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Breaking News : ग्रेटर नोएडा में ओमेक्स ग्रुप के खिलाफ बड़ा धोखाधड़ी केस!, निवेशकों को मॉल में दुकान देने के नाम पर करोड़ों की ठगी, कोर्ट के आदेश पर फूटा मामला


ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। उत्तर प्रदेश के उभरते शहरी केंद्र ग्रेटर नोएडा में एक बार फिर रियल एस्टेट सेक्टर की साख पर सवाल खड़े हो गए हैं। बीटा-2 कोतवाली क्षेत्र में प्रतिष्ठित ओमेक्स ग्रुप (Omaxe Group) के खिलाफ धोखाधड़ी, धमकी और विश्वासघात के गंभीर आरोप लगे हैं। मामला तब और बड़ा हो गया जब कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने ग्रुप के फाउंडर चेयरमैन रोहताश गोयल समेत सात नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।


अधिवक्ता ने ठगी का लगाया गंभीर आरोप

9 साल पहले बुक करवाई थीं दुकानें, वादे किए पर वादे निभाए नहीं

इस मामले की शिकायत करने वाले हैं तिलपता गांव निवासी अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह, जिन्होंने बताया कि उन्होंने लगभग नौ वर्ष पूर्व ओमेक्स ग्रुप की ओर से बीटा-2 में निर्मित “ओमेक्स कनॉट प्लेस मॉल” में दो दुकानें बुक कराई थीं। बुकिंग के समय उन्हें ग्रुप की ओर से भरोसा दिलाया गया कि 15 वर्षों तक तयशुदा किराया उन्हें दिया जाएगा, जिससे उन्हें नियमित आय होती रहेगी।

परंतु, अधिवक्ता का दावा है कि इतने वर्षों बाद भी न तो उन्हें किराया दिया गया, और न ही कंपनी की ओर से कोई ठोस जानकारी। इससे नाराज़ होकर उन्होंने कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।


किन-किन अधिकारियों पर दर्ज हुआ केस?

अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह के अनुसार, जब उन्होंने बुकिंग कराई थी तब उनके सामने ओमेक्स ग्रुप की ओर से कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। इन सभी पर धोखाधड़ी में मिलीभगत का आरोप लगाया गया है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • रोहताश गोयल – फाउंडर चेयरमैन, ओमेक्स ग्रुप
  • मोहित गोयल – मैनेजिंग डायरेक्टर
  • प्रकाश जोशी – कामर्शियल हेड
  • विनीत गोयल – एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर
  • विजय अग्रवाल – प्रोजेक्ट मार्केटिंग सेल्समैन
  • अन्य दो अज्ञात अधिकारी

इन सभी के खिलाफ धारा 420 (धोखाधड़ी), धारा 506 (धमकी), धारा 406 (विश्वासघात) समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।


किराया न देने पर मिली जान से मारने की धमकी!

शिकायतकर्ता अधिवक्ता का सबसे गंभीर आरोप यह है कि जब उन्होंने ओमेक्स ग्रुप के ऑफिस जाकर अपनी दुकानों के किराये और अनुबंध की जानकारी लेनी चाही, तो उनके साथ गाली-गलौज की गई और यहां तक कि जान से मारने की धमकी भी दी गई।

उन्होंने कहा, “मैं एक अधिवक्ता हूं, फिर भी मेरे साथ दुर्व्यवहार हुआ, तो आम निवेशकों के साथ क्या होता होगा, इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है।”


कोर्ट के हस्तक्षेप से दर्ज हुआ केस

जब कंपनी की ओर से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला और शिकायतकर्ता को धमकियां दी गईं, तो अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह ने न्यायिक अदालत में परिवाद दायर किया। अदालत ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए बीटा-2 कोतवाली को एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया।

इसके बाद 4 अगस्त 2025 को पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया और जांच शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, अब बयान दर्ज करने के साथ-साथ सभी दस्तावेजी साक्ष्यों की जांच की जा रही है।


क्या है ‘ओमेक्स कनॉट प्लेस’ मॉल?

‘ओमेक्स कनॉट प्लेस’ मॉल को ग्रेटर नोएडा में एक प्रीमियम कमर्शियल प्रोजेक्ट के रूप में लॉन्च किया गया था। इसका उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर के निवेशकों को आकर्षित करना था। कंपनी ने दुकानों में निवेश के बदले फिक्स्ड रेंट देने का दावा किया था। इसी स्कीम के तहत सैकड़ों लोगों ने लाखों-करोड़ों का निवेश किया।

लेकिन अब सवाल उठ रहे हैं कि कहीं ये योजना हवाई वादों पर तो नहीं टिकी थी?


निवेशकों में फैली चिंता

इस खबर के सामने आने के बाद अन्य निवेशकों में भी चिंता और भय का माहौल है। कुछ निवेशकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें भी किराया समय से नहीं मिला है, लेकिन वो अभी भी इंतज़ार में हैं।

निवेशक जगत के एक जानकार का कहना है, “यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं है, कई और लोग भी प्रभावित हो सकते हैं। अगर जांच निष्पक्ष हुई, तो बड़ी संख्या में पीड़ित सामने आ सकते हैं।”


रियल एस्टेट सेक्टर की गिरती साख

यह मामला सिर्फ एक बिल्डर या कंपनी के खिलाफ नहीं है, बल्कि पूरे रियल एस्टेट सेक्टर की गिरती साख का संकेत देता है। पहले से ही नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में फ्लैट डिलीवरी में देरी, फंड डायवर्जन और कब्जा विवाद जैसे मामलों की भरमार है।

अब मॉल में दुकान दिलवाकर किराया देने के नाम पर ठगी जैसे मामले सामने आना, आम लोगों की बिल्डरों में भरोसे को और गहरा आघात दे रहा है।


प्रशासन और RERA की भूमिका पर सवाल

इस तरह के मामले सामने आने पर अब उत्तर प्रदेश रेरा (UP RERA) और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। सवाल यह है कि ऐसी योजनाओं की अनुमति किस आधार पर दी जाती है? और अगर वादों का पालन नहीं होता तो क्या RERA स्वतः संज्ञान लेता है?

कई विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक प्रशासनिक सख्ती और पारदर्शी निगरानी नहीं होगी, तब तक ऐसे मामलों में सुधार संभव नहीं।


पीड़ित की मांग: न्याय और मुआवज़ा

शिकायतकर्ता अधिवक्ता सुरेंद्र सिंह ने प्रशासन से मांग की है कि उन्हें उनके निवेश का उचित किराया या मुआवज़ा दिया जाए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। उन्होंने कहा, “मामला सिर्फ मेरी दुकानों का नहीं है, यह न्याय और सिस्टम की जवाबदेही का प्रश्न है।”


अब क्या है अगला कदम?

बीटा-2 कोतवाली की पुलिस टीम अब इस मामले की विस्तृत जांच में जुटी है। जरूरत पड़ने पर सभी आरोपियों को पूछताछ के लिए तलब किया जा सकता है और जरूरी दस्तावेज जब्त किए जा सकते हैं।

कहा जा रहा है कि यदि कंपनी पर आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला ग्रेटर नोएडा के सबसे बड़े रियल एस्टेट घोटालों में से एक बन सकता है।


निष्कर्ष: सतर्क रहें, निवेश सोच-समझकर करें

इस मामले से एक स्पष्ट संदेश निकलता है — आम निवेशकों को रियल एस्टेट में निवेश करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल, दस्तावेज सत्यापन और RERA पंजीकरण की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।


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