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Delhi Fair News : भारत-रूस-चीन का ट्रिपल पावर कनेक्शन!, “मोदी का सपना साकार हो रहा है” – MSME और मजदूर भारत की रीढ़, टैरिफ युद्ध में भारत की स्थिति मजबूत, EPCH अध्यक्ष राकेश कुमार बोले “ग्लोबल मार्केट में भारत का स्वर्ण युग लौट रहा है”, BRICS के मंच से भारत का उदय ग्लोबल मार्केट का नया समीकरण

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे। एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फॉर हैंडीक्राफ्ट्स (IEML) के अध्यक्ष राकेश कुमार ने रफ़्तार टुडे से खास बातचीत में कहा कि आने वाले समय में भारत, रूस और चीन की साझेदारी वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक नया अध्याय लिखेगी। उन्होंने कहा “BRICS सिर्फ एक संगठन नहीं, बल्कि तीन बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की ताकत का संगम है। आज विश्व की लगभग 70% GDP सिर्फ भारत, रूस और चीन के योगदान से बनती है।”

उन्होंने बताया कि भारत के पास हैंडमेड प्रोडक्ट्स, आर्टिज़न स्किल्स और कस्टमाइज़ेशन की वह ताकत है, जो किसी भी देश के पास नहीं है। वहीं रूस और चीन के साथ बढ़ते आर्थिक संबंध भारत के लिए “सस्टेनेबल एक्सपोर्ट इकोनॉमी” की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं।

दिल्ली फेयर बना केंद्र बिंदु – तीन दिन रहे बेहद अहम

राकेश कुमार ने बताया कि दिल्ली फेयर के अंतिम तीन दिन सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इसी दौरान वैश्विक खरीदारों (Buyers) की आमद सबसे अधिक रहती है। उन्होंने कहा “हमारे पास लगातार विदेशी डेलिगेशन आ रहे हैं। रूस, जर्मनी, चीन, अमेरिका, जापान जैसे देशों से Buyer शामिल हो रहे हैं। अगले तीन दिन का समय यह तय करेगा कि भारत के एक्सपोर्टर्स को इस सीज़न में कितने नए अवसर मिलेंगे।”

उन्होंने आगे बताया कि फेयर में इस बार हैंडमेड, हैंडीक्राफ्ट, टेक्सटाइल, जूट और इको-फ्रेंडली उत्पादों को खासतौर पर प्रदर्शित किया गया है। ये न सिर्फ भारतीय संस्कृति का परिचय कराते हैं, बल्कि पर्यावरणीय जिम्मेदारी का भी संदेश देते हैं।

चीन और रूस से भारत के रिश्ते – नई संभावनाओं का अध्याय

राकेश कुमार ने कहा कि भारत-रूस संबंध हमेशा मजबूत रहे हैं और अब चीन से भी संबंधों में मधुरता बढ़ रही है। उन्होंने कहा “भारत और रूस का रिश्ता ऐतिहासिक है, लेकिन अब चीन से भी व्यापारिक तालमेल तेज़ी से बढ़ रहा है। चीन एक बहुत बड़ा मार्केट है और अब भारत के हैंडक्राफ्ट प्रोडक्ट्स वहां अपनी पहचान बना रहे हैं।”

उन्होंने यह भी बताया कि पहले चीन हैंडमेड उत्पादों का सबसे बड़ा निर्माता था, लेकिन अब वह मैन्युफैक्चरिंग से ऑटोमेशन की ओर बढ़ गया है। ऐसे में हैंडमेड उत्पादों की डिमांड भारत के लिए अवसर बन रही है।

टैरिफ युद्ध में भारत की स्थिति मजबूत

राकेश कुमार ने अंतरराष्ट्रीय टैरिफ की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया “अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लगाया है, जबकि चीन पर यह 140% तक है। इसका सीधा असर यह होगा कि चीनी प्रोडक्ट्स महंगे होंगे और भारत के उत्पादों को ग्लोबल मार्केट में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि भारत की MSME इकाइयां, कला उद्योग, और हैंडमेड एक्सपोर्टर इस समय अपने सर्वश्रेष्ठ दौर की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने इस स्थिति को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “वोकल फॉर लोकल” अभियान का प्रतिफल बताया।

मोदी का सपना साकार हो रहा है” – MSME और मजदूर भारत की रीढ़

IEML अध्यक्ष ने भावनात्मक लहजे में कहा “प्रधानमंत्री मोदी का सपना ‘आत्मनिर्भर भारत’ सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि अब एक जमीनी हकीकत बन रहा है। MSME सेक्टर, मजदूर, कारीगर, छोटे-बड़े उद्योग — सभी इस विज़न को साकार करने में जुटे हैं।”

उन्होंने बताया कि भारत के कारीगरों की कला अब केवल देश तक सीमित नहीं, बल्कि दुनिया के हर कोने तक पहुंच रही है। उन्होंने उदाहरण दिया कि आज भारतीय हैंडीक्राफ्ट्स की मांग यूरोप, जापान, और लैटिन अमेरिका तक है।

चीन इंटरनेशनल फेयर बनेगा भारत के लिए अवसर

राकेश कुमार ने कहा कि दिल्ली फेयर के बाद चीन में होने वाला इंटरनेशनल ट्रेड फेयर भी भारत के लिए एक बड़ा अवसर होगा। उन्होंने कहा “भारत इस बार चीन फेयर में भी अपनी उपस्थिति मजबूत करेगा। दुनिया भर में भारत के हैंडमेड प्रोडक्ट्स की डिमांड तेजी से बढ़ रही है। चीन का मार्केट इस समय भारत के लिए सुनहरा अवसर है।”

उन्होंने बताया कि चीन की उत्पादन नीति में हुए बदलाव से भारत के हैंडीक्राफ्ट प्रोडक्ट्स को ज्यादा स्पेस मिल रहा है और “मेक इन इंडिया” की पहचान वैश्विक स्तर पर और भी मजबूत हो रही है।

हैंडमेड प्रोडक्ट्स की नई पहचान – भारत बनेगा ग्लोबल क्राफ्ट हब

IEML अध्यक्ष ने बताया कि भारतीय उत्पादों की विशेषता सिर्फ उनकी सुंदरता नहीं, बल्कि उनके पीछे की कहानी है। हर प्रोडक्ट में एक भारतीय कारीगर का श्रम, कला और संस्कृति का भाव छिपा होता है। उन्होंने कहा कि यह पहचान ही भारत को बाकी देशों से अलग बनाती है।

राकेश कुमार ने आगे कहा “हैंडमेड उत्पाद सिर्फ बिजनेस नहीं हैं, ये भारतीय परंपरा की आत्मा हैं। जब कोई विदेशी ग्राहक भारतीय उत्पाद खरीदता है, तो वह केवल वस्तु नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति का एक अंश अपने साथ ले जाता है।”

भारत का एक्सपोर्ट मिशन ‘वैश्विक पहचान की ओर’

अंत में राकेश कुमार ने कहा कि भारत का एक्सपोर्ट सेक्टर अब आत्मविश्वास के साथ दुनिया के सामने खड़ा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में भारत ग्लोबल मार्केट का “क्राफ्ट कैपिटल” बनेगा।

उन्होंने कहा “यह केवल व्यापार नहीं, बल्कि भारत की पहचान और आत्मनिर्भरता की कहानी है। हम सब मिलकर ‘मेड इन इंडिया, मेड फॉर वर्ल्ड’ के मिशन को साकार कर रहे हैं।”

रफ़्तार टुडे की न्यूज़
Raftar Today
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