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Greater Noida Authority STP News : ग्रेटर नोएडा की एसटीपी से निकलेगा ‘हरियाली का खजाना’, अब स्लज से बनेगी खाद – सोलर तकनीक से होगी क्रांति!, गोवा की राह पर ग्रेटर नोएडा, IIT दिल्ली बना रहा है डिटेल प्लान, कासना STP से होगी शुरुआत, ट्रीटेड वॉटर के बाद अब स्लज भी होगा ‘री-यूज’


ग्रेटर नोएडा, रफ्तार टुडे।
अब ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण केवल सीवेज के शुद्धिकरण तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उससे निकलने वाले स्लज को भी कृषि और बागवानी के काम में लाने की तैयारी कर चुका है। इस पहल के तहत कासना स्थित 137 एमएलडी की एसटीपी (Sewage Treatment Plant) पर “सोलर ड्राई स्लज मैनेजमेंट” तकनीक (SDSM) के जरिए खाद बनाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इस पूरे प्लान की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) प्रतिष्ठित IIT दिल्ली द्वारा तैयार की जा रही है, जो अगले सप्ताह तक ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को सौंप दी जाएगी।

कुछ योजना के अनुसार चलता है, तो आने वाले महीनों में ग्रेटर नोएडा का हर एसटीपी ग्रीन फर्टिलाइज़र फैक्ट्री’ में तब्दील हो जाएगा।


कचरे से खजाना: अब स्लज से तैयार होगी जैविक खाद!

प्राधिकरण के CEO एन. जी. रवि कुमार की सोच साफ है – शहर को स्मार्ट तो बनाना ही है, साथ ही सस्टेनेबिलिटी और पर्यावरण संतुलन को प्राथमिकता देनी है। यही वजह है कि अब तक बेकार माने जाने वाले एसटीपी स्लज को एक उपयोगी उत्पाद – खाद में बदला जाएगा। इसका सीधा लाभ न सिर्फ पर्यावरण को होगा, बल्कि उद्यानों, हरित पट्टियों और बागवानी कार्यों को भी मिलेगा बढ़ावा।

सीवर विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक विनोद कुमार शर्मा ने जानकारी दी कि गोवा में पहले से लागू यह तकनीक ग्रेटर नोएडा में भी कारगर साबित हो सकती है। “सोलर ड्राई स्लज मैनेजमेंट तकनीक” में केवल 5 दिनों में ही गीला स्लज सूखकर एक भुरभुरी राख का रूप ले लेता है, जो जैविक खाद के रूप में उपयोगी होती है।


क्या है सोलर ड्राई स्लज मैनेजमेंट (SDSM) तकनीक?

  • सूर्य की ऊष्मा का उपयोग करके गीले स्लज को सुखाना
  • कोई भारी मशीनरी या रासायनिक प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं
  • 5 दिनों में स्लज बन जाएगा खाद
  • खाद का उपयोग बागवानी, वृक्षारोपण, नगर उद्यानों आदि में

यह तकनीक न केवल इको-फ्रेंडली है, बल्कि इसे अपनाने से एसटीपी की मेंटेनेंस लागत भी घटेगी और जगह की बचत होगी।


कहां से होगी शुरुआत?

प्राधिकरण द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार शुरुआत कासना स्थित 137 MLD की एसटीपी से की जाएगी, और यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल होता है तो आगे बाकी एसटीपी में भी इसे लागू किया जाएगा।

अन्य STP की जानकारी:

एसटीपी स्थानक्षमता (MLD)
बादलपुर2 MLD
कासना137 MLD
ईकोटेक-215 MLD
ईकोटेक-320 MLD

अधिकारियों की प्रतिक्रिया

प्रेरणा सिंह, एसीईओ, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने कहा:

“सोलर ड्राई स्लज मैनेजमेंट तकनीक के जरिए स्लज के प्रबंधन पर विचार किया जा रहा है। इससे स्लज को कंपोस्ट में तब्दील किया जाएगा। IIT दिल्ली से डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट आने पर इस परियोजना की विस्तृत जानकारी प्राप्त हो सकेगी।”


पर्यावरण संरक्षण की दिशा में क्रांतिकारी कदम

ग्रेटर नोएडा जैसे तेजी से विकसित होते शहरों में जल प्रबंधन, ग्रीन इनिशिएटिव और संसाधनों के पुन: उपयोग की दिशा में यह कदम एक आदर्श मॉडल बन सकता है। सोलर तकनीक से न सिर्फ बिजली की बचत होगी, बल्कि ग्रीनहाउस गैसों में भी कमी आएगी।

यदि सब कुछ योजना के अनुसार चलता है, तो आने वाले महीनों में ग्रेटर नोएडा का हर एसटीपी ‘ग्रीन फर्टिलाइज़र फैक्ट्री’ में तब्दील हो जाएगा।


फायदे एक नज़र में:

  • स्लज निस्तारण की समस्या से छुटकारा
  • पर्यावरण के अनुकूल समाधान
  • मुफ्त जैविक खाद का स्थानीय उपयोग
  • बागवानी और हरित पट्टियों को मिलेगा बल
  • सार्वजनिक पार्कों में इस्तेमाल

निष्कर्ष:

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की यह पहल शहरी योजनाओं में “वेस्ट टू वेल्थ” की अवधारणा को मजबूत करती है। सोलर ड्राई स्लज मैनेजमेंट तकनीक के जरिए जहां एक ओर वेस्ट मैनेजमेंट बेहतर होगा, वहीं दूसरी ओर ग्रीन इन्वायरमेंट की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण भी स्थापित होगा।


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