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Noida Authority News : नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत, दो और आरोपी बिल्डर गिरफ्तार, प्रशासनिक लापरवाही का खौफनाक सच उजागर, 2022 में ही दी गई थी चेतावनी – “मरम्मत नहीं हुई तो हो सकती है बड़ी दुर्घटना”, तीन साल बाद वही चेतावनी बनी युवराज की मौत की वजह!, ऑथोरिटी, बिल्डर, या प्रशासन की गलती ?

नोएडा, रफ़्तार टूडे। सेक्टर-150 नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले में अब रोज़ नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। नोएडा पुलिस ने इस बहुचर्चित मामले में दो और आरोपी बिल्डरों को गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही यह मामला अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, चेतावनियों की अनदेखी और सिस्टम फेल्योर का गंभीर उदाहरण बनता जा रहा है।


दो और बिल्डर गिरफ्तार, पहले से जेल में है अभय सिंह
नोएडा पुलिस ने लोटस ग्रीन प्रोजेक्ट से जुड़े दो बिल्डरों को गिरफ्तार किया है—रवि बंसल, पुत्र प्रकाश चंद
निवासी: फ्लैट नंबर D-76, मंगलम रेजिडेंसी अपार्टमेंट, थाना सेक्टर-21D, फरीदाबाद (हरियाणा)
सचिन करनवाल, पुत्र गोपाल करनवाल
निवासी: फ्लैट नंबर B-6, बिल्डिंग नंबर A-11, शालीमार गार्डन एक्सटेंशन-2, थाना शालीमार गार्डन, जिला गाज़ियाबाद
इससे पहले इस मामले में अर्थम बिल्डर के अभय सिंह को गिरफ्तार कर 6 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।

बिल्डरों पर एक और मुकदमा, पर्यावरण कानूनों में भी फंसे
मामले की गंभीरता को देखते हुए बुधवार को नॉलेज पार्क कोतवाली में एक और मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मुकदमा— Lotus Green Construction Pvt. Ltd.
Wish Town
के भागीदारों के खिलाफ दर्ज हुआ है।
इनके खिलाफ पर्यावरण संरक्षण अधिनियम और जल प्रदूषण निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। नामजद आरोपियों में—
अभय कुमार
मनोज कुमार
संजय कुमार
अचल वोहरा
निर्मल शामिल हैं।


अब सामने आया सबसे खौफनाक सच: 2022 में ही दी गई थी चेतावनी!
युवराज मेहता की मौत के बाद जो तथ्य सामने आए हैं, वे नोएडा प्राधिकरण की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रियल एस्टेट डेवलपर कंपनी ने साल 2022 में ही नोएडा प्राधिकरण को लिखित रूप में चेतावनी दी थी कि सेक्टर-150 में—
सीवरेज लाइनें ढह चुकी हैं
मुख्य नालियां क्षतिग्रस्त हैं
भारी जलभराव हो रहा है
सड़क धंसने का खतरा बना हुआ है
और साफ शब्दों में लिखा गया था “यदि तत्काल मरम्मत नहीं हुई तो किसी भी समय दुर्घटना हो सकती है।”

डेवलपर का 2022 का पत्र: प्रशासन के लिए रेड अलर्ट था
मार्च 2022 में एमजेड विजटाउन प्लानर्स नामक डेवलपर कंपनी ने नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ को एक आधिकारिक पत्र भेजा था। यह पत्र सेक्टर-150 स्थित प्लॉट संख्या एससी/02, ए-3 से जुड़ा था।
पत्र में उल्लेख किया गया था कि—
सीवरेज और ड्रेनेज लाइनें टूट चुकी हैं
सीवेज का पानी पूरे बेसमेंट में भर चुका है
मिट्टी का कटाव लगातार बढ़ रहा है
सड़क कभी भी धंस सकती है
पत्र में चेतावनी दी गई थी कि “यदि तत्काल मरम्मत नहीं की गई तो किसी भी व्यक्ति के साथ जानलेवा हादसा हो सकता है।”


पत्र की प्रतियां पुलिस तक को भेजी गईं, फिर भी कार्रवाई शून्य
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस पत्र की प्रतियां—
नोएडा प्राधिकरण के योजना विभाग
कार्य विभाग
स्थानीय थाना प्रभारी (SHO)
नोएडा डीसीपी / पुलिस आयुक्त
को भी भेजी गई थीं।
इसके बावजूद न तो मरम्मत कराई गई, न सड़क की सुरक्षा सुनिश्चित की गई, और न ही मौके पर स्थायी बैरिकेडिंग की गई।

चार साल पहले क्यों हटवाई गई बैरिकेडिंग? उठे गंभीर सवाल
इस मामले में अब नोएडा प्राधिकरण की भूमिका पर सबसे बड़ा सवाल यही है कि सेक्टर-150 स्थित प्लॉट SC-02/A3 पर लगी बैरिकेडिंग
करीब चार वर्ष पहले प्राधिकरण ने हटवा दी थी
इतना ही नहीं, बैरिकेडिंग लगाने के आरोप में
बिल्डर पर 6 लाख रुपये का जुर्माना भी ठोक दिया गया


बैरिकेडिंग हटाने की कीमत युवराज ने जान देकर चुकाई?
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2022 में नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-150 के 13 बिल्डरों पर अवैध यूनीपोल और होर्डिंग लगाने के आरोप में कार्रवाई की थी। उस सूची में सबसे ऊपर इसी भूखंड के अर्थम बिल्डर का नाम था।
हालांकि जिस भूखंड पर युवराज की कार गिरी—
वहां कोई यूनीपोल नहीं था
न ही कोई होर्डिंग लगाने की जगह थी
असल में बिल्डर ने करीब 15 फीट ऊंची टिन शीट की बैरिकेडिंग की थी, जिस पर सिर्फ प्रोजेक्ट का नाम लिखा था। आज बड़ा सवाल यह है कि—
यदि वही बैरिकेडिंग होती, तो क्या युवराज की तेज रफ्तार कार सीधे पानी भरे गड्ढे में गिर पाती?

कोर्ट ने भी मांगी जवाबदेही, 27 जनवरी को अगली सुनवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए गौतमबुद्धनगर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत ने बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने गिरफ्तार बिल्डर अभय सिंह की जमानत पर फैसला सुरक्षित रखते हुए विवेचक से यह जानकारी मांगी है कि उस भूखंड से बैरिकेडिंग हटवाने का आदेश किस अधिकारी ने दिया था
अब इस मामले में अगली सुनवाई 27 जनवरी को होगी।


सवाल वही: जिम्मेदार कौन?
युवराज मेहता की मौत अब सिर्फ एक हादसा नहीं रही। यह मामला बन चुका है—
चेतावनियों की अनदेखी
विभागीय लापरवाही
प्रशासनिक चुप्पी और सिस्टम में डूबे इंसाफ का
अब देखना होगा कि जांच की आंच सिर्फ बिल्डरों तक सीमित रहती है या प्राधिकरण के जिम्मेदार अधिकारियों तक भी पहुंचती है।

रफ़्तार टूडे की न्यूज
Raftar Today
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