Breaking News : "आगमन" से शुरू हुई सफलता की नई उड़ान, स्पर्श ग्लोबल बिजनेस स्कूल में गूंजा नेतृत्व, PGDM बैच 2026–28 का भव्य स्वागत, नवाचार, राष्ट्र निर्माण का संदेश, सांसद डॉ. दिनेश शर्मा बोले ‘डिग्री नहीं, व्यक्तित्व, मूल्य बनाते हैं असली लीडर’, कॉर्पोरेट जगत की बदलती जरूरतों से कराया परिचित, डॉ. अमित सक्सेना बोले— केवल मैनेजर नहीं, जिम्मेदार लीडर तैयार करना लक्ष्य
स्पर्श यूनिवर्स के चेयरपर्सन शिशिर अग्रवाल ने विद्यार्थियों को जिज्ञासु, सकारात्मक और परिवर्तन के अनुरूप स्वयं को ढालने वाला व्यक्तित्व विकसित करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि मजबूत प्रोफेशनल नेटवर्क, संतुलित जीवनशैली, निरंतर आत्मविकास और सीखने की ललक किसी भी विद्यार्थी को वैश्विक स्तर पर सफल बना सकती है।

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा के शिक्षा जगत में एक बार फिर उत्साह, ऊर्जा और भविष्य की नई उम्मीदों का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब स्पर्श ग्लोबल बिजनेस स्कूल (SGBS) ने अपने प्रतिष्ठित ओरिएंटेशन कार्यक्रम “आगमन” के तीसरे संस्करण का भव्य आयोजन कर PGDM बैच 2026–28 के विद्यार्थियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। यह आयोजन केवल नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत भर नहीं था, बल्कि भविष्य के ऐसे युवा प्रबंधकों को तैयार करने का संकल्प भी था जो उद्योग, समाज और राष्ट्र निर्माण में नेतृत्वकारी भूमिका निभा सकें। कार्यक्रम में शिक्षा, उद्योग, प्रशासन और सार्वजनिक जीवन से जुड़े कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों की गरिमामयी उपस्थिति ने इसे और भी विशेष बना दिया। मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने अपने प्रेरणादायी संबोधन से विद्यार्थियों में नई ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने कहा कि आने वाला समय केवल ज्ञान का नहीं, बल्कि नेतृत्व, नवाचार, नैतिकता और मानवीय मूल्यों का होगा। इसलिए विद्यार्थियों को केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसा व्यक्तित्व विकसित करना चाहिए जो समाज को दिशा देने में सक्षम हो।
दीप प्रज्वलन के साथ ज्ञान और नेतृत्व की नई यात्रा का शुभारंभ
कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके बाद नवप्रवेशी विद्यार्थियों, उनके अभिभावकों, संकाय सदस्यों तथा अतिथियों का स्वागत किया गया। पूरे सभागार में उत्साह, सकारात्मक ऊर्जा और नई शुरुआत का माहौल देखने को मिला। विद्यार्थियों के चेहरों पर भविष्य के सपनों की चमक साफ दिखाई दे रही थी।

डॉ. दिनेश शर्मा का संदेश— सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं
अपने संबोधन में डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि आज की प्रतिस्पर्धा केवल अंकों की नहीं, बल्कि कौशल, चरित्र और नेतृत्व क्षमता की है। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, ईमानदारी, निरंतर सीखने की आदत और सकारात्मक सोच अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है और इस परिवर्तन में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। यदि युवा नवाचार, तकनीक और नैतिक मूल्यों को साथ लेकर आगे बढ़ेंगे तो भारत विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में और तेजी से आगे बढ़ेगा। उन्होंने भारतीय भाषाओं के महत्व पर भी विशेष बल दिया और कहा कि मातृभाषा और अंग्रेजी दोनों पर समान पकड़ भविष्य की सफलता का मजबूत आधार है। उन्होंने चीन, जापान, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन देशों ने अपनी भाषा और संस्कृति को अपनाकर विश्व में विशेष पहचान बनाई है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की आर्थिक या पारिवारिक पृष्ठभूमि उसकी सफलता तय नहीं करती, बल्कि उसकी मेहनत, सीखने की इच्छा और आत्मविश्वास ही उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हैं।
ईमानदारी और नैतिक मूल्यों पर विशेष जोर
भारत सरकार की प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त (IRS) सुश्री सुनीता सिंह ने कहा कि तकनीक के इस युग में केवल तकनीकी दक्षता पर्याप्त नहीं है। भविष्य उन्हीं लोगों का होगा जिनके भीतर ईमानदारी, पारदर्शिता और नैतिकता होगी। उन्होंने विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के दौर में जीवन कौशल विकसित करने, सही निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने तथा नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रहने का संदेश दिया। उनका कहना था कि अच्छा प्रोफेशनल बनने से पहले अच्छा इंसान बनना आवश्यक है।
कॉर्पोरेट जगत की बदलती जरूरतों से कराया परिचित
ग्रांट थॉर्नटन भारत के ऑफिस मैनेजिंग पार्टनर राहुल कपूर ने कहा कि वैश्विक उद्योग जगत तेजी से बदल रहा है। आज कंपनियां ऐसे युवाओं की तलाश में हैं जो नई तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता रखते हों। उन्होंने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपने करियर के दौरान सीखना कभी बंद न करें, क्योंकि निरंतर सीखने वाले ही भविष्य के सफल प्रोफेशनल बनते हैं।
चेयरपर्सन शिशिर अग्रवाल ने बताए सफलता के चार सूत्र
स्पर्श यूनिवर्स के चेयरपर्सन शिशिर अग्रवाल ने विद्यार्थियों को जिज्ञासु, सकारात्मक और परिवर्तन के अनुरूप स्वयं को ढालने वाला व्यक्तित्व विकसित करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि मजबूत प्रोफेशनल नेटवर्क, संतुलित जीवनशैली, निरंतर आत्मविकास और सीखने की ललक किसी भी विद्यार्थी को वैश्विक स्तर पर सफल बना सकती है।

डॉ. अमित सक्सेना बोले— केवल मैनेजर नहीं, जिम्मेदार लीडर तैयार करना लक्ष्य
स्पर्श ग्लोबल बिजनेस स्कूल के सीईओ (एजुकेशन) डॉ. अमित सक्सेना ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार और सक्षम नेतृत्वकर्ताओं का निर्माण करना है जो उद्योग, समाज और राष्ट्र के लिए मूल्य सृजित कर सकें। उन्होंने बताया कि संस्थान अनुभवात्मक शिक्षा, उद्योग सहभागिता, कॉर्पोरेट मेंटरशिप, नवाचार आधारित शिक्षण और वैश्विक एक्सपोजर के माध्यम से विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करता है।
वैश्विक सहयोग से मिलेगा अंतरराष्ट्रीय अनुभव
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को संस्थान की शैक्षणिक प्रणाली, उद्योग सहयोग, रिसर्च अवसरों, स्टूडेंट क्लब, नेतृत्व विकास कार्यक्रम और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। संस्थान का सहयोग नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर (NUS), ENAI बिजनेस स्कूल (स्पेन), फ्रैंकफर्ट स्कूल ऑफ फाइनेंस एंड मैनेजमेंट (जर्मनी), IIM नागपुर, AACSB, NISM तथा ग्रांट थॉर्नटन भारत जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों और संगठनों के साथ है, जिससे विद्यार्थियों को वैश्विक स्तर का शिक्षण अनुभव प्राप्त होगा।
नई पीढ़ी के नेतृत्वकर्ताओं के निर्माण का संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर संस्थान ने दोहराया कि उसका लक्ष्य केवल उत्कृष्ट प्रबंधन शिक्षा देना नहीं, बल्कि ऐसे युवा तैयार करना है जिनमें नेतृत्व क्षमता, सामाजिक जिम्मेदारी, नैतिक मूल्य और वैश्विक दृष्टिकोण का समन्वय हो।
“आगमन” कार्यक्रम ने नए विद्यार्थियों के लिए शिक्षा, नवाचार, नेतृत्व और करियर की अनंत संभावनाओं के द्वार खोल दिए। यह आयोजन न केवल एक ओरिएंटेशन कार्यक्रम रहा, बल्कि भविष्य के सफल प्रबंधकों और जिम्मेदार नागरिकों के निर्माण की दिशा में एक मजबूत शुरुआत भी साबित हुआ।



