Breaking Sharda HealthCare News : 6 घंटे… एक ऑपरेशन… और मौत को मात!, शारदाकेयर हेल्थसिटी के डॉक्टरों ने रचा मेडिकल इतिहास, एक ही सर्जरी में कैंसर, हार्ट वाल्व और 90% ब्लॉकेज का किया सफल इलाज, दिल्ली-एनसीआर में चिकित्सा क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि, 65 वर्षीय महिला को मिला नया जीवन; विशेषज्ञों की संयुक्त टीम ने असंभव लगने वाली चुनौती को बनाया संभव

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और ग्रेटर नोएडा स्थित शारदाकेयर हेल्थसिटी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अनुभवी डॉक्टरों, अत्याधुनिक तकनीक और सही रणनीति के बल पर सबसे जटिल बीमारियों को भी मात दी जा सकती है। अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसे दिल्ली-एनसीआर की बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है। अस्पताल की मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम ने 65 वर्षीय महिला के शरीर में मौजूद तीन गंभीर और जानलेवा बीमारियों का इलाज केवल एक ही ऑपरेशन के दौरान सफलतापूर्वक कर दिया। इस जटिल सर्जरी में डॉक्टरों ने शुरुआती चरण के ब्रेस्ट कैंसर, गंभीर एओर्टिक वॉल्व स्टेनोसिस और हृदय की मुख्य धमनी (एलएडी) में 90 प्रतिशत ब्लॉकेज का उपचार एक साथ किया। करीब छह घंटे तक चली इस हाई-रिस्क सर्जरी के बाद महिला पूरी तरह सुरक्षित रही और सफल रिकवरी के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अस्पताल का दावा है कि दिल्ली-एनसीआर में यह अपनी तरह का पहला मामला है, जिसमें इतनी गंभीर तीन बीमारियों का उपचार एक साथ किया गया।
सामान्य जांच में सामने आया मौत का बड़ा खतरा
अस्पताल के अनुसार मरीज एक सेवानिवृत्त मीडिया प्रोफेशनल हैं। उन्हें दाहिने स्तन में गांठ महसूस हुई, जिसके बाद जांच कराई गई। बायोप्सी रिपोर्ट में शुरुआती चरण के ब्रेस्ट कैंसर की पुष्टि हुई। सामान्य प्रक्रिया के तहत ऑपरेशन से पहले जब डॉक्टरों ने उनकी मेडिकल जांच की, तो हृदय की धड़कन में असामान्य आवाज सुनाई दी। इसके बाद इकोकार्डियोग्राफी और अन्य कार्डियक जांच कराई गईं।

जांच रिपोर्ट देखकर डॉक्टर भी चौंक गए। पता चला कि मरीज गंभीर एओर्टिक वॉल्व स्टेनोसिस से पीड़ित थीं, जिसमें हृदय का वाल्व अत्यधिक संकरा हो चुका था। इसके अलावा हृदय की सबसे महत्वपूर्ण धमनियों में से एक एलएडी (Left Anterior Descending Artery) में लगभग 90 प्रतिशत ब्लॉकेज भी था। सबसे आश्चर्यजनक बात यह रही कि मरीज को हार्ट डिजीज से जुड़े कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं हो रहे थे।
तीन विभाग नहीं, कई विशेषज्ञों ने मिलकर बनाई रणनीति
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने तुरंत कार्डियोलॉजी, कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी, कार्डियक एनेस्थीसिया और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभागों के वरिष्ठ विशेषज्ञों की संयुक्त टीम बनाई। लंबी चर्चा और मेडिकल विश्लेषण के बाद डॉक्टरों ने यह निर्णय लिया कि मरीज को अलग-अलग समय पर कई ऑपरेशन कराने के बजाय एक ही सर्जरी में तीनों बीमारियों का इलाज किया जाएगा।विशेषज्ञों का मानना था कि अलग-अलग ऑपरेशन करने से संक्रमण, एनेस्थीसिया और रिकवरी से जुड़े जोखिम कई गुना बढ़ सकते थे। इसलिए संयुक्त सर्जरी मरीज के लिए अधिक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प साबित हो सकती थी।
6 घंटे तक चला हाई-रिस्क ऑपरेशन
निर्धारित योजना के अनुसार ऑपरेशन शुरू किया गया। सबसे पहले मॉडिफाइड रेडिकल मास्टेक्टॉमी के माध्यम से कैंसरग्रस्त स्तन का सफल उपचार किया गया। इसके बाद कार्डियक सर्जनों ने एओर्टिक वॉल्व रिप्लेसमेंट कर खराब वाल्व को बदल दिया। इसके साथ ही हृदय की बंद हो चुकी धमनी में रक्त प्रवाह बहाल करने के लिए सिंगल ग्राफ्ट के साथ कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग (CABG) की गई। पूरी प्रक्रिया लगभग छह घंटे तक चली, जिसमें विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ लगातार समन्वय के साथ काम करते रहे।

समय पर जांच ने बचाई जान
सीनियर डायरेक्टर एवं हेड, कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग, डॉ. अखिल कुमार रुस्तगी ने बताया कि यह ऑपरेशन मेडिकल टीम के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने कहा कि यदि प्री-ऑपरेटिव जांच के दौरान हृदय संबंधी बीमारी का पता नहीं चलता, तो सामान्य कैंसर सर्जरी के दौरान मरीज की जान भी जा सकती थी। उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा में विस्तृत जांच और विभिन्न विशेषज्ञों के बीच समन्वय ही ऐसी जटिल परिस्थितियों में सफलता की कुंजी है।
कैंसर का भी समय पर हुआ इलाज
सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट एवं यूनिट हेड डॉ. हेमकांत वर्मा ने बताया कि संयुक्त सर्जरी के कारण कैंसर का इलाज समय पर हो गया और मरीज को अलग-अलग चरणों में कई बड़े ऑपरेशन कराने की आवश्यकता नहीं पड़ी। उन्होंने कहा कि यदि कैंसर का उपचार टाल दिया जाता तो बीमारी आगे बढ़ सकती थी, जबकि पहले केवल हार्ट सर्जरी करने से भी जोखिम बना रहता। इसलिए संयुक्त उपचार रणनीति मरीज के लिए सबसे उपयुक्त रही।

सफल रिकवरी के बाद अस्पताल से मिली छुट्टी
अस्पताल के अनुसार ऑपरेशन के बाद मरीज को आईसीयू में विशेषज्ञ निगरानी में रखा गया। धीरे-धीरे उनकी स्थिति में लगातार सुधार होता गया। पोस्ट-ऑपरेटिव जांच में नया एओर्टिक वॉल्व पूरी तरह सामान्य रूप से कार्य करता पाया गया तथा हृदय में रक्त प्रवाह भी सामान्य रहा। कैंसर सर्जरी के बाद भी रिकवरी संतोषजनक रही। स्वास्थ्य स्थिर होने के बाद महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
दिल्ली-एनसीआर के लिए बना नई उम्मीद का उदाहरण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि केवल एक सफल ऑपरेशन नहीं, बल्कि आधुनिक चिकित्सा में मल्टी-डिसिप्लिनरी ट्रीटमेंट मॉडल की बड़ी सफलता है। जब विभिन्न विभागों के विशेषज्ञ एक साथ मरीज के लिए रणनीति बनाते हैं, तो गंभीर से गंभीर बीमारियों का भी सुरक्षित उपचार संभव हो जाता है। शारदाकेयर हेल्थसिटी की यह सफलता ग्रेटर नोएडा ही नहीं बल्कि पूरे दिल्ली-एनसीआर के चिकित्सा क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक मानी जा रही है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि समय पर जांच, विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम और अत्याधुनिक तकनीक के समन्वय से कई जानलेवा बीमारियों को एक साथ हराया जा सकता है।



