Corruption Free India News : "सिर्फ़ 30 दिन में ढह गई विकास की चमक, सड़क बनी भ्रष्टाचार की दरार, दनकौर की जनता ने कहा: अब नहीं सहेंगे ये सड़ांध!", 400 मीटर की सड़क बनी घोटाले की पहचान, करप्शन फ्री इंडिया ने उठाई जांच की मांग, अनिश्चितकालीन धरने की दी चेतावनी

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
यमुना प्राधिकरण की ओर से दनकौर क्षेत्र में बनाई गई सड़क महज़ एक महीने में ही गड्ढों में तब्दील हो गई। इससे न केवल जनता का भरोसा टूटा, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आक्रोश की चिंगारी भी भड़क उठी। इस सड़क के बुरी तरह उखड़ने के विरोध में ‘करप्शन फ्री इंडिया संगठन’ के बैनर तले दर्जनों लोग यमुना प्राधिकरण के कार्यालय पर एकत्रित हुए और तहसीलदार मनोज कुमार को ज्ञापन सौंपकर ठोस कार्रवाई की माँग की।
सड़क बनी शर्म की वजह, सवालों में निर्माण की गुणवत्ता
यह सड़क दनकौर के बिजलीघर से अमरपुर राजपुर की ओर बनाई गई थी। इसका निर्माण कार्य करीब एक महीने पहले ही पूरा हुआ, लेकिन अब इसके हालात देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि सड़क नहीं, घोटाले का कालीन बिछा है। जगह-जगह उखड़ी परतें, खुले गड्ढे और बहता पानी आमजन को फिर से उसी परेशानी में धकेल रहा है, जिससे उन्हें राहत देने के नाम पर यह सड़क बनाई गई थी।
ज्ञापन सौंपा, आंदोलन का बिगुल फूंका
चौधरी प्रेम प्रधान की अध्यक्षता में करप्शन फ्री इंडिया संगठन ने प्राधिकरण कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन कर भ्रष्टाचार की जांच की माँग की।
संगठन के संस्थापक चौ. प्रवीण भारतीय और कार्यकर्ता आलोक नागर ने कहा कि यदि यमुना प्राधिकरण द्वारा बनाई गई इस सड़क की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच नहीं करवाई गई और दोषियों को दंडित नहीं किया गया, तो संगठन मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन धरना देगा।
“10 दिन में ही उखड़ गई सड़क, ये सीधा घोटाला है” — चौ. प्रवीण भारतीय
प्रवीण भारतीय ने कहा,
“हमने महीनों तक यमुना प्राधिकरण से मांग की थी कि यह सड़क गड्ढा मुक्त की जाए। जब सड़क बनी, तो लगा कि शायद कुछ अच्छा हो रहा है, लेकिन महज़ 10 दिन बाद ही यह सड़क फिर उखड़ने लगी। यह प्रमाण है कि इसमें घटिया सामग्री का इस्तेमाल हुआ और ठेकेदार-अधिकारियों की मिलीभगत से भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया है।”
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख माँगें
- 📌 संबंधित ठेकेदार पर FIR दर्ज कर उसे ब्लैकलिस्ट किया जाए।
- 📌 निर्माण कार्य में शामिल अधिकारियों की वेतन से सड़क मरम्मत की राशि वसूली जाए।
- 📌 सड़क निर्माण की तृतीय-पक्षीय तकनीकी जांच करवाई जाए।
- 📌 दोषियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई हो।

प्रदर्शन में जुटी स्थानीय एकजुटता
इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और संगठन से जुड़े सदस्य शामिल रहे।
प्रमुख नाम:
- आलोक नागर
- बलराज हूंण
- कुलवीर भाटी
- गौरव भाटी
- मुकेश कसाना
- नरेश भाटी
- रिंकू बैसला
- नितिन कुमार
- मनोज भाटी
- जितेंद्र कुमार
- फिरोज भाटी
- मा. दिनेश नागर
जनता का सवाल: विकास की गारंटी या बजट की बर्बादी?
लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाओं का फायदा ठेकेदारों और भ्रष्ट अफसरों तक सीमित रह गया है। जनता के टैक्स से बनने वाली सुविधाएं कुछ दिनों की चमक में ही दम तोड़ रही हैं। इस पूरे मामले ने न केवल यमुना प्राधिकरण की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि स्थानीय प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी संदेह खड़ा कर दिया है।
प्रशासन की चुप्पी बनी संदेह का कारण
जब रफ़्तार टुडे ने यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की, तो किसी ने आधिकारिक तौर पर प्रतिक्रिया नहीं दी। यह चुप्पी प्रशासन की संलिप्तता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल बनकर उभरी है।
“ये सिर्फ सड़क नहीं, सिस्टम की सच्चाई है” — प्रदर्शनकारियों की दो टूक
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अब समय आ गया है जब जनता को अपना हक और टैक्स का सही उपयोग सुनिश्चित कराने के लिए सड़क पर उतरना पड़े। यदि इस प्रकरण में कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई, तो आंदोलन और तेज़ होगा।
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