Bhumafia News : सरकारी ज़मीन पर माफ़ियाओं की नजर!, ग्रेटर नोएडा में बंजर भूमि पर अवैध प्लॉटिंग का खेल, मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी तक पहुँची शिकायत, शिकायत करने वालों को मिलती हैं धमकियाँ

ग्रेटर नोएडा, रफ़्तार टूडे। ग्रेटर नोएडा में एक बार फिर सरकारी ज़मीन पर अवैध कब्जे और भू-माफ़ियाओं के खुले खेल का सनसनीखेज मामला सामने आया है। यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि आखिर सरकारी भूमि को बचाने की जिम्मेदारी किसकी है? ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के गाँव चिपियाना बुजुर्ग में रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता वीरेन्द्र शर्मा ने इस गंभीर प्रकरण की शिकायत सीधे गौतमबुद्धनगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक की है। इसके बावजूद, आरोप है कि ज़मीन पर अवैध कब्जे और प्लॉटिंग का खेल बदस्तूर जारी है।
सरकारी बंजर भूमि बनी भू-माफ़ियाओं की कमाई का ज़रिया
शिकायत के अनुसार, ग्राम चिपियाना बुजुर्ग, परगना व तहसील दादरी, जिला गौतमबुद्धनगर में स्थित सरकारी बंजर भूमि—खसरा नंबर 250, 251 और 252—राजस्व अभिलेखों में स्पष्ट रूप से बंजर एल.एम.सी. भूमि के रूप में दर्ज है। यह भूमि ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा अधिग्रहित बताई जा रही है।
लेकिन हकीकत यह है कि आसपास के खसरा नंबरों के खातेदारों ने कथित तौर पर अपने प्रभाव और चालाकी का इस्तेमाल करते हुए इन सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा कर लिया है। आरोप है कि अपने निजी खसरों की आड़ में उन्होंने सरकारी भूमि को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर अवैध प्लॉटिंग शुरू कर दी और खुलेआम बैनामे तक कर डाले।
शिकायत करने वालों को मिलती हैं धमकियाँ
सामाजिक कार्यकर्ता वीरेन्द्र शर्मा का आरोप है कि इस पूरे मामले की जानकारी पहले भी प्रशासन को दी गई थी। क्षेत्रीय लोगों ने कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें कीं, लेकिन भू-माफ़ियाओं के रसूख के आगे कार्रवाई ठंडी पड़ती रही।
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि भू-माफ़िया खुलेआम धमकी देते हैं— “जहाँ जाना है चले जाओ, किसी भी अधिकारी से शिकायत कर लो, हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।”
यह बयान न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि आम नागरिकों में डर और असुरक्षा का माहौल भी पैदा करता है।
मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी से कार्रवाई की मांग
वीरेन्द्र शर्मा द्वारा जिलाधिकारी मेधा रूपम को भेजी गई शिकायत में स्पष्ट रूप से मांग की गई है कि ग्राम चिपियाना बुजुर्ग की सरकारी बंजर भूमि खसरा नंबर 250, 251 और 252 पर किए गए अवैध कब्जों की तत्काल जांच कराई जाए। साथ ही दोषी भू-माफ़ियाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर अवैध कब्जे हटवाए जाएँ।
शिकायत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक भेजे जाने के बावजूद यदि कार्रवाई नहीं होती, तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
केवल चिपियाना नहीं, पूरे ग्रेटर नोएडा में फैला है कब्जों का जाल
यह मामला अकेला नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रेटर नोएडा क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक गाँवों में इसी तरह सरकारी जमीनों पर कब्जों का खेल चल रहा है। कहीं बंजर भूमि पर अवैध प्लॉटिंग हो रही है, तो कहीं नालों, रास्तों और आरक्षित भूमि को निगल लिया गया है।
भू-माफ़िया नए-नए तरीके अपनाकर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की कीमती जमीन पर कब्जा जमा रहे हैं, और समय रहते सख्त कार्रवाई न हुई तो आने वाले वर्षों में सरकारी जमीन केवल कागजों में ही रह जाएगी।
प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई तो बढ़ेगा खतरा
जानकारों का मानना है कि यदि ऐसे मामलों में तुरंत और कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह अवैध कब्जे भविष्य में बड़े विवाद, अवैध कॉलोनियों और कानून-व्यवस्था की समस्याओं को जन्म देंगे।
ग्रेटर नोएडा जैसे नियोजित शहर में यदि सरकारी जमीन ही सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता का भरोसा प्रशासन से उठना तय है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिलाधिकारी मेधा रूपम और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंची इस शिकायत पर प्रशासन कब और क्या सख्त कदम उठाता है। क्या भू-माफ़ियाओं का यह खेल रुकेगा, या फिर सरकारी जमीन यूँ ही लुटती रहेगी—इसका जवाब आने वाला वक्त देगा।



