Breaking News : पहली ही तेज बारिश में ‘तैरने’ लगे ग्रेटर नोएडा के अंडरपास! गुलिस्तानपुर से पैरामाउंट तक पानी-पानी, सड़क बनी तालाब, 6 घंटों जाम में फंसे हजारों लोग, मानसून अभी दूर, लेकिन बारिश ने खोल दी जल निकासी व्यवस्था की पोल; लोगों ने पूछा—हर साल वही जलभराव, आखिर समाधान कब?

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा में शुक्रवार को हुई तेज आंधी और मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर शहर की जल निकासी व्यवस्था की हकीकत सामने ला दी। कुछ घंटों की बारिश ने ही कई प्रमुख मार्गों और अंडरपासों को जलमग्न कर दिया। सबसे ज्यादा परेशानी गुलिस्तानपुर अंडरपास (मिग्सन सोसाइटी के पास) और पैरामाउंट सोसाइटी के निकट स्थित अंडरपास में देखने को मिली, जहां भारी मात्रा में पानी भर जाने के कारण यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं और हजारों वाहन घंटों तक जाम में फंसे रहे।
बारिश थमने के बाद भी हालात सामान्य होने में लंबा समय लग गया। ऑफिस से लौट रहे कर्मचारियों, स्कूल वाहनों, स्थानीय निवासियों और रोजाना सफर करने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कई वाहन पानी में फंस गए, जबकि दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
कुछ घंटों की बारिश और अंडरपास बने ‘वाटर पार्क’
शुक्रवार दोपहर बाद मौसम ने अचानक करवट ली और तेज हवाओं के साथ जोरदार बारिश शुरू हो गई। बारिश का असर कुछ ही देर में शहर के निचले इलाकों और अंडरपासों पर दिखाई देने लगा। गुलिस्तानपुर और पैरामाउंट अंडरपास में तेजी से पानी भरने लगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद दोनों अंडरपासों में पानी का स्तर इतना बढ़ गया कि वाहनों की आवाजाही लगभग बंद हो गई। कई कार चालक बीच रास्ते में ही रुक गए, जबकि बाइक सवारों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ा। लोगों ने कहा कि हर साल बारिश के दौरान यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं निकाला गया। इस बार भी बारिश ने प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
6 घंटे जाम में फंसे लोग, बढ़ी परेशानी
जलभराव के कारण दोनों अंडरपासों के आसपास लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। वाहनों की कतारें कई किलोमीटर तक पहुंच गईं। ऑफिस से घर लौट रहे लोगों को सामान्य समय से कई गुना अधिक समय सड़क पर बिताना पड़ा।
कुछ लोगों ने बताया कि जहां सामान्य दिनों में 15 से 20 मिनट का सफर होता है, वहीं शुक्रवार को उसी दूरी को तय करने में एक घंटे से अधिक का समय लग गया। कई स्कूली बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों को भी जाम की वजह से परेशानी झेलनी पड़ी। यातायात पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया, लेकिन पानी भरे होने के कारण यातायात को पूरी तरह सामान्य करने में काफी समय लगा।
मानसून से पहले ही खुल गई तैयारियों की पोल
विशेषज्ञों और स्थानीय निवासियों का मानना है कि यदि प्री-मानसून बारिश में ही यह हाल है, तो आगामी मानसून के दौरान स्थिति और गंभीर हो सकती है। शहर के कई हिस्सों में नालों की सफाई, ड्रेनेज नेटवर्क और जल निकासी व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।
निवासियों का कहना है कि अंडरपास जैसे संवेदनशील स्थानों पर विशेष जल निकासी प्रणाली होनी चाहिए, ताकि भारी बारिश के दौरान पानी जमा न हो। लेकिन हर साल एक जैसी समस्या सामने आने से यह स्पष्ट होता है कि मौजूदा व्यवस्था पर्याप्त नहीं है।
स्थानीय लोगों में नाराजगी
गुलिस्तानपुर, पैरामाउंट, सेक्टर-ओमिक्रॉन, ग्रेटर नोएडा वेस्ट और आसपास की सोसाइटियों के निवासियों ने इस स्थिति पर नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि ग्रेटर नोएडा को आधुनिक और विश्वस्तरीय शहर के रूप में विकसित किया जा रहा है, लेकिन बारिश के दौरान बुनियादी सुविधाओं की स्थिति चिंता पैदा करती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से विकसित बुनियादी ढांचे का वास्तविक परीक्षण बारिश के दौरान होता है और ऐसे समय में बार-बार जलभराव की घटनाएं विकास कार्यों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती हैं।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से उठी स्थायी समाधान की मांग
नागरिकों और आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण से मांग की है कि केवल अस्थायी इंतजामों के बजाय स्थायी समाधान पर काम किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि— अंडरपासों में हाई-कैपेसिटी ड्रेनेज सिस्टम लगाया जाए। बारिश से पहले नालों और सीवर लाइनों की विशेष सफाई हो। जलभराव वाले क्षेत्रों की पहचान कर विशेष कार्ययोजना बनाई जाए। अंडरपासों में ऑटोमैटिक वाटर पंपिंग सिस्टम स्थापित किया जाए।
शहर के विकास मॉडल पर भी उठे सवाल
ग्रेटर नोएडा को देश के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों में गिना जाता है। यहां बड़ी संख्या में आवासीय परियोजनाएं, औद्योगिक इकाइयां और संस्थान मौजूद हैं। लेकिन बारिश के दौरान बार-बार सामने आने वाली जलभराव की घटनाएं इस विकास मॉडल की चुनौतियों को भी उजागर करती हैं। नागरिकों का कहना है कि स्मार्ट सिटी की अवधारणा केवल चौड़ी सड़कों और ऊंची इमारतों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि ऐसी बुनियादी व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित होनी चाहिए जो विपरीत परिस्थितियों में भी सुचारु रूप से काम करें।
लोगों की उम्मीद—अबकी बार मिले स्थायी राहत
बारिश के बाद हालात भले ही धीरे-धीरे सामान्य हो गए हों, लेकिन नागरिकों की चिंता बनी हुई है। सभी की निगाहें अब ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पर टिकी हैं कि वह इस समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाता है।
यदि मानसून से पहले प्रभावी कार्यवाही नहीं हुई, तो आने वाले महीनों में जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या और गंभीर रूप ले सकती है। ऐसे में शहरवासियों की मांग है कि इस बार केवल आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाला समाधान मिले।



