BJP & RSS News : “जाटलैंड में जाट पर ब्रेक!, ”2027 से पहले BJP का सबसे बड़ा दांव, पश्चिमी यूपी की कुर्सी पर कौन? संघ ने खींची अघोषित लक्ष्मण रेखा, संघ का बड़ा संकेत: “इस बार जाट नहीं”, क्लाइमैक्स ट्विस्ट: मजबूरी में जाट?, कुर्सी सिर्फ पद नहीं, भविष्य की चाबी है

लखनऊ/पश्चिमी यूपी, रफ़्तार टूडे। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) संगठनात्मक स्तर पर बड़े और निर्णायक बदलावों की ओर बढ़ चुकी है। प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर पंकज चौधरी की ताजपोशी के बाद अब पार्टी की नजर उस पद पर है, जिसे “पश्चिमी यूपी की सत्ता का रिमोट कंट्रोल” कहा जाता है—पश्चिमी उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय अध्यक्ष।
यह कोई सामान्य संगठनात्मक पद नहीं है। राजनीतिक गलियारों में इसे यूपी के किसी कैबिनेट मंत्री से कम प्रभावशाली नहीं माना जाता। वजह साफ है—इस क्षेत्रीय अध्यक्ष के अंतर्गत 26 लोकसभा सीटें और करीब 136 विधानसभा सीटें आती हैं। यानी 2027 का रास्ता काफी हद तक इसी कुर्सी से होकर गुजरता है।
संघ का बड़ा संकेत: “इस बार जाट नहीं”
सूत्रों के मुताबिक, इस बार RSS ने जाटलैंड में ‘जाट चेहरे’ पर अस्थायी वीटो लगा दिया है। लंबे समय से पश्चिमी यूपी की राजनीति जाट केंद्रित रही है, लेकिन बदलते सामाजिक समीकरण और चुनावी गणित ने संघ को नॉन-जाट सोशल इंजीनियरिंग की ओर सोचने पर मजबूर कर दिया है।
संघ का आकलन है कि पश्चिमी यूपी में ब्राह्मण, वैश्य, OBC, दलित और गुर्जर वर्ग खुद को राजनीतिक रूप से हाशिये पर महसूस कर रहा है। यही वजह है कि भाजपा अब संतुलन साधने वाले चेहरे की तलाश में है।
ब्राह्मण बनाम OBC बनाम वैश्य: नया सोशल एक्सपेरिमेंट
भाजपा के भीतर इस समय सबसे बड़ा सवाल यही है—
अगर जाट नहीं, तो कौन?
ब्राह्मण कार्ड: बसंत त्यागी सबसे आगे
ब्राह्मण चेहरे के तौर पर बसंत त्यागी का नाम सबसे ऊपर चल रहा है।
पार्टी सूत्र बताते हैं कि— उन्हें संघ के क्षेत्र प्रचार तंत्र का मौन समर्थन प्राप्त है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष का सीधा आशीर्वाद माना जा रहा है। ब्राह्मण समाज में यह भावना मजबूत है कि उन्हें लंबे समय से संगठनात्मक रूप से “ठगा गया”
इसी “ठगे हुए ब्राह्मण वर्ग” की नाराज़गी को साधने के लिए बसंत त्यागी को एक संतुलित, शांत और संगठनात्मक चेहरा माना जा रहा है।
OBC दांव: सूर्य प्रकाश पाल
पिछड़े वर्ग से सूर्य प्रकाश पाल दूसरा मजबूत नाम हैं।
इनके पक्ष में सबसे बड़ा फैक्टर है—
RSS का सीधा आशीर्वाद
संगठन में जमीनी पकड़
OBC वोट बैंक में स्वीकार्यता
संघ का एक वर्ग मानता है कि यदि 2027 में भाजपा को पश्चिमी यूपी में साइलेंट वोट बैंक को साधना है, तो OBC चेहरे पर दांव फायदेमंद हो सकता है।
वैश्य + ब्राह्मण संतुलन: विकास अग्रवाल
इस रेस में एक नाम चुपचाप लेकिन मजबूती से आगे बढ़ रहा है— विकास अग्रवाल
वर्तमान में पश्चिमी यूपी संगठन के महामंत्री
संघ के क्षेत्र विचारक महेंद्र जी के करीबी बताए जाते हैं
खास बात यह है कि ब्राह्मण वर्ग भी संतुष्ट, व्यापारी और वैश्य समाज भी खुश, यही वजह है कि विकास अग्रवाल को “सेफ और बैलेंस्ड चॉइस” माना जा रहा है।
गुर्जर कार्ड: अशोक कटारिया
गुर्जर समाज से पूर्व कैबिनेट मंत्री अशोक कटारिया भी इस रेस में हैं।
हालांकि उनकी स्थिति फिलहाल योगी कैबिनेट पर निर्भर करती है—यदि उन्हें कैबिनेट में जगह नहीं मिलती
तो भाजपा गुर्जर कार्ड खेल सकती है
उनकी ओजस्वी भाषण शैली, भीड़ पर पकड़ और जमीनी अनुभव उन्हें मजबूत दावेदार बनाता है।
दलित दांव: संघ की नर्सरी से निकला नाम
सबसे दिलचस्प एंट्री दलित चेहरे की हुई है।
सूत्रों के अनुसार— यह नेता संघ की नर्सरी से निकला हुआ है
भाजपा दलित + पिछड़ा समीकरण साधने के लिए इसे बड़ा दांव बना सकती है
नाम अभी सार्वजनिक नहीं है, लेकिन यह संकेत साफ है कि भाजपा इस बार परंपरागत फार्मूले से बाहर सोच रही है।
क्लाइमैक्स ट्विस्ट: मजबूरी में जाट?
अब आते हैं इस सियासी फिल्म के क्लाइमैक्स पर।
अगर भाजपा की इंटरनल सर्वे रिपोर्ट यह कहती है कि—
“पश्चिमी यूपी में बिना जाट चेहरे के न लोकसभा जीती जा सकती है, न विधानसभा”
तो फिर जाट को नजरअंदाज करना राजनीतिक आत्मघात हो सकता है।
ऐसे में जाट समाज से केवल एक ही नाम बचता है— मोहित बेनीवाल
पूर्व में क्षेत्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं
B.L. संतोष, सुनील बंसल और अश्विनी वैष्णव का आशीर्वाद, संगठन और चुनाव—दोनों का अनुभव
यानी अगर जाट बनाना मजबूरी बनी, तो मोहित बेनीवाल अंतिम विकल्प होंगे।
कुर्सी सिर्फ पद नहीं, भविष्य की चाबी है
पश्चिमी यूपी का क्षेत्रीय अध्यक्ष कोई नाम भर नहीं, बल्कि 2027 की दिशा तय करने वाला पद है।
संघ और भाजपा इस बार—
जातिगत संतुलन
नाराज़ वर्गों की भरपाई
और चुनावी गणित
तीनों को ध्यान में रखकर फैसला लेने जा रही है।



