DPS School News : नन्हें–मुन्नों ने रची कृष्ण–भक्ति की अनोखी दुनिया, DPS नॉलेज पार्क–V में “कृष्ण लीला – एक दिव्य यात्रा” का हुआ भव्य आयोजन, नन्हे कलाकारों की अलौकिक प्रस्तुति, अभिभावकों का उत्साह और सहभागिता

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। दिल्ली पब्लिक स्कूल, नॉलेज पार्क–V का प्रांगण उस समय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक आभा से आलोकित हो उठा, जब विद्यालय के प्री–प्राइमरी विंग के प्रेप वर्ग के नन्हें–मुन्नों ने मंच पर उतार दी भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएँ। “कृष्ण लीला – एक दिव्य यात्रा” नामक इस भव्य संगीत–नाट्य उत्सव ने न केवल दर्शकों को भक्ति और आनंद से सराबोर किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि भारतीय संस्कृति और परंपरा की जड़ें कितनी गहरी और जीवनदायी हैं।
“कृष्ण लीला – एक दिव्य यात्रा” केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि एक जीवंत अनुभव था जिसने यह सिद्ध कर दिया कि हमारी परंपराएँ और संस्कार आज भी नई पीढ़ी के दिलों में गहराई से बसे हुए हैं। बच्चों का यह अनुपम प्रदर्शन भारतीय संस्कृति की निरंतरता और भविष्य की आशा को प्रकट करता है।
मंच पर दिखी कृष्ण के जीवन की झलकियाँ
नन्हें कलाकारों ने अपने भोलेपन, मधुर संवादों और मनमोहक नृत्य–नाट्य के माध्यम से श्रीकृष्ण के बालपन की लीलाओं को जीवंत कर दिया। कभी वे मक्खन चुराते कान्हा बने, तो कभी ग्वाल–बालों संग बांसुरी बजाते। उनके अभिनय में इतना आत्मीय भाव था कि उपस्थित जन–समूह भाव–विभोर होकर “राधे–कृष्णा” का नाम जपने लगा। बच्चों की सहजता और आत्मविश्वास ने साबित किया कि कला अभिव्यक्ति की कोई उम्र नहीं होती।
विद्यालय प्रबंधन और अभिभावकों की भूमिका
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय की मुख्य अध्यापिका ने अपने संबोधन में कहा “हमारे नन्हे विद्यार्थियों ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को जिस सादगी, मधुरता और आस्था के साथ प्रस्तुत किया, वह हमारी भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करता है। इस प्रकार के आयोजन बच्चों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और आध्यात्मिक दृष्टिकोण का संचार करते हैं।”
अभिभावकों की उपस्थिति और उनका उत्साह इस कार्यक्रम को और भी खास बना गया। सभी ने बच्चों की मेहनत और शिक्षकों के मार्गदर्शन की प्रशंसा की।
संगीत और नृत्य ने बाँधा समां
बाल–विद्यार्थियों की प्रस्तुति में संगीत और नृत्य का ऐसा मेल देखने को मिला जिसने पूरे सभागार को एक आध्यात्मिक मंदिर का रूप दे दिया। मधुर गायन, नन्हें कदमों की थिरकन और सजीव अभिनय ने “कृष्ण लीला” को पूर्णता प्रदान की। उनके द्वारा प्रस्तुत की गई गोप–गोपियों की झलकियों और माखन चोर प्रसंगों ने सभी के चेहरों पर मुस्कान और आँखों में भक्ति भाव जगा दिया।
नन्हे कलाकारों की अलौकिक प्रस्तुति
नृत्य–नाट्य, मधुर भजनों और सजीव अभिनय के माध्यम से बच्चों ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से लेकर उनके जीवन–प्रसंगों तक को जीवंत कर दिया।
माखन चोरी, गोवर्धन उठाने, कालिया नाग मर्दन और रासलीला जैसे प्रसंगों का प्रस्तुतीकरण इतना भावनात्मक और सजीव था कि पूरा सभागार श्रद्धा, भक्ति और आनंद से भर उठा। बच्चों का भोला–भाला अभिनय और मासूम अदाएँ दर्शकों के हृदय को छू गईं।
अभिभावकों का उत्साह और सहभागिता
इस अवसर पर मौजूद अभिभावकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से बच्चों का उत्साहवर्धन किया। कई अभिभावक अपने छोटे–छोटे बच्चों को मंच पर इस रूप में देखकर भावुक हो उठे। यह क्षण उनके लिए जीवनभर की स्मृति बन गया। विद्यालय ने इस कार्यक्रम में अभिभावकों की सक्रिय उपस्थिति को बच्चों के आत्मविश्वास और प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत बताया।
अतिथियों की उपस्थिति से बढ़ी शोभा
इस भव्य आयोजन में कई विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ा दिया।
श्री सचिन कुमार पांडेय, कार्यकारी निर्माता, टीवी 9 भारतवर्ष
डॉ. आर्येन्द्र प्रताप सिंह, प्रसिद्ध समाचार–वाचक, दूरदर्शन
पंडित प्रशांत मलिक, राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित शास्त्रीय संगीताचार्य
इन सभी अतिथियों ने बच्चों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इतने छोटे बच्चों ने जिस आत्मीयता और सादगी के साथ मंचन किया है, वह निस्संदेह प्रेरणादायी है।
मुख्य अध्यापिका का प्रेरक संदेश
विद्यालय की मुख्य अध्यापिका ने समापन संबोधन में कहा “हमारे नन्हे विद्यार्थियों ने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को जिस सादगी, मधुरता और आस्था से मंचित किया है, वह हमारी संस्कृति को जीवंत करने के साथ–साथ बच्चों को भारतीय संस्कारों और मूल्यों से जोड़ने का कार्य करता है। इस प्रकार के आयोजन बच्चों में आत्मविश्वास, रचनात्मकता और आध्यात्मिक दृष्टिकोण का संचार करते हैं।”
धन्यवाद और भविष्य की आशा
कार्यक्रम का समापन आभार–प्रदर्शन के साथ हुआ। विद्यालय ने अभिभावकों, अतिथियों और शिक्षकों का विशेष धन्यवाद किया और यह विश्वास जताया कि ऐसे आयोजन भविष्य में भी बच्चों को ज्ञान, संस्कार और सृजनशीलता की त्रिवेणी से निरंतर पोषित करते रहेंगे।



