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DPS Greater Noida West School : वाद्य तरंगिणी 2025 सुरों, साधना और संस्कृति का संगम, युवा प्रतिभाओं ने शास्त्रीय धुनों से बाँधा समां, ग्रैंड फिनाले में दमदार प्रस्तुतियाँ, शास्त्रीय वाद्यों की गूंज और रागों का जादू

ग्रेटर नोएडा वेस्ट, रफ़्तार टुडे।
भारतीय शास्त्रीय संगीत की परंपरा और युवा पीढ़ी की साधना को एक मंच पर लाने वाला भव्य आयोजन “वाद्य तरंगिणी 2025 – इंटर डीपीएस इंडियन क्लासिकल ऑर्केस्ट्रा फेस्टिवल” दिल्ली पब्लिक स्कूल, नॉलेज पार्क-V में संपन्न हुआ। यह आयोजन सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भारतीय संगीत की आत्मा, संस्कृति और राग-रागिनियों की जीवंत परंपरा को सम्मान देने का अद्भुत प्रयास था।

शास्त्रीय वाद्यों की गूंज और रागों का जादू

30 अगस्त को हुए उद्घाटन समारोह ने माहौल को शास्त्रीय धुनों से सराबोर कर दिया। देशभर से आए डीपीएस विद्यालयों की टीमों ने सितार, तबला, बांसुरी, सारंगी और संतूर जैसे वाद्यों पर अपनी प्रस्तुतियाँ दीं। जब राग भैरव, बिलावल और कल्याण की स्वरलहरियाँ गूंजीं तो सभागार मंत्रमुग्ध हो गया।

निर्णायक मंडल में तबला वादक पं. अनुप घोष, सुप्रसिद्ध वायलिन वादक डॉ. रंजन कुमार, और युवा शास्त्रीय गायक डॉ. असीक कुमार शामिल रहे। उन्होंने न सिर्फ विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों को परखा बल्कि उनकी मेहनत और समर्पण की भी सराहना की।

विद्यालय परिवार और प्राचार्या का भावपूर्ण संदेश

विद्यालय की प्राचार्या सुश्री मंजु वर्मा ने कहा –
“वाद्य तरंगिणी 2025 केवल एक फेस्टिवल नहीं, बल्कि यह हमारे विद्यार्थियों की साधना, मेहनत और भारतीय संगीत परंपरा के प्रति उनकी गहरी निष्ठा का प्रमाण है। ऐसे आयोजन युवा पीढ़ी में भारतीय संस्कृति के प्रति प्रेम और गर्व का भाव जगाते हैं।”

ग्रैंड फिनाले में दमदार प्रस्तुतियाँ

30 अगस्त को हुए समापन समारोह में 46 विद्यालयों में से चयनित 16 श्रेष्ठ टीमों ने हिस्सा लिया। ग्रैंड फिनाले का शुभारंभ दीप प्रज्वलन और कबीर भजन से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिकता से भर दिया।

कार्यक्रम की विशिष्ट आकर्षण प्रस्तुति “नृत्य तराना” रही, जो पं. बिरजू महाराज को समर्पित थी। जब ताल और सुर का संगम नृत्य के साथ हुआ तो दर्शकों ने खड़े होकर तालियाँ बजाईं।

अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति

मुख्य अतिथि श्री वी.के. शुंगलू (उपाध्यक्ष, डीपीएस सोसाइटी), विशिष्ट अतिथि श्रीमती मधु शुंगलू, कार्यकारी निदेशक सुश्री संध्या अवस्थी और संयुक्त निदेशक सुश्री डॉली चनाना की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम की शोभा और बढ़ा दी।

उन्होंने सभी प्रतिभागियों की सराहना करते हुए कहा कि –
“भारतीय संगीत हमारी जड़ों की पहचान है। ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को परंपरा से जोड़ने का माध्यम हैं।”

विजेताओं का सम्मान और आभार

फेस्टिवल के विजेताओं को मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों ने सम्मानित किया। उनकी मेहनत, लगन और प्रतिभा को मंच से सराहना मिली।

अंत में विद्यालय परिवार ने निर्णायक मंडल, अतिथियों, प्रतिभागियों और सभी सहयोगियों के प्रति हार्दिक आभार प्रकट किया।

क्यों है यह आयोजन खास?

यह राष्ट्रीय स्तर का मंच है, जहाँ भारतीय शास्त्रीय संगीत और युवा पीढ़ी का संगम होता है। विद्यार्थियों में टीम भावना, साधना और संगीत के प्रति गहरी समझ विकसित होती है।यह आयोजन केवल प्रतियोगिता नहीं बल्कि संस्कृति के संरक्षण और प्रसार का प्रयास भी है।

“वाद्य तरंगिणी 2025” ने साबित कर दिया कि भारतीय शास्त्रीय संगीत आज भी युवाओं के दिलों में गहराई तक जीवित है। सुरों की यह साधना और वाद्यों की तरंगें आने वाले समय में भारतीय संस्कृति को और मजबूत करेंगी।

Raftar Today
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