Jai Ho On MP Dr Mahesh Sharma News : 1857 की क्रांति के बलिदानियों को मिलेगी ऐतिहासिक श्रद्धांजलि?, बोड़ाकी रेलवे जंक्शन का नाम रखने की उठी मांग – राजा राव उमराव सिंह को समर्पित हो जंक्शन, जय हो संस्था ने सांसद डॉ. महेश शर्मा को सौंपा ज्ञापन

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टुडे।
दिल्ली-एनसीआर का सबसे बड़ा और अत्याधुनिक बोड़ाकी रेलवे जंक्शन अब केवल एक ट्रांसपोर्ट हब ही नहीं, बल्कि देशभक्ति और बलिदान की पहचान भी बन सकता है। दरअसल, “जय हो” नामक सामाजिक संस्था ने इस जंक्शन का नाम 1857 की क्रांति के महानायक राजा राव उमराव सिंह के नाम पर रखने की मांग उठाई है। संस्था के पदाधिकारियों ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और गौतमबुद्धनगर से सांसद डॉ. महेश शर्मा को इस संबंध में एक ज्ञापन सौंपा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 1857 की क्रांति और दादरी का योगदान
भारत की आज़ादी की पहली बड़ी लड़ाई यानी 1857 की क्रांति को देश के इतिहास में अमर स्थान प्राप्त है। यह केवल एक बगावत नहीं थी, बल्कि स्वतंत्रता की लौ जलाने वाली चिंगारी थी।
दादरी क्षेत्र ने इस संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। कटहेरा गांव निवासी राजा राव उमराव सिंह को गदर का नेता चुना गया था। उनके नेतृत्व में दादरी के रणबांकुरों ने अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोला और उन्हें कड़ा सबक सिखाया।
इतिहास गवाह है कि जब अंग्रेज इस विद्रोह को दबाने में नाकाम रहे, तो उन्होंने बदले की भावना से काम करते हुए राजा राव उमराव सिंह समेत दादरी के 84 वीर क्रांतिकारियों को बुलंदशहर के काला आम पर फांसी पर लटका दिया।
क्यों बोड़ाकी रेलवे जंक्शन का नाम होना चाहिए उनके नाम पर?
आज जिस भूमि पर दिल्ली-एनसीआर का सबसे बड़ा रेलवे जंक्शन बोड़ाकी बन रहा है, वही भूमि उन वीर क्रांतिकारियों की तपोभूमि रही है। जय हो संस्था का कहना है कि अगर इस जंक्शन का नाम राजा राव उमराव सिंह के नाम पर रखा जाता है, तो यह न केवल उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी 1857 की क्रांति और बलिदानों की गाथा याद दिलाती रहेगी।
ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम
शनिवार देर रात जय हो संस्था के पदाधिकारियों ने सांसद डॉ. महेश शर्मा से मुलाकात की और एक लिखित ज्ञापन सौंपा। संस्था के अध्यक्ष दिनेश भाटी एडवोकेट ने बताया कि स्वतंत्रता दिवस पर संस्था द्वारा एक ऐतिहासिक प्रेरणा यात्रा आयोजित की गई थी, जिसकी सफलता से प्रेरित होकर सांसद ने सभी सदस्यों को अपने कार्यालय बुलाया।
यहीं पर संस्था ने यह मांग उठाई कि बोड़ाकी जंक्शन का नाम “राजा राव उमराव सिंह रेलवे जंक्शन” रखा जाए और इसे 1857 की क्रांति के बलिदानियों को समर्पित किया जाए।
सांसद डॉ. महेश शर्मा का रुख
सांसद डॉ. महेश शर्मा ने संस्था की इस मांग पर सहमति जताई और कहा कि वे स्वयं जल्द ही रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात करेंगे और इस मांग को पूरा कराने का प्रयास करेंगे।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि वे स्वयं जल्द ही दादरी तहसील स्थित शहीद स्तंभ पर जाएंगे, वहां नमन करेंगे और स्मारक का निरीक्षण करेंगे। निरीक्षण के बाद शहीद स्मारक के जीर्णोद्धार की योजना भी बनाई जाएगी।

संस्था की ओर से रखे गए तर्क
संस्थापक संयोजक कपिल शर्मा एडवोकेट ने बताया कि 1857 की क्रांति में दादरी क्षेत्र के रणबांकुरों ने अंग्रेजी हुकूमत को झकझोर दिया था। राजा राव उमराव सिंह और उनके साथियों का बलिदान इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज है।
उन्होंने कहा कि कटहेरा, बोड़ाकी, पल्ला और रामगढ़ जैसी भूमि उस बलिदान की गवाह है। ऐसे में इस रेलवे जंक्शन का नामकरण अगर उन बलिदानियों के नाम पर होता है तो यह पूरे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय होगा।
देशभक्ति से भरा माहौल
ज्ञापन सौंपने के कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति और उत्साह का माहौल देखने को मिला। सांसद ने स्वयं सभी कार्यकर्ताओं को मिठाई खिलाई और उनके कार्यों की सराहना की। उन्होंने जय हो संस्था को भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
उपस्थित लोग
इस मौके पर संस्था के संरक्षक सुधीर वत्स, कपिल चौधरी, रविंद्र रौसा, संयोजक संदीप भाटी, महासचिव परमानंद कौशिक, सुनील कश्यप, दीपक शर्मा एडवोकेट, सुरजीत विकल, विवेक रावल, सचिन शर्मा, पांचादित्य शर्मा, यश दीक्षित सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
अगर बोड़ाकी रेलवे जंक्शन का नाम राजा राव उमराव सिंह के नाम पर रखा जाता है तो यह न केवल स्थानीय जनता के लिए गर्व की बात होगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी याद दिलाएगा कि भारत की आज़ादी का रास्ता बलिदानों की नींव पर बना है।
यह नामकरण इतिहास को जिंदा रखने और बलिदानियों के सम्मान में एक अनोखी पहल होगी। अब सबकी नजरें सांसद और रेल मंत्री पर टिकी हैं कि कब यह मांग पूरी होती है।



