शिक्षागौतमबुद्ध नगरग्रेटर नोएडाताजातरीन

Curious Mind News : “नन्हे कदम, बड़े सपने और सीखने का नया सूरज!”, क्यूरियस अर्ली इयर्स का दीक्षांत समारोह बना भावनाओं, नवाचार और भविष्य की उड़ान का उत्सव, “दीक्षांत नहीं, सपनों का उद्घाटन!” — जब मंच पर चमके नन्हे सितारे, नन्हे कदम, बड़ी उड़ान” — शिक्षा का बदलता स्वरूप

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। शिक्षा के आंगन में जब नन्हे कदम आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते हैं, तो वह सिर्फ एक समारोह नहीं बल्कि एक नई शुरुआत का संकेत होता है। ऐसा ही प्रेरणादायक और भावनाओं से भरा दृश्य देखने को मिला क्यूरियस अर्ली इयर्स के दीक्षांत समारोह में, जहां छोटे-छोटे बच्चों ने अपने जीवन की पहली शैक्षणिक यात्रा के पड़ाव को बड़े ही गर्व और उत्साह के साथ पार किया। यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों के लिए, बल्कि उनके अभिभावकों और शिक्षकों के लिए भी एक यादगार और भावुक क्षण बन गया।


“दीक्षांत नहीं, सपनों का उद्घाटन!” — जब मंच पर चमके नन्हे सितारे
कार्यक्रम का माहौल शुरुआत से ही उल्लास और ऊर्जा से भरा हुआ था। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे छोटे-छोटे विद्यार्थी जब मंच पर पहुंचे, तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। हर बच्चे के चेहरे पर आत्मविश्वास और खुशी साफ झलक रही थी, मानो वे अपने छोटे-छोटे सपनों को हकीकत में बदलने की ओर पहला कदम रख रहे हों।
दीक्षांत समारोह के दौरान विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए, जो उनके प्रारंभिक शिक्षा के सफल समापन का प्रतीक बने। यह पल कई अभिभावकों के लिए भावुक कर देने वाला था, क्योंकि उन्होंने अपने बच्चों को पहली बार इतने आत्मनिर्भर रूप में देखा।

वर्विडिया: सीखने का नया नजरिया” — शिक्षा में नवाचार का अनोखा प्रयोग
इस समारोह का सबसे खास आकर्षण रहा “वर्विडिया – बुद्धिमान अधिगम का जागरण” का औपचारिक परिचय। इस अभिनव शिक्षण पद्धति की संस्थापक सुश्री मीनाक्षी खुराना मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
उन्होंने अपने संबोधन में बताया कि वर्विडिया केवल एक शिक्षा पद्धति नहीं, बल्कि एक सोच है — जो बच्चों में जिज्ञासा, जागरूकता और स्वतंत्र सोच को विकसित करने पर आधारित है। यह प्रणाली पारंपरिक रटने वाली शिक्षा से हटकर बच्चों को समझने, सवाल करने और खोजने के लिए प्रेरित करती है।


“वर्विडिया स्पेस की एक झलक” नामक विशेष सत्र में अभिभावकों को इस नई शिक्षा प्रणाली के बारे में विस्तार से बताया गया। इस दौरान उन्होंने जाना कि कैसे यह मॉडल बच्चों के मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास को संतुलित तरीके से आगे बढ़ाता है।


स्कूल और परिवार का मजबूत रिश्ता” — अभिभावकों ने साझा किए अपने अनुभव
कार्यक्रम में अभिभावकों की भागीदारी भी बेहद उत्साहपूर्ण रही। कई अभिभावकों ने मंच पर आकर अपने अनुभव साझा किए और बताया कि कैसे क्यूरियस अर्ली इयर्स ने उनके बच्चों के व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव लाया है।
एक अभिभावक ने कहा, “हमने अपने बच्चे में जो आत्मविश्वास और जिज्ञासा देखी है, वह इस स्कूल के वातावरण का ही परिणाम है। यहां शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका सिखाया जाता है।”
इन भावनात्मक विचारों ने इस समारोह को और भी खास बना दिया और यह स्पष्ट कर दिया कि शिक्षा में स्कूल और परिवार की साझेदारी कितनी महत्वपूर्ण होती है।

हर बच्चे में छिपी है एक खास पहचान” — निदेशक का विज़न
संस्था की निदेशक एवं संस्थापक सुश्री दीपा रानी ने इस अवसर पर अपने विचार साझा करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य बच्चों को एक ऐसा वातावरण देना है, जहां वे स्वतंत्र रूप से सीख सकें, सोच सकें और अपनी रचनात्मकता को विकसित कर सकें।
उन्होंने कहा,“हम मानते हैं कि हर बच्चा विशेष है और उसमें असीम संभावनाएं हैं। हमारा प्रयास है कि हम उन्हें ऐसा मंच दें, जहां वे बिना किसी दबाव के सीखें और अपने सपनों को पहचान सकें।”


“सहयोग से बनता है भविष्य” — विशेष अतिथियों का योगदान
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में स्पर्श इंटरनेशनल स्कूल की प्रधानाचार्या सुश्री ज्योति राणा और सुश्री लक्ष्मी सिंह का विशेष सहयोग रहा। उनके मार्गदर्शन और समन्वय ने इस आयोजन को और भी प्रभावशाली बना दिया।


नन्हे कदम, बड़ी उड़ान” — शिक्षा का बदलता स्वरूप
आज के दौर में शिक्षा केवल किताबों और परीक्षाओं तक सीमित नहीं रह गई है। क्यूरियस अर्ली इयर्स जैसे संस्थान यह साबित कर रहे हैं कि अगर सही दिशा और वातावरण मिले, तो बच्चे न केवल अच्छे विद्यार्थी बन सकते हैं, बल्कि आत्मनिर्भर और रचनात्मक इंसान भी बन सकते हैं।
यह दीक्षांत समारोह इस बात का प्रमाण था कि शिक्षा का असली उद्देश्य बच्चों को केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें जीवन के हर पहलू के लिए तैयार करना है।

एक समारोह नहीं, एक नई शुरुआत
क्यूरियस अर्ली इयर्स का यह दीक्षांत समारोह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह उन नन्हे बच्चों के सपनों की उड़ान का पहला पड़ाव था। यहां से निकलकर ये बच्चे एक नई दुनिया में कदम रखेंगे, जहां उनके पास ज्ञान, आत्मविश्वास और नई सोच की ताकत होगी।

रफ़्तार टूडे की न्यूज

Raftar Today
Raftar Today

Related Articles

Back to top button