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BJP Breaking News : भाजपा ग्रेटर नोएडा मंडल में उठी बगावत की आवाज़, कार्यकर्ताओं ने मंडल अध्यक्ष पर लगाए गंभीर आरोप, सोशल मीडिया पर गुस्से का विस्फोट, “स्थानीय राजनीति को खत्म कर दूंगा”, भेदभाव और गंदा व्यवहार” आरोप

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ग्रेटर नोएडा मंडल में इन दिनों भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने मंडल अध्यक्ष अर्पित तिवारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया और फेसबुक पर जमकर नाराज़गी जताई है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि मंडल अध्यक्ष न केवल उन्हें कार्यक्रमों और अभियानों से दूर रखते हैं, बल्कि उनके साथ अपमानजनक व्यवहार भी करते हैं। यह मामला अब चर्चा का विषय बन चुका है और स्थानीय राजनीति में गहमागहमी तेज हो गई है।

“स्थानीय कार्यकर्ताओं से हो रहा भेदभाव और गंदा व्यवहार” – आरोप

ग्रेटर नोएडा मंडल के कई वरिष्ठ और पूर्व पदाधिकारियों का आरोप है कि मंडल अध्यक्ष अर्पित तिवारी लगातार स्थानीय कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर रहे हैं।
पूर्व मंडल टीम के महामंत्री गजेंद्र दत्त ने कहा –
“भारतीय जनता पार्टी में पहली बार ऐसा हो रहा है कि स्थानीय कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया गया है। न तो किसी कार्यक्रम की सूचना दी जाती है और न किसी अभियान के बारे में अवगत कराया जाता है। स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ गंदा व्यवहार किया जा रहा है, जिससे कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट रहा है।”

“स्थानीय राजनीति को खत्म कर दूंगा” – बड़ा आरोप

पूर्व मंडल टीम के सदस्य राजेश शर्मा ने और भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मंडल अध्यक्ष अर्पित तिवारी, जिनका संबंध फिरोजाबाद से बताया जा रहा है, ने साफ-साफ कहा है –
“मैं यहां ग्रेटर नोएडा के स्थानीय कार्यकर्ताओं की राजनीति खत्म कर दूंगा। न तो उन्हें किसी कार्यक्रम में शामिल करूंगा और न किसी अभियान की सूचना दूंगा। सारी टीम मैंने अपने हिसाब से बनाई है।” राजेश शर्मा का कहना है कि इस तरह का रवैया पार्टी की जड़ों को कमजोर कर रहा है।

सोशल मीडिया पर कार्यकर्ताओं का फूटा गुस्सा

फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कार्यकर्ताओं ने अपने गुस्से को खुलकर जाहिर किया है। उन्होंने पोस्ट और कमेंट्स में लिखा है कि यह स्थिति बेहद निराशाजनक है। खासकर तब, जब 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होने वाले हैं।
कई कार्यकर्ताओं ने कहा कि “स्थानीय कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज करना पार्टी के भविष्य के लिए घातक साबित हो सकता है।” उनका कहना है कि बाहरी लोगों की ताकत ज्यादा दिन तक नहीं चल सकती। असली ताकत उन लोगों में है जो सालों से पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर मेहनत कर रहे हैं।

स्थानीय कार्यकर्ताओं का महत्व क्यों?

ग्रेटर नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में भाजपा ने बीते वर्षों में स्थानीय कार्यकर्ताओं की मेहनत के दम पर ही संगठन को मजबूत बनाया है। चुनाव के समय यही कार्यकर्ता बूथ स्तर तक पार्टी का संदेश और नीतियां लेकर जाते हैं।
अगर इन्हें दरकिनार किया गया तो इसका असर सीधे-सीधे पार्टी की चुनावी रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर पड़ेगा। कार्यकर्ताओं का कहना है कि भाजपा की सफलता का राज हमेशा उसकी “बूथ मैनेजमेंट स्ट्रेंथ” रही है, और अगर यही ढांचा कमजोर किया गया तो 2027 के चुनाव में पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।

मंडल अध्यक्ष से संपर्क की कोशिश नाकाम

जब इस पूरे विवाद में मंडल अध्यक्ष अर्पित तिवारी का पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन कॉल रिसीव नहीं किया। उनकी चुप्पी ने कार्यकर्ताओं की नाराज़गी को और बढ़ा दिया है। कई लोग इसे “मौन स्वीकृति” के रूप में भी देख रहे हैं।

विश्लेषण: 2027 चुनाव पर क्या होगा असर?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद भाजपा के लिए चेतावनी की घंटी है। यदि स्थानीय कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा तो बूथ स्तर पर पार्टी कमजोर होगी। विपक्ष इस असंतोष का फायदा उठाने में देर नहीं करेगा।

बाहरी बनाम स्थानीय का मुद्दा पार्टी के भीतर फूट को और गहरा कर सकता है।

विशेषज्ञ कहते हैं कि भाजपा नेतृत्व को जल्द से जल्द इस मामले को सुलझाना चाहिए, वरना 2027 विधानसभा चुनावों में ग्रेटर नोएडा जैसे क्षेत्रों में पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

भाजपा ग्रेटर नोएडा मंडल में मंडल अध्यक्ष अर्पित तिवारी के खिलाफ उठ रही नाराजगी अब संगठनात्मक संकट का रूप लेती दिख रही है। स्थानीय कार्यकर्ता पार्टी की रीढ़ माने जाते हैं और यदि उनका ही सम्मान नहीं होगा तो चुनावी परिणाम प्रभावित होना तय है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि प्रदेश और जिला नेतृत्व इस विवाद पर क्या कदम उठाता है और क्या कार्यकर्ताओं का विश्वास दोबारा हासिल कर पाएगा।

रफ़्तार टुडे की न्यूज़
Raftar Today
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