Yamuna Authority News : "भारत का सबसे बड़ा मेडिकल डिवाइसेज पार्क", अब तेज़ी से अंतिम चरण में, यीडा सेक्टर-28 में तेजी से चल रहा निर्माण कार्य, 350 एकड़ में बन रहा देश का सबसे बड़ा मेडिकल डिवाइसेज पार्क, प्री-बिड मीटिंग अनिवार्य रूप से कराएं अवनीश अवस्थी का निर्देश

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक भविष्य की नींव को और सशक्त बनाते हुए, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विशेष सलाहकार श्री अवनीश अवस्थी एवं श्री जी.एन. सिंह (पूर्व ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया) ने यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) के सेक्टर-28 स्थित मेडिकल डिवाइसेज़ पार्क का दौरा किया।
यह दौरा उत्तर भारत की सबसे बड़ी और देश की सबसे महत्वाकांक्षी मेडिकल डिवाइसेज़ मैन्युफैक्चरिंग परियोजना की प्रगति की समीक्षा के लिए आयोजित किया गया था।
350 एकड़ में बन रहा देश का सबसे बड़ा मेडिकल डिवाइसेज पार्क
प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्री राकेश कुमार सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए बताया कि यह पार्क भारत सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार की संयुक्त पहल है, जिसे विश्वस्तरीय चिकित्सा उपकरण निर्माण केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
कुल 350 एकड़ में फैले इस पार्क में अब तक 89 भूखंड आवंटित किए जा चुके हैं। इनमें से:
- 65 अलॉटियों को चेकलिस्ट जारी की जा चुकी है
- 47 कंपनियों ने रजिस्ट्री करवा ली है
- 10 अलॉटियों को बिल्डिंग मैप की मंजूरी मिल चुकी है
- 7 कंपनियों ने कार्य स्थल पर निर्माण शुरू कर दिया है
सभी अलॉटियों के लीज प्लान एक सप्ताह में हों तैयार – सीईओ के निर्देश
सीईओ श्री सिंह ने परियोजना विभाग को निर्देशित किया कि सभी 89 अलॉटियों के लीज प्लान आगामी एक सप्ताह में तैयार कर लिए जाएं, ताकि कार्य में अनावश्यक देरी न हो।
उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि कुछ कंपनियों ने लीज डीड और कब्जा मिलने के बावजूद अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं किया है।
ऐसी कंपनियों से DPR (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) के अनुरूप कार्य योजना जल्द मांगी गई है।
कॉमन साइंटिफिक फैसिलिटीज़ निर्माण के अंतिम चरण में
भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार, पार्क के भीतर विकसित की जा रही कॉमन साइंटिफिक फैसिलिटीज़ (CSFs) की इमारतें अब अंतिम चरण में हैं।
यह फैसिलिटीज़ उन कंपनियों के लिए अत्यंत सहायक होंगी, जिनके पास अत्याधुनिक परीक्षण और उत्पादन तकनीक उपलब्ध नहीं है।
प्री-बिड मीटिंग अनिवार्य रूप से कराएं – अवस्थी जी का निर्देश
दौरे के दौरान श्री अवनीश अवस्थी ने कहा कि प्राधिकरण द्वारा भविष्य में जारी की जाने वाली सभी RFPs (Request For Proposal) में प्री-बिड मीटिंग का प्रावधान अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए, जिससे कंपनियों को पारदर्शिता और स्पष्टता मिल सके।
आईपीसी, CDSCO और स्टेट ड्रग्स अथॉरिटी को पार्क में मिले दफ्तर
श्री जी. एन. सिंह ने प्रस्ताव रखा कि इस पार्क में:
- इंडियन फार्माकोपिया कमीशन (IPC)
- डिप्टी ड्रग्स कंट्रोलर (CDSCO)
- स्टेट लाइसेंसिंग अथॉरिटी
को कार्यालय आवंटित किए जाएं, जिससे कंपनियों को लाइसेंस, सर्टिफिकेशन और ट्रेनिंग जैसी सेवाएं साइट पर ही उपलब्ध हो सकें।

विशेषज्ञों और अधिकारियों की उपस्थिति में हुई प्रभावी चर्चा
इस बैठक में निम्न प्रमुख विशेषज्ञ उपस्थित रहे:
- डॉ. अजय सचान, डिप्टी ड्रग कंट्रोलर
- डॉ. सेल्वराजन, निदेशक एवं वैज्ञानिक अधिकारी, IPC
- स्टेट ड्रग कंट्रोलर
- प्राधिकरण के अधिकारी: श्री कपिल सिंह, श्री शैलेंद्र भाटिया, श्री राजेंद्र भाटी, श्री प्रवीण मित्तल, श्री मेहराम सिंह, श्रीमती स्मिता सिंह सहित अन्य अधिकारीगण।
उद्योगों की भागीदारी: हजारों करोड़ का निवेश और वैश्विक विस्तार
मेसर्स एवियंस बायोमेडिकल्स:
कंपनी द्वारा ₹22 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। कार्य शुरू हो चुका है और उत्पादन के लिए सभी तकनीकी मानकों पर ध्यान दिया जा रहा है।
मेसर्स स्योन मेड टेक:
₹80 करोड़ का निवेश, 80000 स्क्वेयर फीट फैक्ट्री का निर्माण, तकनीक USA से आयातित,
और उत्पादों का 22 देशों में निर्यात किया जा रहा है।
बैंक लोन में सहयोग का आश्वासन
श्री शरद जैन, मेसर्स कृष मेडिकोज़ के प्रतिनिधि ने बैंक लोन को लेकर चिंता जताई, जिस पर श्री अवस्थी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि:
“प्राधिकरण स्तर से अलॉटी को बैंकिंग सहायता दिलाने में हरसंभव सहयोग किया जाए।”
कॉमन फैसिलिटीज पर कंपनियों से मिली फीडबैक
सीईओ श्री राकेश सिंह ने उपस्थित सभी अलॉटियों से सीधा संवाद करते हुए उनसे कॉमन साइंटिफिक फैसिलिटी में आवश्यक सुविधाओं की जानकारी ली, ताकि जरूरतों के अनुसार सिस्टम को तैयार किया जा सके।

15 अगस्त तक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें – अवस्थी का आदेश
श्री अवस्थी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि:
“आज 15 जुलाई है। आगामी 15 अगस्त 2025 तक सभी कंपनियों, निर्माण एजेंसियों और अधिकारियों को प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इसमें निर्माण, निवेश, सुविधाएं और योजनागत प्रगति का स्पष्ट विवरण दिया जाए।”
निष्कर्ष: भारत के स्वास्थ्य सुरक्षा मिशन में यीडा का बड़ा योगदान
यमुना प्राधिकरण द्वारा विकसित यह मेडिकल डिवाइसेज पार्क न केवल देश में चिकित्सा उपकरणों के आयात पर निर्भरता को कम करेगा,
बल्कि ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘डिजिटल हेल्थ मिशन’ को भी नया आयाम देगा।
यहां स्थापित होने वाली कंपनियां अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित उत्पाद बनाएंगी, जिससे भारत वैश्विक मेडिकल डिवाइसेज बाजार में अग्रणी खिलाड़ी बन सकेगा।
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