एकता और समर्पण का भाव
संस्थापक दिवस पर आयोजित हवन का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने संस्थान से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति को एकता, जिम्मेदारी और संस्थान के मूल्यों से जोड़ने का कार्य किया।
डॉ. सपना राकेश ने कहा –
“संस्थापक दिवस पर आयोजित यह हवन हमें हमारे संस्थान के प्रति प्रतिबद्धता और समर्पण को पुनः स्मरण करने का अवसर देता है। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि एक प्रेरणा है, जो हमें अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक करती है।”
श्रद्धा और भक्ति का वातावरण
हवन के दौरान परिसर का माहौल पूर्णतः भक्तिमय और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण हो गया।
सभी प्रतिभागियों ने पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ हवन में आहुति दी।
विद्यार्थियों और शिक्षकों ने इस क्षण को संस्थान की परंपरा और संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
हवन के समापन के बाद सभी को प्रसाद वितरण किया गया, जिससे माहौल और भी आध्यात्मिक और सौहार्दपूर्ण बन गया।
संस्थान के प्रति सम्मान और आभार का अवसर
संस्थापक दिवस केवल एक आयोजन नहीं बल्कि वह अवसर है, जब सभी सदस्य संस्थान की यात्रा, उद्देश्यों और मूल्यों को पुनः स्मरण करते हैं।
यह दिन विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों को यह याद दिलाता है कि:
शिक्षा केवल ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समर्पण और नैतिकता का संगम है।
संस्थान की नींव को मजबूत करने वाले मूल्यों को आत्मसात करना ही सच्चा आभार है।



